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05-04-2025 Vol 19

भाजपा सांसदों को विधायकी क्यों लड़ाती है?

भारतीय जनता पार्टी ने एक नई परिपाटी शुरू की है। वह विधानसभा चुनावों में सांसदों को उतारती है और चुनाव में अगर वे जीत जाते हैं तो विधानसभा सीट से उनका इस्तीफा करा देती है। यह हर स्थिति में होता है। राज्य में चाहे भाजपा की सरकार बने या नहीं बने, जो सांसद विधानसभा का चुनाव जीतते हैं उनको विधानसभा से इस्तीफा देना होता है। तभी सवाल है कि भाजपा सांसदों को क्यों चुनाव लड़ाती है? क्या यह सरकार और पार्टी दोनों के संसाधन की बरबादी नहीं है? भाजपा जैसी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे जिम्मेदार नेता ऐसा कैसे होने देते हैं कि एक-दो सीट जीतने के लिए सांसद को चुनाव लड़ाएं, बाद में इस्तीफा कराएं और फिर विधानसभा का उपचुनाव कराया जाए?

ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कहा जा रहा है कि इस साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा कई सांसदों को उतारने वाली है। छत्तीसगढ़ में तो उसने पाटन विधानसभा सीट पर दुर्ग के अपने सांसद विजय बघेल को टिकट दी है। कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी कुछ सांसदों को विधानसभा का चुनाव लड़ाया जा सकता है। तेलंगाना के बारे में तो चर्चा है कि भाजपा वहां अपने चारों सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने की तैयारी कर रही है। यह भी कहा जा रहा है कि जिन राज्यों में भाजपा की मजबूत स्थिति दिख रही है वहां खुद ही कई सांसद विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं।

बहरहाल, इस साल के शुरू में हुए त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपनी सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक को विधानसभा का चुनाव लड़ा दिया था। उनके चुनाव में उतरने के साथ ही इस बात की चर्चा शुरू हो गई थी कि अगर फिर से भाजपा जीतती है तो उसकी सरकार बनने पर प्रतिमा भौमिक मुख्यमंत्री बनेंगी। चुनाव में भाजपा जीती और प्रतिमा भौमिक भी जीत गईं, लेकिन मुख्यमंत्री फिर से मानिक साहा ही बने और केंद्रीय मंत्री भौमिक ने विधानसभा से इस्तीफा दिया और उनकी सीट पर उपचुनाव हुआ।

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तो कमाल ही किया था। पार्टी ने पांच सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतार दिया था। इनमें चार सांसद लोकसभा के थे और एक राज्यसभा के। इन पांच में से तीन सांसद चुनाव हार गए थे। भाजपा ने केंद्रीय मंत्री, निशिथ प्रमाणिक को भी चुनाव में उतारा था। प्रमाणिक और जगन्नाथ सरकार दो सांसद थे, जो विधानसभा का चुनाव जीते और बाद में विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। इनके अलावा भाजपा ने लोकसभा सांसद बाबुल सुप्रियो और लॉकेट चटर्जी को टिकट दी थी और राज्यसभा के मनोनीत सांसद स्वपन दासगुप्ता का इस्तीफा करा कर उनको विधानसभा चुनाव लड़ाया था। ये तीनों हार गए थे। विधानसभा चुनाव हारने के बाद अभूतपूर्व कदम उठाते हुए केंद्र  सरकार ने फिर से स्वपन दासगुप्ता को राज्यसभा में बचे हुए कार्यकाल के लिए दोबारा मनोनीत कर दिया था।

NI Political Desk

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