भोपाल। जब मोदी और शाह की बीजेपी ने मध्य प्रदेश में ऑल इस वेल नहीं इसलिए चुनावी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सामूहिक नेतृत्व की आड़ में फ्री फॉर ऑल कर दिया.. तब सीएम इन वेटिंग के लिए दावेदारों की लंबी हो चुकी फेयरिस्त में शामिल केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल पर सहमति का अभाव भले ही हो लेकिन उन्हें इग्नोर भी नहीं किया जा सकता.. जिसकी बड़ी वजह उनका ओबीसी वर्ग का होना और विधानसभा का चुनाव लड़ाया जाना .. जो शायद ही भाजपा के बहुमत मिलने पर किसी और के मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में उसकी कैबिनेट में शामिल होना चाहेंगे.. कई विवादों और पार्टी में अंदर बाहर होने के बावजूद अपनी बेबाकी और सफगोई के लिए पहचाने जाते..
जिनमें हाई कमान पहले भी संभावनाएं तलाश्ता रहा.. और योग्यता, उपयोगिता स्वीकार्यता साबित करने के कई मौके भी उन्हें दिए गए.. एक बार फिर दूसरे दावेदारों के बीच प्रहलाद को भी मैदान में उतार दिया है.. उन्होंने भोपाल की पत्रकार वार्ता में अपनी बात के साथ सवालों के जवाब से ज्यादा बहुत कुछ या यू कहे कि बड़ा संदेश बिना बोले ही अपनी मुस्कुराहट से दे दिया.. पार्टी लाइन पर टिके रहे विचलित तो कतई नहीं हुए पर उनकी चुप्पी जरूर कई सवाल छोड़ गई.. मुस्कुराहट प्रहलाद के चेहरे पर छुपाए नहीं छुप रही थी.. चेहरे की मुस्कान के साथ उनके आंखें सिर्फ सवाल पूछने वाले को पढ़ ही नहीं रही थी बल्कि बोल रही थी..गंभीर ..सतर्क सजग… विवादित सवालों से बचते हुए भी मुस्कुराहट में कई राज छिपे नजर आए.. हर पत्रकार को संतुष्ट करने की एक सफल कोशिश के बावजूद इस चेहरे की चमक उसकी भाव भंगिमाएं भी बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर रही थी.. जो चाहा वही बोला जो पूछा गया वह पूरे ध्यान से सुना..
जिस सवाल को नजरअंदाज करना उसे बखूबी किया भी.. यह कहना गलत नहीं होगा कि बीजेपी के नवनिर्मित मीडिया सेंटर में अल्प समय के लिए ही सही लेकिन पूरी तैयारी के साथ आए थे प्रहलाद पटेल.. उन्हें अच्छी तरह मालूम था कि पत्रकारों की जिज्ञासा कैसे सवालों पर होगी और उन्हें इससे कैसे बचना भी है.. पत्रकार वार्ता का अपना एजेंडा सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और अपनी ओर से कांग्रेस नेता अजय सिंह राहुल भैया के आरोपों पर स्पष्टीकरण.. यानी पार्टी हाई कमान की लाइन को आगे बढ़ाना और अपनी छवि की चिंता.. खासतौर से भ्रष्टाचार जब बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है.. लेकिन सीएम इन वेटिंग से जुड़े सवाल हो या फिर केंद्रीय मंत्री रहते विधायक और प्रदेश में मंत्री से आगे की महत्वाकांक्षा से जुड़ा सवाल प्रह्लाद ने आश्चर्यजनक मौन साध पार्टी हाई कमान को भरोसे में लिया..इस दौरान मुस्कुरा कर कई पत्रकारों को निरुत्तर तो अपने सहयोगी दिग्गजों जो चुनाव मैदान में एक साथ कूद चुके हैं उनको भी चुप्पी साध कर बड़ी राहत दी..
सियासी विवादों से दूर राहत और संदेश नरेंद्र तोमर, फग्गन सिंह कुलस्ते और दूसरे सांसदों के साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी जो सिर्फ विधायक बनने के लिए दिल्ली से मध्य प्रदेश नहीं लौट रहे उनको भी दे गए.. जो चुनाव सिर्फ विधायक के लिए नहीं बल्कि कहीं ना कहीं मुख्यमंत्री बनने के लिए लड़ रहे हैं.. कैलाश विजयवर्गीय के बयान हो या नरेंद्र तोमर की सधी प्रतिक्रिया और फिलहाल चुनाव प्रबंधन की कमान संभालने के बावजूद मीडिया से दूरी बना सीएम इन वेटिंग की बहस को लगातार एक नई दिशा दे रहे शायद प्रहलाद की नजर उन अपनों पर भी रही होगी.. पूर्व नेता प्रतिपक्ष पंडित गोपाल भार्गव ने भी सामूहिक नेतृत्व के इस चुनाव का हवाला देकर अपनी दावेदारी गुरु मार्गदर्शन पर ठोक दी है.. तो पहले से ही कैलाश और नरेंद्र के अलावा बड़ा आदिवासी चेहरा फग्गन सिंह हो या फिर मैदान छोड़ने को तैयार नहीं शिवराज सिंह के अलावा नई पीढ़ी का भविष्य माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया हो या फिर उनके साथ नई पीढ़ी का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा के दौड़ में शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता..शिवराज के अलावा ज्योति और विष्णु के चुनाव लड़ने पर अभी भी सस्पेंस..
