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28-02-2025 Vol 19

सीएम चुनने में इतना ड्रामा क्यों?

delhi cm :  किसी को अंदाजा नहीं है कि दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के नए चुने गए विधायकों की बैठक कब होगी और कब नेता चुना जाएगा।

सब हवा में तीर चला रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के आधा दर्जन दावेदार यहां वहां भागदौड़ कर रहे हैं। कोई संसद में जाकर पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिल रहा है तो कोई उप राज्यपाल वीके सक्सेना के यहां दौड़ लगा रहा है।

एक प्रबल दावेदार बताए जा रहे नेता तो बिना समय लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर पहुंच गए थे, जहां उनको गेट पर ही रोक दिया गया था। बाद में बड़ी हुज्जत और मिन्नत के बाद मिलने का समय मिला।

यह सब इसलिए चल रहा है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने नतीजों के तुरंत बाद विधायक दल की बैठक कराने और नेता चुनने की परंपरा को खत्म कर दिया है। (delhi cm )

अब हर नतीजे के बाद एक हफ्ते से दो हफ्ते तक का ड्रामा चलता है। विधायकों की बैठक नहीं बुलाई जाती है। और जब बैठक बुलाई जाती है तो जैसे जादूगर हैट से खरगोश निकालता है वैसे ही किसी की भी पर्ची निकाल दी जाती है।

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पहले कभी CM तय करने में देरी नहीं (delhi cm)

ऐसा नहीं है कि पहले कभी मुख्यमंत्री तय करने में देरी नहीं होती थी। पहले भी होती थी या अब भी कई जगह होती है लेकिन उसका कारण दूसरा होता है।

दो ही स्थितियों में विधायक दल की बैठक और नेता चुनने में देरी होती है। पहली स्थिति यह है कि पार्टी का आलाकमान कमजोर हो और वह किसी नाम पर आम सहमति नहीं बनवा पा रहा हो। (delhi cm)

जैसा कांग्रेस के साथ इन दिनों हो रहा है। लेकिन वह स्थिति तो भाजपा के साथ नहीं है। दूसरी स्थिति होती है कि पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला हो, बहुमत का इंतजाम करना हो या सहयोगी पार्टियां दबाव डाल रही हों।

लेकिन जितने राज्यों में भाजपा ने विधायक दल की बैठक बुलाने और सीएम का नाम तय करने का ड्रामा किया उसमें कहीं भी ऐसी स्थिति नहीं थी। (delhi cm)

मिसाल के तौर पर हरियाणा का मुद्दा ले सकते हैं। हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी ने नायब सिंह सैनी के नाम पर चुनाव लड़ा था।

हर जगह यही हाल…(delhi cm)

चुनाव प्रचार के बीच जब अनिल विज ने अपने को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया तो खुद अमित शाह ने और चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भाजपा जीती तो सैनी मुख्यमंत्री होंगे।

लेकिन नतीजे आने के बाद सैनी को शपथ लेने में 10 दिन लग गए। हरियाणा के नतीजे आठ अक्टूबर को आए और भाजपा को भारी बहुमत मिला। लेकिन विधायक दल की बैठक नौवें दिन 16 अक्टूबर को हुई और सैनी की शपथ 17 अक्टूबर को हुई। (delhi cm)

सोचें, नौ दिन के इस ड्रामे का क्या मतलब था? महाराष्ट्र में पहले से तय था कि भाजपा का सीएम बनेगा उसे छप्पर फाड़ 132 सीटें मिली थीं। लेकिन 23 नवंबर को नतीजे आने के बाद 12वें दिन चार दिसंबर को विधायक दल की बैठक हुई और देवेंद्र फड़नवीस नेता चुने गए।

अगले दिन पांच दिसंबर को उन्होंने शपथ ली। उससे पहले लोकसभा चुनाव के साथ ओडिशा के नतीजे आए और पहली बार भाजपा ने सरकार बनाने का बहुमत हासिल किया।

लेकिन नेता चुनने में एक हफ्ते का समय लगा। चार जून को नतीजे आए और आठवें दिन 11 जून को मोहन चरण मांझी नेता चुने गए। (delhi cm)

ऐसे ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में तीन दिसंबर को नतीजे आए और दसवें दिन 12 दिसंबर को भजनलाल शर्मा नेता चुने गए और 15 दिसंबर को शपथ हुई।

छत्तीसगढ़ में 10 को और मध्य प्रदेश में 11 को नेता का चुनाव हुआ। इतने दिन तक सीएम का चुनाव लटका कर पता नहीं भाजपा क्या हासिल करती है?

NI Political Desk

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