कांग्रेस नेता राहुल गांधी फैजाबाद में समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद की जीत को शोपीस बना कर घूम रहे हैं। पहले संसद के सत्र में अवधेश प्रसाद को ट्रॉफी की तरह दिखाया गया। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता उनका हाथ पकड़ कर चलते थे। उनको आगे की लाइन में बैठाया गया और कहा जा रहा है कि विपक्ष उनको डिप्टी स्पीकर का उम्मीदवार बना सकता है। संसद सत्र खत्म होने के बाद राहुल गांधी गुजरात के दौरे पर गए तो वहां भी अयोध्या और राम जन्मभूमि मंदिर का मुद्दा लेते गए। वहां भी उन्होंने शोपीस के तौर पर अयोध्या को पेश किया और कहा कि जिस तरह से भाजपा को अयोध्या में हराए उसी तरह उसको गुजरात में भी हराएंगे। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर के आंदोलन को कांग्रेस ने हरा दिया है।
असल में कांग्रेस और सपा दोनों फैजाबाद की जीत को एक रणनीति के तहत इस तरह से पेश कर रहे हैं। हकीकत यह है कि अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण का आंदोलन शुरू होने के बाद से यानी 1989 से 2024 तक 10 चुनाव हुए हैं और इनमें से भाजपा की जीत हार का रिकॉर्ड बराबरी का है। वह पांच बार जीती है और पांच बार हारी है। आंदोलन शुरू होने के बाद 1989 में सीपीआई के मित्रसेन यादव इस सीट से जीते थे। 1991 और 1996 में भाजपा के विनय कटियार जीते लेकिन 1998 में फिर मित्रसेन यादव समाजवादी पार्टी से जीत गए। इसके बाद 1999 में विनय कटियार फिर जीते लेकिन 2004 में मित्रसेन यादव फिर जीते और इस बार बहुजन समाज पार्टी से। इसके बाद 2009 में कांग्रेस के निर्मल खत्री जीते। उसके बाद लगातार दो बार भाजपा के लल्लू सिंह और अब सपा के अवधेश प्रसाद। यानी उस सीट पर कम्युनिस्ट, कांग्रेस, सपा और बसपा चारों ने भाजपा को हराया है। लेकिन कभी किसी ने यह दावा नहीं किया कि उसने राम जन्मभूमि मंदिर के आंदोलन को हरा दिया। आंदोलन को हरा देने या अयोध्या में भाजपा को हरा देने का नैरेटिव उलटा भी पड़ सकता है, इस बात का ध्यान रखना चाहिए। कांग्रेस और सपा को लग रहा है कि इससे पिछड़ी और दलित जातियों को एकजुट कर देंगे लेकिन हो सकता है कि हिंदू पहले से ज्यादा एकजुट हो जाएं।