Thursday

03-04-2025 Vol 19

क्या दिल्ली को साफ हवा मिल सकेगी?

सारा खेल ‘परसेप्शन’ का है – धारणाओं का है। चाहे आपको भला लगे या बुरा, मगर हकीकत है कि चुनावों में जीत-हार में ‘परसेप्शन’ की बहुत बड़ी भूमिका रहती है। और उसका सरकार या पार्टी की नीतियों या कामकाज से कोई ख़ास ताल्लुक नहीं होता। दिल्ली के चुनाव नतीजों से फिर एक बार यही साबित हुआ है। जो लड़ाई बहुत कड़ी होनी थी, उसमें ‘परसेप्शन’ की चकाचौंध और कोलाहल के चलते एक ऐसी पार्टी का पलड़ा बहुत भारी हो गया।

दिल्ली का चुनावी मुकाबला कड़ा था और कौन जीतेगा, इसका सही-सही अनुमान लगाना बहुत मुश्किल था। समाज के सभी तबकों में ऐसे लोग थे जिनका मानना था कि केजरीवाल को शायद पहले जितना बहुमत न मिले लेकिन वे जीत जाएंगे। मुझे लगता है कि यह भविष्यवाणी करने वाले लोग उन वर्गों के थे जो धारणाओं पर भरोसा नहीं करते, या उन पर निर्भर  नहीं होते।

8 फरवरी को सुबह 9.45 तक यह साफ हो चुका था कि भाजपा 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने जा रही है। जैसे ही भाजपा की सीटों का आंकड़ा 40 पर पहुंचा, चरण चुम्बन में सिद्धहस्त एंकर उत्साहित होकर कूदने लगे और यूट्यूबर पत्रकार तनावग्रस्त और दुखी होकर विलाप करने लगे। 11 बजकर 11 मिनट तक यह पूरी तरह निश्चित हो गया कि दिल्ली ने बदलाव के लिए वोट दिया है। यह बदलाव 2015 के मसीहा केजरीवाल के खिलाफ और  2014 के मसीहा मोदी के पक्ष में है। आठ फरवरी 2025 को, अपनी जीत के ठीक दस साल बाद, आम आदमी हार गया। जिस आदमी ने 2015 के चुनाव में दिल्ली के कुलीनों – भाजपा और कांग्रेस – को धूल चटाई थी – उसे और उसके आसपास के नव-कुलीनों को हार का मुंह देखना पड़ा। बात यह है कि इन दस सालों में आम आदमी खास बन गया था और खास आदमी ने सफलतापूर्वक आम आदमी का रूप धर लिया था।

जब अखाड़े में कोई पहलवान गिरता है तो जोर की आवाज़ आती है। पंत मार्ग पर भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में मोदी-मोदी और जय श्रीराम के नारे गूंज रहे थे। केजरीवाल के पोस्टर पर चप्पल और जूते बरसाए जा रहे थे। एक समर्थक कह रहा था, “केजरीवाल इसी के लायक है”। चारों ओर भगवा झंडे लहराते रहे थे। भाजपा अपनी वापिसी का जश्न मना रही थी। एक भाजपाई के ख़ुशी का पार न था। “सब मोदी का जादू है,” उसने पार्टी की जीत का रहस्य खोला।

जैसे ही अरविंद केजरीवाल के प्रवेश वर्मा से हारने की खबर आई, उत्साह चरम सीमा पर पहुंच गया। प्रवेश वर्मा, 2025 के इस पहले चुनाव के स्मृति ईरानी बन गए हैं।  “पीएम बनने का ख्वाब देखने वाला एमएलए भी नहीं बन पाया”, किसी ने कहा।

क्या दिल्ली का नतीजा दिल्लीवालों की केजरवाल के प्रति खुन्नस का परिणाम है? क्या केजरवीला एंटी इंकबेंसी के शिकार हुए हैं? नतीजा इस ओर संकेत नहीं करता।

यह सही है कि इन दस सालों में केजरीवाल अपने वायदे पूरे करने में असफल रहे। जैसे-जैसे समय बीतता गया, सत्ता उनके हाथों में केन्द्रित होती गई, और उनका अहं बढ़ता गया। उनका अहंकार शिखर पर पहुंच गया और वे आम आदमी से खास आदमी बन गए।

चुनाव में केजरीवाल अपनी ही छवि से मुकाबिल थे – शीशमहल के सोने के टायलेट, वैगन-आर की जगह ग्लोस्टर, स्वाति मालीवाल, यमुना में जहर – केजरीवाल को उस नैरेटिव का मुकाबला करना पड़ा जिसे उनके खिलाफ काफी मजबूती से खड़ा कर दिया गया था।

आसमान में चमकते सूरज और वसंत की मधुर बयार के बीच मैंने भाजपा के मुख्यालय के बाहर जश्न देखा। मैंने पाया कि यह जीत 2015 की जीत की तरह दिल्ली की जीत नहीं मानी जा रही है। यह भाजपा की जीत है। कुछ केजरीवाल की हार को लेकर आहें भर रहे थे। “आंधी की तरह आया, तूफान की तरह गया”। कुछ डबल इंजन सरकार की उम्मीद में उत्साहित थे। वहीं कई लोगों में उदासीनता झलक रही थी। “कोई भी सरकार आए, हमको तो यही काम करना है,” एक आटो चालक ने कहा।

इस बीच दिल्ली के संपादक और राजनीति के पंडित इसे ‘बेहतर जीवनस्तर’ की जीत बतला रहे हैं। बाकी दिल्लीवालों की तरह मुझे भी इस जीत से न ख़ुशी हुई और न गम। मेरी इकलौती उम्मीद यह है कि दिल्ली को साफ हवा दुबारा हासिल हो सके। (कॉपी: अमरीश हरदेनिया)

श्रुति व्यास

संवाददाता/स्तंभकार/ संपादक नया इंडिया में संवाददता और स्तंभकार। प्रबंध संपादक- www.nayaindia.com राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग और कॉलम लेखन। स्कॉटलेंड की सेंट एंड्रियूज विश्वविधालय में इंटरनेशनल रिलेशन व मेनेजमेंट के अध्ययन के साथ बीबीसी, दिल्ली आदि में वर्क अनुभव ले पत्रकारिता और भारत की राजनीति की राजनीति में दिलचस्पी से समसामयिक विषयों पर लिखना शुरू किया। लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग, यूट्यूब तथा सोशल मीडिया के साथ अंग्रेजी वेबसाइट दिप्रिंट, रिडिफ आदि में लेखन योगदान। लिखने का पसंदीदा विषय लोकसभा-विधानसभा चुनावों को कवर करते हुए लोगों के मूड़, उनमें चरचे-चरखे और जमीनी हकीकत को समझना-बूझना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *