हर साल की तरह 230 जनवरी को स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाले विश्व आर्थिक मंच यानी डब्लुईएफ की बैठक में इस बार भारत सरकार के पांच मंत्री जा रहे हैं। कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी इसमें हिस्सा लेने जा रहे हैं और लगभग हर बड़े कारोबारी घराने का प्रतिनिधिमंडल भी हर साल की तरह दावोस जा रहा है। सबसे दिलचस्प बात इस बार दावोस जाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों के चयन का है। पांच मंत्रियों में से दो भाजपा के मंत्री हैं और तीन सहयोगी पार्टियों के मंत्री हैं। सहयोगी पार्टियों से तीनों बिल्कुल युवा नेता दावोस जा रहे हैं, जबकि भाजपा ने अपनी पार्टी से किसी युवा नेता का चयन नहीं किया।
भाजपा के दो केंद्रीय मंत्री दावोस जा रहे हैं। उनमें एक अश्विनी वैष्णव हैं और दूसरे सीआर पाटिल हैं। इनके अलावा तीन सहयोगी पार्टियों के नेताओं में एक चिराग पासवान हैं। वे दिवंगत रामविलास पासवान के बेटे हैं और लोक जनशक्ति पार्टी के नेता हैं। वे पहली बार के मंत्री हैं। यह समानता दावोस जा रहे तीनों मंत्रियों में हैं। भाजपा की सहयोगी रालोद के प्रमुख जयंत चौधरी दूसरे मंत्री हैं। वे दिवंगत अजित सिंह के बेटे हैं और पहली बार के मंत्री हैं। ऐसे ही तीसरा नाम टीडीपी के राममोहन नायडू का है। वे टीडीपी के बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री येरन नायडू के बेटे हैं। वे भी पहली बार के मंत्री हैं। टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने उनके नाम पर सहमति दी होगी। वैसे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू अपने बेटे और राज्य सरकार के मंत्री नारा लोकेश के साथ दावोस जा रहे हैं।