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03-04-2025 Vol 19

कांग्रेस की एक एक सीट भी छीननी

भारतीय जनता पार्टी इस बार लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहे मुताबिक 370 का लक्ष्य हासिल करने के लिए काम कर रही है। लेकिन इसके साथ साथ यह कोशिश भी है कि कैसे कांग्रेस की जीती हुई एक एक सीट भी उससे छीन ली जाए। भाजपा गंभीरता से इस बात के प्रयास कर रही है कि कांग्रेस को बिल्कुल खत्म कर दिया जाए।

याद करें प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के बजट सत्र में क्या कहा था? उन्होंने कांग्रेस के लिए कहा था कि अगली बार मतदाता दर्शक दीर्घा में बैठा देंगे। इसके बाद अभी पिछले दिनों एक राष्ट्रीय चैनल का चुनाव पूर्व सर्वेक्षण आया, जिसमें कहा गया कि कांग्रेस को 2024 के लोकसभा चुनाव में कुल मिला कर 37 सीटें मिलेंगी। सोचें, 2014 में कांग्रेस को 44 और 2019 में 52 सीटें मिली थीं। इस बार 37 सीटों का अनुमान जाहिर किया जाता है।

बहरहाल, पिछले चुनाव में कई राज्यों में कांग्रेस का खाता नहीं खुला था। कई राज्यों में कांग्रेस को एक एक सीट मिली थीं। बिहार, ओडिशा, झारखंड, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में कांग्रेस जैसे तैसे एक एक सीट जीतने में कामयाब रही थी। लेकिन इस बार भाजपा इन राज्यों में उसकी जीती एक एक सीट भी छीन लेने की राजनीति कर रही है।

सोचें, झारखंड में भाजपा को कांग्रेस की जीती हुई सिंहभूम सीट छीनने का कोई दूसरा तरीका नहीं सुझा तो उसने कांग्रेस सांसद गीता कोड़ा को ही अपनी पार्टी में शामिल करा लिया। मधु कोड़ा के ऊपर कई तरह के झूठे सच्चे आरोप लगाने के बाद अंत में भाजपा ने उनको अपनी पार्टी में लिया। अब कांग्रेस का प्रयास झारखंड में कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन का खाता नहीं खुलने देने का है।

बिहार में कांग्रेस और समूचे गठबंधन ने पिछली बार 40 में से सिर्फ एक सीट जीती थी। किशनगंज की सीट पर जैसे तैसे कांग्रेस के मोहम्मद जावेद 34 हजार वोट से जीते थे। भाजपा, जदयू और लोजपा गठबंधन ने क्लीन स्वीप किया था। उसे 39 सीटें मिली थीं। भाजपा और लोजपा ने अपनी सभी सीटें जीती थीं।

लेकिन 2020 में हुए लोकसभा चुनाव में राजद, कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन ने शानदार वापसी की। लोकसभा की एक सीट जीतने वाली कांग्रेस 19 सीटों पर जीती और जीरो सीट पर रही राजद ने 75 सीटें जीतीं। बाद में अगस्त 2022 में नीतीश कुमार भाजपा का साथ छोड़ कर राजद और कांग्रेस गठबंधन के साथ चले गए और भाजपा को हराने का संकल्प जताया।

उन्होंने विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने का प्रयास किया और गठबंधन बनवा भी दिया। तब भाजपा के नेता कहते रहे कि नीतीश के लिए पार्टी के खिड़की, दरवाजे सब बंद हैं। लेकिन जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आया। भाजपा ने खिड़की, दरवाजे सभी खोल दिए और अपने गठबंधन में लाकर नीतीश को फिर मुख्यमंत्री बना दिया।

सारे समझौते करके जदयू से तालमेल करने का एकमात्र मकसद यह है कि पिछली बार कांग्रेस जो एक सीट जीत गई थी वह छीन लेनी है। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन को एक भी सीट नहीं जीतने देने के उद्देश्य से भाजपा ने जनता दल यू के साथ साथ उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टी से भी तालमेल किया है और लोक जनशक्ति पार्टी के दोनों खेमों को भी साथ बनाए रखने के प्रयास में जुटी है।

ओडिशा की 21 लोकसभा सीटों में बीजू जनता दल ने 12 और भाजपा ने आठ सीट जीती थी। कांग्रेस को सिर्फ एक सीट मिली थी। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित नबरंगपुर की सीट पर कांग्रेस के प्रदीप कुमार मांझी चुनाव जीते थे। इस बार भाजपा ने अपने मिशन 370 और एनडीए के मिशन 400 के तहत बीजू जनता दल से तालमेल का दांव चला है। सोचें, 15 साल पहले दोनों पार्टियों के रास्ते अलग हो गए थे। 2009 के चुनाव के समय बीजू जनता दल ने भाजपा से तालमेल खत्म किया था।

जब 2014 में नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने भाजपा की कमान संभाली तब से दोनों का प्रयास बीजद की जगह भाजपा को स्थापित करना था। लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली तो वापस नवीन पटनायक से हाथ मिला लिया। कहा जा रहा है कि भाजपा लोकसभा में ज्यादा सीटें लड़ेगी और विधानसभा में बीजू जनता दल के लिए ज्यादा सीट छोड़ेगी। एक फॉर्मूले की चर्चा है, जिसके मुताबिक लोकसभा की 21 में से 14 सीटों पर भाजपा और सात पर बीजद लड़ेगी, जबकि विधानसभा की 147 में से एक सौ सीटों पर बीजद और 47 पर भाजपा लड़ेगी। पिछली बार बीजद को 112 सीटें मिली थीं।

इसी तरह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को एक सीट मिली थी। अमेठी से राहुल गांधी हार गए थे, जबकि रायबरेली से सोनिया गांधी जीती थीं। इस बार सोनिया गांधी लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगी। वे राज्यसभा में चली गईं है। और कहा जा रहा है कि उनकी सीट पर प्रियंका गांधी वाड्रा लड़ेंगी। इससे पहले ही भाजपा ने रायबरेली सीट कांग्रेस से छीनने का दांव चलना शुरू कर दिया है। उस पूरे इलाके में जीते विपक्षी विधायकों को तोड़ा जा रहा है।

ऊंचाहार के समाजवादी पार्टी के विधायक मनोज पांडेय को भाजपा ने हाल के राज्यसभा चुनाव के समय तोड़ दिया। उनकी विधानसभा रायबरेली लोकसभा सीट के तहत आती है। वहां से ब्राह्मण उम्मीदवार उतार कर भाजपा किसी तरह से रायबरेली सीट पर जीतने की कोशिश में जुटी है। सोचें, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सबसे बड़ी पार्टी के बारे में! उसका मकसद बिल्कुल धूल चाट रही विपक्षी पार्टी को और रसातल में पहुंचा देना है!

हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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