ईरान में हमास के राजनीतिक ब्यूरो के अध्यक्ष इस्माइल हनीयेह को जान से मार दिया गया। हमास ने उनकी हत्या की पुष्टि की है। कहां कि हमला “उनके तेहरान के घर पर किया गया है’ और उसे‘विश्वासघाती यहूदी हमला” बताया है। हनीयेह ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजे़शकियन के सत्ता संभालने के समारोह में भाग लेने के लिए ईरान गए थे। वे 7 अक्टूबर को इजराइल पर हुए भयावह हमले के बाद से ही इजराइल के निशाने पर थे।ईरान की इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने भी हनीयेह और उनके अंगरक्षक की मृत्यु की पुष्टि की है। उसने कहा कि वह इस हमले को समझने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि इजराइल ने इस संबंध में कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं किया है लेकिन वहां की मीडिया की खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे इस मामले पर कोई टिप्पणी न करें। लेकिन अति दक्षिणपंथी मंत्री मीहाई एलियाहू ने एक्स पर हमास नेता की हत्या पर प्रसन्नता व्यक्त की। इससे साफ़ है कि हमला किसने करवाया। उन्होंने हिब्रू में लिखा, “इस हत्या के बाद दुनिया थोड़ी बेहतर हो जाएगी”।
इस्माइल हनीयेह हमास के राजनैतिक ब्यूरो के प्रमुख थे और निर्वासन में रह रहे थे। हाल के वर्षों में वे ज्यादातर समय कतर और तुर्की में रहे। वे सन् 2017 में हमास के राजनैतिक ब्यूरो के प्रमुख चुने गए थे। उन्होंने खालिद मेंशाल का स्थान लिया था। लेकिन इसके पहले से ही वे एक जाने-माने व्यक्ति थे और 2006 में संसदीय चुनाव में हमास की चौंकाने वाली जीत के बाद फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री बने थे। अन्य उग्रपंथी नेताओं की तुलना में अरब नेताओं और कूटनीतिज्ञों के बीच उनकी छवि एक व्यावहारिक व्यक्ति की थी। इजराइल-गाजा संघर्ष में युद्धविराम के लिए चली चर्चाओं में उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। उन्होंने उस दौरान हमास के मुख्य संरक्षक, ईरान से बातचीत की थी और तुर्की के राष्ट्रपति से भी मुलाकात की थी। वे गाजा के याह्या सिनवार जैसे कट्टरपंथी नेताओं से संपर्क का जरिया भी थे।
हमास के अन्य कई नेताओं सहित इस्माइल 7 अक्टूबर के हमले के बाद से ही इजराइल के निशाने पर थे। गाजा में उनके पुत्रों और परिवारजनों की हत्या पहले ही हो चुकी है। लेकिन हनीयेह की मौत का व्यापक प्रभाव होगा। उसके बुरे नतीजे सामने आएंगे। इस्माइल फिलस्तीनियों में काफी लोकप्रिय थे। उनका बचपन एक शरणार्थी शिविर में बीता। वे उन लोगों का प्रतिनिधित्व करते थे जिनके पूर्वज 1948 में फिलिस्तीनी क्षेत्र छोड़कर शरणार्थी बनने पर बाध्य हुए थे और ऐसे लोगों की संख्या खासी है। वे हमास के संस्थापक शेख अहमद यासीन के पक्के चेले थे और 2003 तक उनके विश्वसनीय सहायक बन चुके थे।
यासीन के गाजा स्थित निवास पर उनकी एक तस्वीर खींची गई थी जिसमें वे एक फोन है को लकवाग्रस्त यासीन के कान के पास लगाए हुए हैं ताकि वे बात कर सकें। सन् 2007 में हनीयेह ने बीबीसी के संवाददाता एलन जॉनसन को मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी जिन्हें गाजा में एक स्थानीय इस्लामिक संगठन ने अगवा कर 16 हफ्तों तक बंधक बनाकर रखा था। उन्होंने हमास की युद्ध लड़ने की ताकत को बढ़ाने के लिए भी काम किया था, जिसमें ईरान से उनके रिश्तों की भी कुछ भूमिका थी। सन् 2022 में हनीयेह ने अल जजीरा को बताया था कि हमास को सैन्य सहायता के रूप में ईरान से 7 करोड़ डालर मिले हैं।
2018 में अमरीका के विदेश मंत्रालय ने इस्माइल हनीयेह को यह कहते हुए आतंकवादी घोषित कर दिया कि वे ‘‘नागरिकों सहित अपने विरोधियों के साथ हिंसक संघर्ष करने के समर्थक है”। इजराइल के लिए तो वे उसके ओसामा बिन लादेन थे।
भले ही इजराइल ने आज एक बाजी जीत ली हो लेकिन इस हत्या से न केवल ईरान और उसका शक्तिशाली लेबनानी सहयोगी हिजबुल्लाह बदला लेने पर आमादा हो जाएंगे बल्कि गाजा में चल रहा युद्ध भी और भीषण रूप अख्तियार कर लेगा।
इस घटना के कुछ ही घंटों पहले इजराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर हमला किया, जो वह यदाकदा ही करता है। इजराइल ने दावा किया कि इस हमले में हिजबुल्लाह का एक शीर्ष कमांडर मारा गया। आरोप है कि पिछले हफ्ते के अंत में इजराइल के नियंत्रण वाले गोलान हाईट्स पर हुए हमले में उसका हाथ था जिसमें 12 बच्चे मारे गए थे। बुधवार को हिजबुल्लाह ने कहा कि वह अभी भी नष्ट कर दी गई इमारत के मलबे में उसके शीर्ष कमांडर फौद शुकुर के शव की तलाश कर रहा है।
पहले लेबनान और अब ईरान – इजराइल ने सभी को गुस्से से भर दिया है। 7 अक्टूबर को हुई उसके नागरिकों की हत्या का बदला लेने के लिए इजराइल ने पूरे पश्चिम एशिया को संकट में डाल दिया है। हमास के शीर्ष नेता की हत्या से युद्ध थमेगा नहीं, बल्कि इस बात की प्रबल संभावना है कि इससे एक नए युद्ध का आगाज होने का खतरा बहुत बढ़ जाएगा। (कॉपी: अमरीश हरदेनिया)