भारतीय जनता पार्टी ने जैसे पिछले कुछ बरसों से यह परंपरा विकसित की है कि चाहे मुख्यमंत्री का दावेदार घोषित करके चुनाव लड़ें या बिना चेहरा घोषित किए लड़ें, नतीजे के बाद अगर सरकार बनाने की स्थिति आती है तो मुख्यमंत्री का फैसला कम से कम एक से दो हफ्ते के बीच करेंगे वैसे ही यह परंपरा भी विकसित हो रही है कि मुख्यमंत्री का नाम की घोषणा अंतिम समय तक रोके रखनी है। पता नहीं इससे असल में क्या हासिल होता है लेकिन भाजपा में यह परंपरा स्थापित हो रही है। हफ्ते, दस दिन या दो हफ्ते तक मीडिया को और नेताओं को कयास लगाने दिया जाता है। उसके बाद शपथ की तारीख तय होती है, फिर स्थान तय होता है, फिर मुख्य अतिथि और अन्य अतिथि तय होते हैं, फिर अतिथियों को न्योता भेजा जाता है और तब अंत में मुख्यमंत्री का नाम तय किया जाता है। यह बिल्कुल ऐसी स्थिति है जैसे शादी का निमंत्रण बिना दुल्हा, दूल्हन के नाम के भेजा जाए।
राजधानी दिल्ली में नतीजा आए हुए 10 दिन बीत गए हैं। अभी तक औपचारिक रूप से विधायक दल की बैठक नहीं हुई है और नेता का चुनाव नहीं हुआ है। लेकिन यह तय हो गया है कि शपथ ग्रहण समारोह 20 फरवरी को होगा। यह भी तय हो गया है कि रामलीला मैदान में शपथ समारोह होगा। वहां पर भव्य पंडाल और मंच बनाया जा रहा है। पार्टी के दो राष्ट्रीय महासचिव, विनोद तावड़े और तरूण चुघ शपथ समारोह की तैयारियों की देखरेख कर रहे हैं। यह भी तय हो गया है कि मुख्य अतिथि के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहेंगे। एनडीए के शासन वाले 21 राज्यों के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा 30 हजार लोगों के इस कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। सबको न्योता भेजा जा चुका है। सबको दिल्ली के नए मुख्यमंत्री के शपथ समारोह में शामिल होना है। लेकिन शपथ किसकी होनी है यह नहीं बताया गया है। यह सिर्फ दो लोगों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पता है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा।
यह बेकार की बात है कि मुख्यमंत्री के नाम पर विचार विमर्श हो रहा है और विधायक दल की बैठक में तय होगा कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा। भाजपा ने ऐसे ऐसे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया है, जो मुख्यमंत्री पद की रायशुमारी में खुद भी अपना नाम नहीं लेते। बहरहाल, बिना सीएम तय किए शपथ समारोह का न्योता भेजने की परंपरा महाराष्ट्र से शुरू हुई है। महाराष्ट्र में 23 नवंबर को नतीजे आए थे। मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसका फैसला 10 दिन के बाद तीन दिसंबर को हुआ। लेकिन तीन दिसंबर से कई दिन पहले यह तय हो गया था कि शपथ पांच दिसंबर को होगी। शपथ की तारीख, समय और स्थान तय कर दिया गया था। अतिथि तय हो गए थे। सबको न्योता जा चुका था और तब मुख्यमंत्री व अन्य मंत्रियों का नाम तय हुआ। महाराष्ट्र में तो फिर भी लग रहा था कि देवेंद्र फड़नवीस मुख्यमंत्री बनेंगे लेकिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, ओडिशा आदि राज्यों में तो किसी को पता ही नहीं चला कि कौन सीएम बन रहा है। यही स्थिति दिल्ली में है। मुख्यमंत्री के नाम की अटकल लगा रहा हर व्यक्ति एक बात जरूर कह रहा है कि कोई ऐसा ही व्यक्ति बनेगा, जिसने मुख्यमंत्री बनने के बारे में सोचा नहीं होगा।