इन सभी के सामने टिकिट फिर चुनौती पहले खुद की जीत और पार्टी हाई कमान का भरोसा वरदहस्त हासिल करना बना हुआ है..भाजपा हाई कमान ने मध्य प्रदेश के जिन दिग्गज नेताओं को दिल्ली से वापस मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने का बड़ा सियासी संदेश दिया उनमें केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं.. फिलहाल इकलोते जो अपनी विधानसभा क्षेत्र नरसिंहपुर के बाहर भी एक्टिव हो चुके हैं.. लोधी बहुल सीटों के अलावा भी प्रहलाद पटेल लोकार्पण कार्यक्रमों का हिस्सा रायसेन से लेकर मुंगावली तक बन चुके हैं.. प्रहलाद को उनके भाई विधायक जालम सिंह का टिकट काटकर चुनाव लड़ाया जा रहा.. इस पर भी प्रहलाद की प्रतिक्रिया और दावा गौर करने लायक था.. प्रदेश की राजनीति से लेकर केंद्र की राजनीति का खासा अनुभव रखने वाले प्रहलाद अपने उसूलों से कोई समझौता नहीं करते.. खास हो या फिर आम लोगों की महफिल प्रहलाद को अपनी छाप छोड़ने बखूबी आता है.. पार्टी में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों की कमी नहीं तो मतभेद रखने वाले भी खूब मिल जाएंगे.. केंद्र में कैबिनेट मंत्री हो या स्वतंत्र प्रभार या फिर राज्य मंत्री वे अपनी बदलती भूमिका को लेकर हमेशा चर्चा में बने रहे.. उनके ट्वीट चाहे फिर वह मध्य प्रदेश के भाजपा नए प्रदेश अध्यक्ष या फिर मोदी कैबिनेट के महिला आरक्षण से जुड़े फैसले पर उनकी पर्सनैलिटी के साथ कार्यशैली को भी समय समय रेखांकित करती रही है.. प्रह्लाद ने पिछले कई वर्षों में केंद्र की राजनीति तक खुद को सीमित रखते हुए अपनी लोकसभा के बाहर रोजमर्रा की प्रादेशिक राजनीति से ज्यादातर दूरी ही बनाई है..
अलबत्ता मुख्यमंत्री निवास पर चार यार शिवराज, नरेंद्र तोमर और कैलाश विजयवर्गीय के साथ प्रहलाद की चर्चित बैठक ने खूब सुर्खियां बटोरी थी.. प्रहलाद की गिनती हमेशा आक्रामक राजनेता के तौर पर होती रही.. चाहे फिर वह लोकसभा चुनाव में कमलनाथ के खिलाफ लड़ना हो.. उमा भारती के साथ जनशक्ति में शामिल हो जाना.. फिर वापसी के साथ नई राजनीतिक पारी खुद को एक दायरे तक सीमित रखकर की है.. पिछले दिनों उमा भारती ने प्रहलाद की तारीफ के लिए ट्वीट भी किया था.. जैसी उनकी हाइट वैसे ही बढ़ता सियासी कद.. जिन्हें मोदी मंत्रिमंडल में अलग-अलग विभाग देकर न सिर्फ मौका बल्कि दूरगामी रणनीति के तहत स्थापित भी किया गया.. फिलहाल भाजपा में मची उठा पटक के बीच जब शिवराज सिंह चौहान के चुनाव लड़ने पर फैसला सामने आना बाकी है और उमा भारती जन आशीर्वाद यात्रा से दूरी बनाने के बाद सीमित चुनाव प्रचार के संकेत दे रही है.. तब शिवराज और उमा भारती की तरह ओबीसी वर्ग के प्रहलाद पटेल की पूछ परख लगता यही कि पार्टी में बढ़ गई.. मुख्यमंत्री शिवराज से मुलाकात के बाद प्रहलाद की इस पत्रकार वार्ता की टाइमिंग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.. वह बात और है कि पत्रकार वार्ता में प्रह्लाद ने स्पष्ट कर दिया की ओबीसी वर्ग के कल्याण के लिए वह कटिबंध है लेकिन वो और उनके परिवार ने कोई फायदा कभी नहीं उठाया..
