चाचा भतीजा यानी शरद पवार और अजित पवार के खेल में एक और चाचा भतीजा का पहलू है। भाजपा कि दिग्गज नेता रहे दिवंगत गोपीनाथ मुंडे के भतीजे धनंजय मुंडे अब महाराष्ट्र की भाजपा-शिव सेना सरकार में मंत्री हो गए हैं। गोपीनाथ मुंडे के निधन के बाद जब भाजपा ने उनकी बेटियों- पंकजा और प्रीतम मुंडे को आगे किया तो धनंजय काफी नाराज हुए थे। धनंजय बाद में एनसीपी में शामिल हो गए थे। उनको बीड विधानसभा सीट पर पिछला चुनाव एनसीपी की टिकट से लड़ा और पंकजा को हरा दिया। विधानसभा चुनाव हारने के बाद से पंकजा मुंडे अपने लिए पार्टी में भूमिका तलाश रही हैं। पिछले दिनों उन्होंने नाराजगी में यहां तक कहा कि वे भाजपा की हैं लेकिन भाजपा उनकी नहीं है।
अब अजित पवार के साथ साथ धनंजय मुंडे भी भाजपा गठंबधन जुड़ गए हैं और राज्य सरकार के मंत्री बन गए हैं। तभी सवाल है कि धनंजय मुंडे के गठबंधन में रहते हुए पंकजा मुंडे के साथ भाजपा कैसा बरताव करेगी? ध्यान रहे पहले भी धनंजय मुंडे को ही गोपीनाथ मुंडे का उत्तराधिकारी माना जाता था। हालांकि भाजपा ने पंकजा को संगठन में जगह दी है और उनकी बहन परली लोकसभा सीट से सांसद हैं। अब भी पंकजा को विधान परिषद में भेजा जा सकता है। यह भी संभव है कि चुनाव के समय भाजपा अपनी परंपरागत बीड सीट एनसीपी के लिए नहीं छोड़े। कई लोग इस बात की भी आशंका जता रहे हैं कि विधानसभा चुनाव तक यह गठबंधन नहीं रहना है और चुनाव के समय ज्यादातर नेता वापस एनसीपी की टिकट से ही लड़ेंगे। लेकिन उससे पहले भाजपा पंकजा मुंडे को कैसे समझाती है यह देखने वाली बात होगी।