वक्फ संशोधन बिल ने भाजपा की स्थिति मजबूत की है। एनडीए के अंदर भाजपा के एजेंडे को मान्यता मिली है। कई ऐसी सहयोगी पार्टियां, जो मुस्लिमों के प्रति सद्भाव रखती हैं उन्होंने भी इस बिल के समर्थन में बोला और पक्ष में वोट किया। जानकार सूत्रों का कहना है कि भाजपा की ओर से सभी सहयोगी पार्टियों के साथ इस बारे में पहले से बात की गई थी। इसके अलावा भाजपा ने पहले ही संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी की बैठक में सहयोगी पार्टियों के हिसाब से बदलाव का संकेत दे दिया था। जनता दल यू, लोजपा जैसी पार्टियों ने जो सुझाव दिए उनको शामिल कर लिया गया। तभी भाजपा के संसदीय रणनीतिकार खुश हैं कि लोकसभा में एनडीए की जो संख्या है लगभग उतने ही वोट बिल के पक्ष में पड़े। एनडीए के लोकसभा सांसदों की संख्या 293 है और उसे 288 वोट मिले।
प्रधानमंत्री वोटिंग के समय मौजूद नहीं थे और स्पीकर वोट नहीं डाल सकते थे। इस तरह उसकी कुल संख्या में से सिर्फ तीन सांसद गैरहाजिर रहे। इसी तरह राज्यसभा में भाजपा के 98 सांसद हैं और मनोनीत व निर्दलीय जोड़ कर एनडीए के कुल सांसदों की संख्या 126 पहुंचती है। लेकिन उसे 128 वोट मिले। इसका मतलब है कि जिन पार्टियों ने अपने सांसदों को अंतररात्मा की आवाज पर वोट डालने को कहा था उनमें से कुछ वोट बिल के पक्ष में पड़े। इससे दोनों सदनों में भाजपा की स्थिति मजबूत हुई। साथ ही देश की राजनीति में भी भाजपा का एजेंडा स्थापित हुआ। भाजपा वक्फ बोर्ड कानून में संशोधन की बात दशकों से कर रही थी। इसको बदलने का कानून पास होना भाजपा के एक और बड़े एजेंडे का पूरा होना है। इसका सीधा राजनीतिक लाभ भाजपा को मिलेगा। दूसरी ओर सहयोगी पार्टियां कोई खास लाभ में नहीं रहेंगी।