केंद्र सरकार के बनाए तीन नए आपराधिक कानून देश भर में लागू हो गए हैं। लेकिन अब भी इन्हें लेकर बहुत कंफ्यूजन है। पुलिस और न्यायिक अधिकारियों से लेकर पत्रकार और आम आदमी तक सब कंफ्यूज हैं। इस बीच कई राज्य सरकारों ने इसके अनेक प्रावधानों को लेकर सवाल उठाया है। ध्यान रहे कानून व्यवस्था राज्य सरकार का मामला है। राज्यों की पुलिस की कानून लागू करने होते हैं इसलिए उनको इसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए और कानून राज्यों की जरुरत के हिसाब से होने चाहिए। इसी आधार पर तमिलनाडु की सरकार ने इन कानूनों के कई प्रावधानों का विरोध किया है।
तमिलनाडु सरकार एक जुलाई से लागू हुए तीन कानूनों- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता में बदलाव की तैयारी में है। राज्य सरकार ने इसके लिए एक कमेटी का गठन किया है, जिसकी सिफारिशों के आधार पर इन कानूनों में बदलाव किया जाएगा। तमिलनाडु के बाद कई गैर भाजपा राज्यों की सरकारें इस तरह की पहल कर सकती हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाया है और पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने लेख लिख कर बताया है कि इसे पार्ट टाइम लोगों ने तैयार किया है और संबंधित पक्षों से राय मशविरा नहीं किया गया है। यह कानून विपक्ष की गैरहाजिरी में पास हुआ था। सो, आने वाले दिनों में इसका विरोध बढ़ सकता है।