Delhi CM Face : भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनावों की रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। एकाध अपवादों को छोड़ दें तो भाजपा ने राज्यों में अब मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करके चुनाव लड़ना बंद कर दिया है।
2019 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा ने यह रणनीति अपनाई है। यह भाजपा की रणनीति में आया बहुत अहम बदलाव है।
इस साल के अंत में होने वाले बिहार चुनाव और अगले साल के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में इस पर नजर रखने की जरुरत होगी। (Delhi CM Face)
अगर भाजपा इसी रणनीति पर आगे चलती है और यह रणनीति कारगर होती है तो 2027 का उत्तर प्रदेश का चुनाव सबसे दिलचस्प हो जाएगा।
also read: आजाद से आगे और ओवैसी से पीछे बसपा
PM मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा (Delhi CM Face)
बहरहाल, कांग्रेस ने पिछले पांच साल में जिन राज्यों में चुनाव लड़े हैं उनमें अपवाद के लिए दो तीन राज्य हैं, जिनमें मुख्यमंत्री घोषित करके लड़ा गया। (Delhi CM Face)
2022 में उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड, 2023 में गुजरात, 2024 में हरियाणा आदि राज्यों में भाजपा ने सीएम का चेहरा घोषित किया था। लेकिन ज्यादातर राज्यों में उसने स्थानीय नेता की बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा।
कई जगह यह रणनीति कारगर नहीं हुई लेकिन ज्यादातर जगहों पर भाजपा को कामयाबी मिली। दिल्ली का विधानसभा चुनाव मिसाल है। भाजपा ने 2020 में भी दिल्ली में बिना चेहरे के चुनाव लड़ा था लेकिन जीत नहीं पाई थी।
परंतु 2025 का चुनाव बड़े बहुमत के साथ जीत लिया। भाजपा ने रणनीति के तहत ऐसा किया ताकि पूर्वांचली, पहाड़ी, जाट, गूजर, ओबीसी, एससी सबकी आस बनी रहे। यह रणनीति कारगर हुई। (Delhi CM Face)
भाजपा की राजनीति का पैटर्न
इससे ठीक पहले जिन राज्यों में चुनाव हुए वहां सिर्फ हरियाणा में नायब सिंह सैनी के नाम की घोषणा पहले से हुई थी और वह भी इसलिए क्योंकि चुनाव से छह महीने पहले ही भाजपा ने साढ़े नौ साल मुख्यमंत्री रहे मनोहर लाल खट्टर को हटा कर सैनी को सीएम बनाया था।
यह भी भाजपा की राजनीति का एक पैटर्न है। चुनाव से पहले बदल कर जिसको मुख्यमंत्री बनाते हैं, उसके चेहरे पर चुनाव लड़ते हैं। (Delhi CM Face)
उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी और गुजरात में भूपेंद्र पटेल के साथ ऐसा हुआ था। सो, सैनी के अलावा कहीं भी सीएम घोषित नहीं हुआ।
झारखंड में बाबूलाल मरांडी चुनाव लड़ा रहे थे लेकिन घोषित चेहरा नहीं थे। ऐसे ही महाराष्ट्र में भी देवेंद्र फड़नवीस चेहरा नहीं थे। जम्मू कश्मीर में जितेंद्र सिंह के नाम की चर्चा थी लेकिन पार्टी ने उनकी घोषणा नहीं की थी।
तीनों राज्यों में चौंकाने वाले चेहरे चुने (Delhi CM Face)
लोकसभा के साथ ओडिशा का विधानसभा चुनाव हुआ था और उसमें भी भाजपा ने मुख्यमंत्री का दावेदार घोषित किए बगैर चुनाव लड़ा और बाद में मोहन चरण मांझी को सीएम बना कर सबको चौंकाया। (Delhi CM Face)
उससे पहले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान का चुनाव भाजपा ने बिना सीएम चेहरा घोषित किए लड़ा, जबकि मध्य प्रदेश में उस समय शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री थे।
चुनाव के बाद तीनों राज्यों में चौंकाने वाले चेहरे चुने गए। शिवराज सिंह की जगह मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया। (Delhi CM Face)
आमतौर पर सहयोगी पार्टियों के शासन वाले राज्यों में भाजपा इस मामले में दखल नहीं देती है लेकिन बिहार में ऐसा लग रहा है कि वह नीतीश कुमार को चेहरा बना कर लड़ने के मूड में नहीं है।