Thursday

03-04-2025 Vol 19

तेलंगाना में किसको फायदा?

तेलंगाना के विधानसभा चुनाव के बाद बाद फोकस आंध्र प्रदेश पर है। हालांकि तेलंगाना की तरह आंध्र में जगन मोहन रेड्डी की सरकार 10 साल की नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि तेलंगाना की तरह वहां भी एंटी इन्कम्बैंसी हो सकती है। ध्यान रहे आसपास के दो राज्यों में छह महीने के अंदर में सत्ता परिवर्तन हुआ है। पहले कर्नाटक में भाजपा को हरा कर कांग्रेस जीती और फिर तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति को हरा कर कांग्रेस ने सरकार बनाई है। अब सबकी नजर आंध्र प्रदेश पर है, जहां कांग्रेस 10 साल से सत्ता से बाहर है। आंध्र प्रदेश का विभाजन करने के बाद कांग्रेस शून्य पर आ गई। पिछले विधानसभा चुनाव में तो कांग्रेस को सिर्फ सवा फीसदी वोट मिले थे। गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और कांग्रेस इस भरोसे में है कि मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की बहन वाईएस शर्मिला उसके साथ जुड़ कर कांग्रेस को फायदा पहुंचाएंगी।

तभी यह सवाल है कि कर्नाटक और तेलंगाना के बाद कांग्रेस के प्रति जो धारणा बदली है उसका फायदा उसको मिल पाएगा? या मुख्य विपक्ष की भूमिका निभा रही तेलुगू देशम पार्टी को फायदा होगा? ध्यान रहे आंध्र प्रदेश का बंटवारा करके अलग राज्य बनाने के नाम पर कांग्रेस ने तेलंगाना में इस बार प्रचार किया था और चुनाव जीती। इसलिए संभव है कि तेलंगाना में जिस मुद्दे पर फायदा मिला, आंध्र प्रदेश में उसका नुकसान हो क्योंकि आंध्र के लोग राज्य के विभाजन से नाराज थे। उनकी नाराजगी अभी दूर नहीं हुई है। दूसरी ओर तेलुगू देशम पार्टी ने लगातार जगन मोहन रेड्डी सरकार के खिलाफ अभियान चलाया है। जगन इतने परेशान थे कि उन्होंने पिछले दिनों एक पुराने मुकदमे में चंद्रबाबू नायडू को गिरफ्तार कराया। इसके अलावा टीडीपी के साथ एक फायदे वाली बात यह है कि मशहूर तेलुगू फिल्म स्टार पवन कल्याण की जन सेना पार्टी ने टीडीपी से तालमेल कर लिया है और संभव है कि चुनाव आते आते भाजपा भी तालमेल करे।

NI Political Desk

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