चाहे सैम पित्रोदा हों या चरणजीत सिंह चन्नी और विजय वडेट्टीवार हों, इनके बयानों से कांग्रेस की असलियत जाहिर होती है। कांग्रेस इन पर कभी कार्रवाई नहीं करती है। पार्टी के प्रवक्ता कह देते हैं कि यह उनका निजी बयान है। ये नेता भी बयान देने के बाद मुकर जाते हैं या माफी मांग लेते हैं। लेकिन देश की जनता समझदार है, वह इनके बयानों की असलियत समझ रही है। उसे पता है कि कांग्रेस हमेशा पाकिस्तान और आतंकवादियों के प्रति नरम रुख रखती है।
एस. सुनील
लोकसभा चुनाव के बीच कांग्रेस प्रवक्ताओं और नेताओं का एक नियमित काम अपने नेताओं के बयानों से पल्ला झाड़ने का हो गया है। हर दिन पार्टी का कोई न कोई नेता एक विषैला बयान देता है और फिर जब उस पर विवाद हो जाता है तो कांग्रेस उससे अपने को अलग कर लेती है। कह दिया जाता है कि यह अमुक नेता का अपना निजी बयान है। लेकिन क्या सचमुच ऐसा होता है? या इसके पीछे कोई सोची समझी रणनीति काम करती है? और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस क्या अपने नेताओं के बयानों से पल्ला झाड़ कर उनके पाप से मुक्त हो सकती है? ये सवाल इसलिए जरूरी हैं क्योंकि कांग्रेस नेताओं के बयान राजनीतिक नहीं हैं और न निजी हैं। ऐसा नहीं है कि वे चुनाव की गरमी में कोई बात अनजाने में कह दे रहे हैं या उनका हमला अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी भाजपा के ऊपर है। उनका निशाना देश के सैन्य बलों पर है। उनका निशाना देश के नागरिकों पर है। उनका निशाना देश की खूबसूरत विविधता पर है। उनका निशाना देश की एकता और अखंडता पर है। उनका निशाना देश पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों पर है।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि चुनाव की गरमी में नेता एक दूसरे पर हमला करते हैं। पार्टियां एक दूसरे को सच्चे झूठे आरोपों के जरिए निशाना बनाती हैं। लेकिन ऐसा नहीं हो सकता है कि चुनाव की गरमी में कोई देश के वीर जवानों की शहादत पर सवाल उठा दे या चमड़ी के रंग के आधार पर और लोगों के चेहरे मोहरे के आधार पर उनकी प्रोफाइलिंग करे और उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करे। इस तरह के बयान योजना के तहत दिए जाते हैं। इनका मकसद एक खास वर्ग का तुष्टिकरण करना होता है या देश में सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देना होता है।
तभी यह अनायास नहीं हुआ कि पंजाब के मुख्यमंत्री रहे चरणजीत सिंह चन्नी ने जम्मू कश्मीर के पुंछ में वायु सेना के काफिले पर हुए हमले को लेकर सवाल उठाया। उससे पहले महाराष्ट्र में कांग्रेस विधायक दल के नेता और राज्य की विधानसभा के नेता विपक्ष विजय वडेट्टीवार ने मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले में मारे गए शहीद हेमंत करकरे की शहादत पर सवाल उठाया। फिर कांग्रेस के शहजादे राहुल गांधी के मार्गदर्शक सैम पित्रोदा ने देश के लोगों की प्रोफाइलिंग शुरू कर दी। उन्होंने किसी को चाइनीज कहा तो किसी को अफ्रीकी कहा तो किसी को अरब लोगों जैसा बताया। क्या किसी भी सभ्य समाज में इस तरह की बातों की इजाजत दी जा
सकती है?
