(White House): कॉलमिस्ट एच. एल. मेंकिन ने 1920 में लिखा थाः “कभी न कभी एक महान और गौरवपूर्ण दिन देश की जनता की दिली मुराद आखिरकार पूरी होगी और व्हाईट हाऊस में एक महामूर्ख शोभा पाएगा।”
डोनाल्ड ट्रंप व्हाईट हाऊस (White House) में एक महीना गुजार चुके हैं। और यह पूरा दौर उथल-पुथल भरा और अराजकतापूर्ण रहा है। व्हाइट हाऊस ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरूआती सौ घंटों को “अमेरिका में एक नए युग की शुरूआत बताया था।” यह सचमुच एक नया युग है – ऐसा जिसे हमनें न पहले देखा न जाना।
दूसरा कार्यकाल लगभग हमेशा मनहूस होता है। हम सभी यह जानते हैं। और अब अमरीका को भी यह मालूम हो रहा है।
ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के एक घंटे के बेहतर प्रवासियों में से कुछ की ग्वांटामो बे और बाकी की उनके अपने-अपने देशों में रवानगी शुरू करवा दी। हमारे अपने भारतीय लोग आतंकवादियों की तरह हथकड़ी और बेड़ियों में जकड़े अमृतसर पहुंचे। ट्रम्प ने इयोन मस्क और 20 साल के आसपास के उनके लड़कों को ढेर सारे अधिकार दे दिए। अरबों डालर के सरकारी ठेके रद्द करने के अलावा अमेरिका की दूसरे देशों को मदद करने वाली मुख्य संस्था यूएसएड में ताले लगा दिए।
उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन से अमरीका का रिश्ता खत्म कर दिया और जेलेंस्की को तानाशाह बता दिया। उन्होंने गाजा पर कब्जा कर उसे मध्यपूर्व का रिवेरा बनाने की अपनी इच्छा का इज़हार किया। उन्होंने कई देशों पर मनमाने ढंग से टेरिफ लगा दिए। उन्होंने यह वायदा किया कि पनामा नहर फिर से अमेरिका की होगी। उन्होंने ग्रीनलैंड को हासिल करने व कनाडा को अमरीका का 51वां राज्य बनाने की बात भी कही।
ट्रंप शायद अपने-आप को इस धरती का शहंशाह समझ रहे हैं। सत्ता का नशा उनके सिर चढ़ कर बोल रहा है। उन्हें अब दुनिया को उनकी कल्पना के स्वर्णयुग में ले जाने से कोई नहीं रोक सकता। वे एक नया कानून बनाते हैं तो दस पुराने कानूनों को रद्द कर देते हैं। ट्रंप की व्हाईट हाऊस(White House) में वापसी के पहले महीने में ही अमेरिका और दुनिया को यह अहसास हो गया है कि ट्रंप बंधनों और बंदिशों से पूरी तरह मुक्त हैं।
उन पर खून सवार है। इससे उनके समर्थक, मेक अमरीका ग्रेट अगेन के पैरोकार बहुत खुश हैं और जो लोग उनके खिलाफ हैं, उनकी आलोचना करते आए हैं, वे सदमे में हैं। जैसा कि इकोनोमिस्ट ने लिखा है, “लगता है अमेरिका को राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर एक बड़े टकराव का सामना करना पड़ेगा।”
ट्रंप की सत्ता लोलुपता: सम्राटों की तरह शासन की चाह या लोकतंत्र पर खतरा? (White House)
इसी हफ्ते कंजरवेटिव पॉलिटिकल एक्शन कान्फ्रेंस (सीपीएसी) में एक समूह, जो कहता है कि वो “तीसरे कार्यकाल का अभियान” चला रहा है, ने ट्रंप को रोमन सम्राट जूलियस सीजर की तरह दिखाया। शनिवार को ट्रंप ने 75 मिनट के डींगों भरे भाषण में अपनी जीतों की शेखियां बघारीं और अपने प्रतिद्वंद्वियों का मजाक उड़ाया। उन्हें पूरा यकीन है कि वे कुछ भी और सब कुछ कर सकते हैं। वे अपने ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ मिशन को लागू करने पर आमादा हैं भले ही इससे अमेरिका में टकराव हो और दुनिया तहसनहस हो जाए।
वे उन्हें बादशाह और नेपोलियन की तरह दिखाने वाले मीम्स को ख़ुशी-ख़ुशी रीपोस्ट करते हैं। और उनके साथ सम्राट नेपोलियन का यह उद्धरण भी चस्पा करे हैं कि, “जो अपने देश की हिफाज़त करता है वो किसी कानून का उल्लंघन नहीं करता”। ट्रंप में कानून के ऊपर रहने की जबरदस्त इच्छा है। जब एसोसिएटिड प्रेस ने मेक्सिको की खाड़ी को अमेरिका की खाड़ी कहने के उनके हुक्म को मानने से इंकार कर दिया तो इस समाचार एजेंसी को ओवल आफिस और एयरफोर्स वन में होने वाली कुछ गतिविधियों और कार्यक्रमों को कवर करने पर पाबंदी लगा दी गई। (White House)
ट्रंप के इस तरह के व्यवहार से अब लगभग सभी लोग यह मानने लगे हैं कि दुनिया एक ऐसे मोड़ पर पहुंच रही है जहां संयुक्त राष्ट्र संघ की अगुवाई वाला, नियम-कानूनों पर आधारित, बहुपक्षी वैश्विक तंत्र ढह रहा है और एक नया युग शुरू हो रहा है जिसमें अति राष्ट्रवादी, वाम और दक्षिणपंथी लोकलुभावन नीतियों वाली तानाशाह साम्राज्यवादी ताकतों का बोलबाला होगा। इससे भी बुरे है ट्रंप के बेतरतीब तौर-तरीके और तथ्यों की परवाह न करने की उनकी आदत।
डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी वैंस, इयोन मस्क और स्टीव बेनोन जैसे अन्य अतिदक्षिणपंथी चाहते हैं कि दुनिया के अन्य देशों में भी आज़ाद ख्याल और तरक़्क़ी-पसंद गठबंधनों का राज न हो बल्कि उनके जैसे लोगों – जैसे हंगरी के विक्टर ओरबान, इटली की जार्जिया मिलोनी, जर्मनी के एलिस विएडेल, फ्रांस की मेरिन ले पेन, तुर्की के इर्दोगान, इजराइल के नेतन्याहू और भारत के मोदी – के हाथों में सत्ता हो।
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इसलिए इस बार ट्रंप को काबू में रखना मुश्किल होगा। हालात बहुत अधिक खतरनाक हैं। यह एक ऐसी दुनिया है जिसमें यह माना जा रहा है कि बुद्धि केवल उन लोगों के पास है जो लोकलुभावन वादे करते हैं, कट्टरपंथी हैं, और इनमें से हरेक अपनेआप को अपने देश का राजा या रानी समझता है। और जाहिर है कि राजा और रानी किसी को भी मालामाल कर सकते हैं और किसी को भी सूली पर चढ़ा सकते हैं। (कॉपी: अमरीश हरदेनिया)