लोकसभा चुनाव के बाद से भारतीय जनता पार्टी को राज्यसभा की कई सीटों का फायदा हो गया है। उसे एक सीट का फायदा राजस्थान में हुआ क्योंकि कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल केरल से लोकसभा का चुनाव जीत गए। इसी तरह एक सीट का फायदा उसे हरियाणा में हुआ क्योंकि दीपेंद्र हुड्डा लोकसभा का चुनाव जीत गए। अब उसे दो और सीटों का फायदा हुआ है। एक सीट का फायदा उसे ओडिशा में हुआ और दूसरी सीट का फायदा आंध्र प्रदेश में हुआ है।
ओडिशा में अब तक भाजपा को दो सीटों का फायदा हो चुका है। पहले बीजू जनता दल की राज्यसभा सदस्य ममता महंत ने पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दिया था। वह सीट भाजपा के खाते में चली गई। उसके बाद दूसरे सांसद सुजीत कुमार ने भी इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए। उनकी सीट पर भी उपचुनाव हुआ तो वह सीट भाजपा के खाते में चली गई है।
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ये दोनों सीटें लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा को मिली हैं। उसे एक सीट आंध्र प्रदेश में मिल गई है, जहां उसके पास सिर्फ आठ विधायक हैं। असल में राज्य में चुनाव हारने के बाद जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस से राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे शुरू हुए। इससे तीन सीटें खाली हुईं। कायदे से तीनों सीटें तेलुगू देशम पार्टी के खाते में जानी चाहिए थी या दो सीट टीडीपी को मिलती तो एक सीट 21 विधायकों वाली पवन कल्याण की पार्टी जन कल्याण सेना को मिलनी चाहिए थी।
लेकिन एक सीट गई भाजपा के खाते में। भाजपा ने टीडीपी की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे आर कृष्णैया को उम्मीदवार बनाया और चंद्रबाबू नायडू की मदद से वे राज्यसभा पहुंच गए। सोचें, इस बार के चुनाव से पहले तक बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस दोनों संसद में मुद्दों के आधार पर भाजपा की सरकार का समर्थन करते रहे थे लेकिन अब भाजपा उनकी कीमत पर अपने राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़ा रही है।