वक्फ संशोधन बिल पर प्रादेशिक पार्टियों की चिंता राज्यसभा में प्रकट हुई। कई ऐसी प्रादेशिक पार्टियों ने वक्फ बिल के खिलाफ वोट किया, जिनके बारे में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के रणनीतिकारों ने भी नहीं सोचा था। इनमें कई ऐसी पार्टियां हैं, जिनका लोकसभा में कोई सदस्य नहीं है या बहुत मामूली संख्या है लेकिन राज्यसभा में जिनकी अच्छी खासी संख्या है। इनमें कई पार्टियां ऐसी हैं, जो कुछ समय पहले तक प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भाजपा के साथ रहे हैं या अब भी भाजपा के साथ तालमेल की चर्चा कर रहे हैं। तभी राज्यसभा के आंकड़ों ने ‘इंडिया’ ब्लॉक के रणनीतिकारों को चौंकाया। विपक्षी गठबंधन के नेता मान रहे थे कि लोकसभा के मुकाबले राज्यसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के वोटों में ज्य़ादा अंतर होगा। यह भी माना जा रहा था कि कुछ प्रादेशिक पार्टियां अगर बिल के खिलाफ वोट नहीं करेंगी तो सदन से वाकआउट कर जाएंगी या वोटिंग में हिस्सा नहीं लेंगे। लेकिन पार्टियों ने न सिर्फ वोटिंग में हिस्सा लिया, बल्कि बिल के खिलाफ वोट डाला।
इसका नतीजा यह हुआ है कि राज्यसभा में बिल के पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 वोट पड़े। गौरतलब है कि राज्यसभा में कांग्रेस और समूचे ‘इंडिया’ ब्लॉक के पास 81 सांसद हैं। इसलिए जब वोटिंग के बाद बिल के खिलाफ 95 वोट पड़ने का आंकड़ा आया तो दोनों पक्षों के रणनीतिकार चौंके। बिल के खिलाफ जो 14 वोट पड़े हैं वह ऐसी पार्टियों के हैं, जिनके साथ ‘इंडिया’ ब्लॉक की लड़ाई है। जानकार सूत्रों का कहना है कि तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी अन्ना डीएमके, ओडिशा की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल, तेलंगाना की मुख्य विपक्षी पार्टी भारत राष्ट्र समिति और आंध्र प्रदेश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के सांसदों ने बिल के खिलाफ वोट किया।
राज्यसभा में बीजू जनता दल के सात और अन्ना डीएमके के चार सांसद हैं। इन दोनों पार्टियों का एक भी सांसद लोकसभा में नहीं है लेकिन राज्यसभा में दोनों के 11 सांसद हैं। इनके अलावा वाईएसआर कांग्रेस के सात और भारत राष्ट्र समिति के चार सांसद हैं। इस तरह इन चार पार्टियों के 22 सांसद हैं। इनमें से दो पार्टियों बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी नहीं किया था। उन्होंने कह दिया था कि सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट करें। माना जा रहा है कि इन चार पार्टियों के 22 सांसदों में से कम से कम 14 सांसदों ने बिल के खिलाफ वोट किया, जिससे वक्फ बिल के खिलाफ पड़े वोटों की संख्या 95 हो गई। यह विपक्षी गठबंधन के लिए सुखद आश्चर्य की बात थी लेकिन सवाल है कि इसके आगे क्या होगा? क्या विपक्षी पार्टियों की ओर से इन पार्टियों से संपर्क किया जाएगा? ध्यान रहे परिसीमन के मसले पर बीजू जनता दल ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की बुलाई बैठक में अपना प्रतिनिधि भेजा था। हालांकि विपक्ष के साथ इन पार्टियों की राजनीति का टकराव है। डीएमके और अन्ना डीएमके एक दूसरे के विरोधी हैं और अन्ना डीएमके की बात भाजपा से हो रही है। ऐसे ही कांग्रेस और बीआरएस आमने सामने लड़ रहे हैं। इसके बावजूद बीजद और वाईएसआर कांग्रेस के साथ विपक्ष कामचलाऊ संबंध विकसित कर सकता है।