यह बड़ी हैरानी की बात है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में जिन नेताओं की टिकट कटी है वे किसी न किसी स्थानीय नेता को जिम्मेदार बता रहे हैं और उस स्थानीय नेता के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। तभी सवाल है कि क्या भाजपा आलाकमान और केंद्रीय चुनाव समिति ने इस तरह से टिकट बांटी है किसी ने कहीं किसी को टिकट दिलवा दी तो कहीं किसी ने किसी की टिकट कटवा दी? सबसे दिलचस्प मामला राजस्थान का है, जहां 20 से ज्यादा सीटों पर भाजपा नेताओं के समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें से कई सीटों पर नेता बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर रहे हैं।
दो सीटों का मामला देख कर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे टिकट बंटी है। भाजपा आलाकमान ने नरपत सिंह राजवी को विद्याधर नगर सीट से टिकट नहीं दिया और बाद में बहुत विरोध हुआ तो उनको चितौड़गढ़ सीट से उम्मीदवार बना दिया। इसके लिए चितौड़गढ़ सीट के विधायक चंद्रभान सिंह आक्या की टिकट काटनी पड़ी। अब चंद्रभान सिंह का आरोप है कि प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने उनकी टिकट काटी है। आक्या ने आरोप लगाया है कि सीपी जोशी पहले कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई में थे, जबकि वे खुद आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के थे और तभी से जोशी से उनका विवाद है। सो, आक्या के समर्थक जोशी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उधर उदयपुर सीट पर टिकट नहीं मिलने से नाराज शहर के डिप्टी मेयर पारस सिंघवी के समर्थक पूर्व विधायक और असम के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने सिंघवी की जगह ताराचंद जैन की टिकट कराई।