Rahul Gandhi caste census: राहुल गांधी हर जगह के लोगों के पांव में एक ही साइज का जूता फिट करना चाहते हैं। पिछले कुछ दिनों से वे संविधान बचाओ, आरक्षण बढ़ाओ और जाति गणना कराओ का मुद्दा लेकर देश भर में घूम रहे हैं।
जाति गणना कराने और आरक्षण बढ़ाने का मंत्र उनको देने वाले नीतीश कुमार कबके भाजपा के साथ चले गए लेकिन गुरुमंत्र की तरह राहुल उसकी गांठ बांधे हुए हैं।
उन्होंने कर्नाटक का चुनाव इस मुद्दे पर लड़ा। फिर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना का चुनाव इसी मुद्दे पर लड़ा।(Rahul Gandhi caste census)
फिर लोकसभा और चार राज्यों का चुनाव और उसके बाद फिर चार अन्य राज्यों का चुनाव इसी मुद्दे पर लड़ा।
14 राज्यों में से कर्नाटक, तेलंगाना व झारखंड और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका कुछ फायदा हुआ। बाकी जगह यह मुद्दा चल नहीं पाया। लोगों ने इन मुद्दों के बावजूद भाजपा को वोट दिया।
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फिर भी राहुल यह मुद्दा नहीं छोड़ रहे हैं। वे दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी यह मुद्दा लेकर उतरे हैं। उन्होंने सोमवार को दिल्ली के सीलमपुर में पहली रैली की, जिसमें उन्होंने संविधान की प्रति हाथ में ले रखी थी।
वे संविधान बचाने की बात कर रहे थे और उन्होंने भाजपा व आम आदमी पार्टी दोनों के जाति गणना के मुद्दे पर घेरा। राहुल ने कहा कि भाजपा और आप के लोग जाति गणना पर कुछ नहीं बोलते हैं।
यह अलग बात है कि इससे पहले के चुनावों में कांग्रेस के साथ ही आप भी जाति गणना, आरक्षण बढ़ाने और संविधान बचाने के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही थी।
सवाल है कि दिल्ली में क्या जाति गणना और आरक्षण का मुद्दा कुछ काम कर पाएगा?(Rahul Gandhi caste census)
क्या कांग्रेस को 15 साल के शीला दीक्षित के कामकाज और उसके बाद राज्य व केंद्र सरकार की विफलता व आपसी झगड़े के मुद्दे पर चुनाव नहीं लड़ना चाहिए था?
इसी मुद्दे पर नई दिल्ली से कांग्रेस उम्मीदवार संदीप दीक्षित को लोगों का समर्थन और सहानुभूति दोनों मिल रहा है।