लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपने सांसदों के प्रदर्शन पर नजर रख रहे हैं या कम से कम उन्होंने ऐसा दिखाया है कि उनकी नजर सबके ऊपर है। पिछले दिनों बजट सत्र के पहले चरण के समापन के समय उन्होंने कांग्रेस के सभी 99 लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई थी। उसमें उन्होंने कई सांसदों के भाषणों की तारीफ की। राहुल ने नाम लेकर नेताओं की तारीफ की और कहा कि उन्होंने विषय के हिसाब से अपने भाषण की तैयारी की थी। इसके बाद उन्होंने सभी सांसदों को इसी तरह तैयारी के साथ सदन में आने और तथ्यों व तर्कों के आधार पर सरकार को घेरने का निर्देश दिया।
हो सकता है कि राहुल राज्यसभा के सांसदों के साथ इस तरह की मीटिंग न करें क्योंकि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे उच्च सदन में पार्टी के नेता हैं और दूसरे वहां कांग्रेस के ज्यादातर वरिष्ठ नेता सदस्य हैं। लेकिन अगर राहुल इस तरह का मैसेज बनवाते हैं कि वे सांसदों के कामकाज और संसद में उनके प्रदर्शन पर नजर रख रहे हैं और उस आधार पर उनके बारे में धारणा बनेगी तो यह कांग्रेस के लिए अच्छी बात होगी। भाजपा में यह सिस्टम काफी समय से काम कर रहा है। भाजपा में सिर्फ संसद के अंदर कामकाज पर ही नजर नहीं रखी जाती है, बल्कि क्षेत्र में भी सांसद कैसा काम कर रहे हैं इसका भी रिकॉर्ड रखा जाता है। उसी आधार पर चुनाव में टिकटों का फैसला होता है।