मुद्दा ओबीसी और महिला आरक्षण से जुड़े सवाल पर नारी सशक्तिकरण से जोड़ कर उन्होंने मोदी की लाइन को ही आगे बढ़ाया.. उन्होंने कहा भाजपा ने रेवड़ी नहीं बाटी बल्कि हर वर्ग का सामाजिक उत्थान किया है..केंद्र से जुड़े सात दिग्गज जिनमें तीन केंद्रीय मंत्री उनमें शामिल प्रहलाद पहले नेता जिन्होंने उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद प्रदेश भाजपा के मीडिया सेंटर में आकर पत्रकार वार्ता को संबोधित किया.. यह प्रदेश या केंद्रीय नेतृत्व के इशारे पर या खुद उनकी पहल पर आयोजित की गई इस पर पार्टी की अधिकृत टिप्पणी सामने नहीं आई.. बावजूद प्रहलाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस को चुनावी रणनीति का हिस्सा ही माना जाएगा.. जिसमें संदेश प्रदेश नेतृत्व दूसरे ओबीसी नेताओं और सीएम इन वेटिंग के दावेदारों के साथ विरोधियों के लिए भी छुपा देखा जा सकता.. न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद प्रहलाद भी बोले चुनावी राजनीति में सरकारी धन के दुरुपयोग की चर्चा पर विमर्श होना चाहिए ..,अगर न्यायपालिका इस संवाद को शुरू करती है तो आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था व उसकी प्रगति की गति और बेहतर होगी.. प्रह्लाद ने उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप का स्वागत किया और सार्थक बहस की आवश्यकता जताई.. पूर्व में हुए कथित कोयला घोटाले पर पूर्व केंद्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद पटेल ने मध्य प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के आरोप पर सवाल खड़े करते हुए दावा किया कि उनकी और उनके परिवार के ऊपर आर्थिक अनियमितता के कभी आरोप नहीं लगाए गए..
प्रदेश की राजनीति में जब भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा तब प्रह्लाद ने कहीं ना कहीं मिस्टर क्लीन की अपनी इमेज के लिए सोचने को उन्होंने मजबूर किया.. पारिवारिक और आपराधिक मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं ..ओबीसी पर राजनीति करने के लिए कांग्रेस को यह कहकर घेरा गया कि मध्य प्रदेश में भाजपा ने तीन ओबीसी मुख्यमंत्री लगातार दिए.. जबकि कांग्रेस इस विशेष समुदाय को प्रताड़ित कर राजनीति करती रही.. प्रहलाद पटेल की माने तो विधानसभा चुनाव में वह नामांकन दाखिल करने के बाद मतदाताओं के बीच एक या दो बार ही जाएंगे.. यानी खुद की जीत की गारंटी मान चुके प्रहलाद को अपने भाई और क्षेत्र के पूर्व विधायक जालम सिंह पटेल की रणनीति पर पूरा भरोसा है.. कांग्रेस को अपने लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं मानते.. फिर भी चुनाव बाद जीत के साथ प्रहलाद को चुनौती पार्टी के अंदर अपने दोस्तों जो साथ में विधानसभा का चुनाव लंबे अरसे बाद लड़ रहे उनसे मिलने से इनकार नहीं किया जा.. उमा, बाबूलाल गौर शिवराज की तरह पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले पटेल का पडला दूसरों की तुलना में ज्यादा वजनदार माना जा सकता है.. तेज तर्राट राजनेता की पहचान प्रखर वक्ता के साथ प्रहलाद की एक सख्त प्रशासक के तौर पर होती है.. मिशन मोदी 2024 लोकसभा चुनाव से पहले ओबीसी फैक्टर 2023 में बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है.. जब शिवराज सिंह चौहान ने मैदान नहीं छोड़ा है.. कैलाश के डायलॉग उन्हें श्यामला हिल्स की राह पर आगे बढ़ा रहे..
और चुनाव प्रबंधन के साथ पार्टी की रणनीति के प्रमुख कर्ताधर्ता नरेंद्र सिंह तोमर को अपने काम और हाई कमान के भरोसे के साथ किस्मत पर भरोसा.. तब देखना दिलचस्प होगा मिस्टर क्लीन एक और सीएम इन वेटिंग प्रहलाद पटेल के सधे हुए कदम उनकी अपनी राजनीति को कौन सी दिशा देते हैं.. क्या वो सियासत के लंबे सफर में अब निर्णायक मोड़ पर आकर खड़े हो गए हैं.. अनुभव के साथ योग्यता और ओबीसी वर्ग का होना उनकी ताकत तो परिस्थितियां जन्य कई कमजोरियां से भी इनकार नहीं किया जा सकता.. पटेल का चेहरा घोषित नहीं लेकिन उनके अपने इरादे उनकी अपनी मुस्कान के साथ कई राज हाई कमान की जमावट में छुपे देखे जा सकते हैं.. फिर भी सवाल प्रहलाद पटेल क्या आपने प्रतिस्पर्धियों की लाइन छोटी कर आगे बढ़ेंगे या फिर अपनी लाइन को आगे बढ़ा कर खुद को सत्ता का सिरमौर साबित करेंगे.. क्या गारंटी उनकी किस्मत और मेहनत रंग लाएगी.. कहीं बदलती बीजेपी में दूसरे राज्यों की तरह उनकी अपनी योग्यता ही रह में रोड़ा बन कमजोर कड़ी साबित तो नहीं होगी..