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05-04-2025 Vol 19

झारखंड में भाजपा की योजना क्या है?

झारखंड में केंद्रीय एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं। यह भी संभव है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी गिरफ्तार कर ले। खुद मुख्यमंत्री को इसका अंदाजा है इसलिए उन्होंने अपने एक विधायक की सीट खाली करा ली है, जहां से उनकी पत्नी चुनाव लड़ सकती हैं। लेकिन यह तो हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा की योजना है। भाजपा की योजना क्या है? क्या भाजपा के पास कोई राजनीतिक योजना है, जिससे वह केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का फायदा उठा सके? अगर ईडी की कार्रवाई से राज्य में भगदड़ मचती है या उथल-पुथल होती है तो क्या भाजपा का प्रदेश नेतृत्व उसका फायदा उठाने और राजनीतिक लाभ लेने की स्थिति में है?

ऐसा लग नहीं रहा है कि प्रदेश में भाजपा के पास कोई राजनीतिक योजना है या तैयारी है। प्रदेश के नेता इस उम्मीद में बैठे हैं कि सब कुछ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई से ही हो जाएगा। लेकिन अगर ऐसा होना होता तो बहुत पहले हो जाता। ईडी की कार्रवाई लंबे समय से चल रही है और मुख्यमंत्री की विधानसभा सदस्यता के ऊपर भी तलवार दो साल से ज्यादा समय से लटकी हुई है। लेकिन चूंकि कोई राजनीतिक पहल नहीं हुई, जिससे झारखंड मुक्ति मोर्चा या कांग्रेस के विधायक टूटें और सरकार अल्पमत में आए इसलिए सरकार मजे में चलती रही। यह रहस्य है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में सरकार गिरा कर आसानी से अपनी सरकार बना लेने वाली भाजपा झारखंड में ऐसा कुछ नहीं कर पाई। कम से कम तीन बार कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने की गंभीर कोशिश होने की खबरें आई थीं।

बहरहाल, अब भी अगर ईडी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लेती है और जैसी कि चर्चा है उसी समय राज्यपाल चुनाव आयोग की ओर से भेजा गया बंद लिफाफा खोल कर मुख्यमंत्री की विधानसभा की सदस्यता खत्म कर देते हैं तब भी क्या हो जाएगा? इससे तो हेमंत सोरेन की सरकार नहीं गिरेगी। सरकार के पास 48 विधायकों का समर्थन है, जबकि बहुमत का आंकड़ा 41 का है। अगर हेमंत सोरेन की विधायकी समाप्त हो जाती है तब भी 47 विधायक सरकार के साथ होंगे। अगर चुनाव आयोग की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री के भाई बसंत सोरेन की सदस्यता चली जाती है तब भी सरकार के पास 46 विधायक होंगे, जबकि बहुमत का आंकड़ा कम होकर 40 हो जाएगा।

तभी सवाल है कि हेमंत सोरेन के खिलाफ ईडी की कार्रवाई या उनकी गिरफ्तारी से झारखंड सरकार पर क्या असर होगा? वे अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बना देंगे। अगर किसी तकनीकी कारण से, जिसका हवाला भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे दे रहे हैं, राज्यपाल उनकी पत्नी को शपथ नहीं दिलाते हैं तो वे किसी और को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा देंगे। अगर इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी सरकार जस की तस चलती रहती है तो जेएमएम को क्या नुकसान होगा और भाजपा को क्या फायदा होगा? एक बड़ा सवाल यह भी है कि इस समय सरकार को अस्थिर करने का क्या मकसद है? यह तय है कि भाजपा को 11 महीने के लिए अपनी सरकार नहीं बनानी है और यह भी तय है कि लोकसभा के साथ विधानसभा का चुनाव नहीं कराना है। इसलिए अभी से 11 महीने तक राष्ट्रपति शासन भी नहीं लगा कर रख सकते हैं। तभी इस कार्रवाई की टाइमिंग बहुत हैरान करने वाली है। चुनाव से पहले कोई सख्त कार्रवाई हेमंत सोरेन के प्रति सहानुभूति भी पैदा कर सकती है।

NI Political Desk

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