क्या संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल आने जा रहा है? एक देश, एक चुनाव के बाद विशेष सत्र को लेकर जिस एक एजेंडे की सबसे ज्यादा चर्चा है वह महिला आरक्षण का है। ध्यान रहे इसका बिल राज्यसभा ने 2010 में ही पास कर दिया था। इसलिए अगर सरकार पुराने बिल में कोई बदलाव नहीं करती है तो उसे सिर्फ लोकसभा से पास कराना होगा। अगर बदलाव होगा तब इसे फिर से राज्यसभा में ले जाना होगा। ध्यान रहे सरकार के पास लोकसभा में प्रचंड बहुमत है। ऊपर से कांग्रेस, लेफ्ट, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल, जनता दल यू जैसी तमाम बड़ी पार्टियों का समर्थन इस बिल को है। इसलिए अगर यह बिल आता है तो उसे पास होने में कोई समस्या नहीं होगी।
असल में पिछले कुछ दिनों से महिलाओं को लेकर जैसी राजनीति हो रही है उसे देखते हुए इसकी प्रबल संभावना दिख रही है कि मास्टरस्ट्रोक के तौर पर महिला आरक्षण बिल लाकर पास कराया जाए। ध्यान रहे एक कांस्टीट्यूएंसी के रूप में महिला मतदाताओं का उभार कई चुनावों में देखने को मिला है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले चार फीसदी ज्यादा वोट डाले। बिहार में भी महिलाएं ज्यादा वोट डाल रही हैं। यह कई राज्यों में देखने को मिला है। महिलाओं की इस भूमिका को देख कर की तृणमूल कांग्रेस और बीजू जनता दल ने अपनी पार्टी की 40 फीसदी टिकटें महिलाओं को दिया।
अभी जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं या इस साल जहां चुनाव हुए हैं वहां महिला मतदाताओं को ध्यान में रख कर कई योजनाओं की घोषणा हुई। चुनाव में जाने से पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहन योजना की घोषणा की और सभी व्यस्क महिलाओं के खाते में पैसे डालने शुरू किए। उन्होंने वादा किया है कि आने वाले दिनों हर महिला को हर महीने तीन हजार रुपए मिलेंगे। जिस समय मध्य प्रदेश में यह घोषणा हुई उसी समय कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार ने गृह लक्ष्मी योजना के तहत महिलाओं के खाते में नकद रकम ट्रांसफर करने की योजना का शुभारंभ किया। कांग्रेस ने मई में हुए चुनाव में इसका वादा किया था। पंजाब में आम आदमी पार्टी यह योजना चला रही है।
दिल्ली और कर्नाटक में महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई है। पिछले दिनों रक्षा बंधन के मौके पर केंद्र सरकार ने रसोई गैस सिलिंडर की कीमतों में दो सौ रुपए की कटौती की। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विट करके कहा कि बहनों का जीवन कुछ आसान होगा। सो, हर तरह से महिला मतदाताओं को खुश करने के प्रयास चल रहे हैं। भाजपा हो या कांग्रेस या आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल, जदयू तमाम पार्टियां इस काम में लगी हैं। तभी ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का बिल आ सकता है। अगर बिल आता है तो उसमें सबसे ज्यादा दिलचस्पी यह देखने में होगी कि सरकार आरक्षण के भीतर आरक्षण यानी कमजोर व वंचित तबके की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था करती है या नहीं।