बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की राजनीति का एकाधिकार कुछ मामलों में बहुजन समाज पार्टी के पास था। कांशीराम वह नेता था, जिन्होंने अंबेडकर को भारत की राजनीति में सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया। महात्मा गांधी निःसंदेह भारत में सबसे ज्यादा सम्मानित और पूजनीय हैं लेकिन उनके नाम पर वोट नहीं मिलता है। वोट दिलाने वाले नाम के तौर पर अंबेडकर को कांशीराम ने स्थापित किया और बाद में यह विरासत मायावती ने आगे बढ़ाई। अंबेडकर के अपने पोते उनके नाम का वह इस्तेमाल नहीं कर पाए जो बसपा और मायावती ने किया। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि मायावती के हाथ से यह विरासत निकल रही है।
मायावती की निष्क्रियता और चुनावी पराजय ने उनको हाशिए में किया है और उनकी जगह लेने के लिए तेजी से जो चेहरा उभर रहा है वह चंद्रशेखर आजाद का है। उन्होंने भीम आर्मी बनाई है और अपने आक्रामक तेवर से युवाओं को साथ जोड़ रहे हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने इस पर मुहर भी लगाई है। उन्होंने अपने यहां भीमराव अंबेडकर की 125 फीट ऊंची मूर्ति का अनावरण किया तो उस कार्यक्रम में मायावती या प्रकाश अंबेडकर की बजाय उन्होंने चंद्रशेखर आजाद को बुलाया। बदले में चंद्रशेखर ने उनको 26 अगस्त को होने वाले भीम आर्मी के महासम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया। पिछले दिनों चंद्रशेखर के ऊपर गोली चली थी, जिसके बाद उनके प्रति लोगों की जिज्ञासा और बढ़ी है।