सैम पित्रोदा ने जो पाप किया है क्या उसके लिए कांग्रेस को माफ किया जा सकता है? अमेरिका में रहने वाले पित्रोदा हमेशा भारत की सामाजिक संरचना को बिगाड़ने वाले बयान देते रहे हैं। उन्होंने दिल्ली के सिख विरोधी दंगों के बारे में कह दिया था कि ‘जो हुआ सो हुआ’। उनके लिए हजारों लोगों का नरसंहार मामूली बात है। इसी तरह उन्होंने विरासत टैक्स की चर्चा शुरू कर दी थी। भारत में लोगों के लिए अपने पिता या दादा की विरासत संभालना सिर्फ रुपए पैसे का मामला नहीं होता है। वह उनके लिए भावनात्मक लगाव की बात होती है। लेकिन सैम चाहते हैं कि भारत के लोगों के बाप दादा की विरासत सरकार हड़प ले। अब उन्होंने भारत के लोगों को रंग, नस्ल और भौगोलिक इलाकों के आधार पर चीनी, अफ्रीकी और अरबी बताया है। उनके लिए पश्चिम के लोग अरबों जैसे हैं तो पूर्वी भारत के लोग चीनी लोगों जैसे और दक्षिण के लोग अफ्रीकी नागरिकों जैसे हैं। सोचें, यह कितनी खतरनाक सोच है।
भारत में प्राचीन काल से यह विविधता रही है और देश इसका उत्सव मनाता है। लेकिन देश की एकता और अखंडता को खंडित करने और सामाजिक व भौगोलिक विभाजन की मंशा रखने वाली कांग्रेस किसी न किसी आधार पर विभाजन करना चाहती है। पहले आर्थिक आधार पर उत्तर और दक्षिण का विभाजन कराने का प्रयास राहुल गांधी सहित कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं ने किया। जब उसमें कामयाबी नहीं मिली तो सामाजिक और नस्ली आधार पर विभाजन का दांव खेला गया है। कांग्रेस यह कह कर नहीं बच सकती है कि यह सैम पित्रोदा का निजी बयान है या उन्होंने इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस पाप के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है।
कांग्रेस की देश भर में मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति का एक विषय हमेशा जम्मू कश्मीर रहा है। पिछले दिनों पुंछ में भारतीय वायु सेना के काफिले पर आतंकवादियों ने घात लगा कर हमला किया, जिसमें वायु सेना का एक जवान शहीद हो गया, जबकि चार अन्य जवान घायल हुए। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा था और देश उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा था तभी पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे चरणजीत सिंह चन्नी ने सेना के काफिले पर हुए हमले को लेकर सवाल उठा दिया। चन्नी ने इस हमले को ‘पोलिटिकल स्टंट’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव आते हैं तो ऐसे स्टंट खेले जाते हैं और भाजपा को चुनाव जिताने का रास्ता तैयार किया जाता है। इतना ही नहीं वे यहां तक कह गए कि लोगों को मरवाने और उनकी लाशों पर खेलना भाजपा का काम है। हकीकत यह है कि वायु सेना के काफिले पर सुनियोजित हमला लश्कर ए तैयबा ने अबू हमजा के नेतृत्व में किया था।
सेना और अन्य सुरक्षा बलों के जवान जान की बाजी लगा कर जम्मू कश्मीर के जंगलों और पहाड़ों में हमलावरों की तलाश में अभियान चला रहे थे और दूसरी ओर कांग्रेस के नेता इसे स्टंट करार दे रहे थे। देश के लोगों को याद होगा कि किस तरह से 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले आतंकवादी हमले पर भी कांग्रेस के नेताओं ने इसी तरह के सवाल उठाए थे। उन्होंने बालाकोट और उरी में भारत की सैन्य कार्रवाई के सबूत मांगे थे और जनता ने उसका कैसा जवाब दिया था। चन्नी के बयान से पूरी कांग्रेस पार्टी की मानसिकता जाहिर होती है। वे राजनीतिक फायदे के लिए तुष्टिकरण की राजनीति की कोई भी हद पार कर सकते हैं। आतंकवादियों तक का समर्थन कर सकते हैं।
कांग्रेस के एक दूसरे नेता के बयान में यह बात और स्पष्ट रूप से जाहिर हुई। महाराष्ट्र कांग्रेस के दिग्गज नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने मुंबई पर हुए भीषण आतंकवादी हमले के आरोपी अजमल कसाब सहित तमाम आतंकवादियों का ही बचाव कर दिया। उन्होंने कह दिया कि आतंकवाद निरोधक दस्ते का नेतृत्व कर रहे हेमंत करकरे आतंकवादियों की गोली का शिकार नहीं हुए थे, बल्कि आरएसएस के करीबी एक पुलिसकर्मी ने उनको गोली मारी थी। वडेट्टीवार ने यह भी कहा कि उस समय के सरकारी वकील उज्ज्वल निकम को इस बात की जानकारी थी और उन्होंने इसे छिपाया इसलिए भाजपा ने उनको टिकट दिया है। यह तो पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों को वैधता देने वाली बात हो गई। यही बात तो पाकिस्तान कहता है कि कसाब या उसके यहां के लोगों ने भारतीय पुलिसकर्मियों को नहीं मारा और मुंबई हमले में उसका कोई हाथ नहीं है। विजय वडेट्टीवार के बयान से पाकिस्तान को मौका मिल गया। एक तो उन्होंने भारतीय सुरक्षा बलों की महान शहादत का अपमान किया और दूसरी ओर पाकिस्तान और आतंकवादियों के प्रति कांग्रेस के नरम रुख की पोल भी खोल दी।
तभी चरणजीत सिंह चन्नी या विजय वडेट्टीवार जैसे नेताओं के बयानों की यह कह कर अनदेखी नहीं की जा सकती है कि यह उनका निजी बयान है। हकीकत यह है कि कांग्रेस कभी भी ऐसे बयान देने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है। और इसका कारण यह है कि इस तरह के बयान मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति की सुविचारित योजना के तहत दिए जाते हैं। कांग्रेस हमेशा आतंकवादियों और पाकिस्तान के प्रति नरम रुख दिखाती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जब कहा कि कांग्रेस के शहजादे को प्रधानमंत्री बनाने के लिए पाकिस्तान उतावला हो रहा तो कई जानकारों ने कहा था कि भारत के चुनाव में पाकिस्तान को लाना ठीक नहीं है। लेकिन अब तो कांग्रेस के इतने बड़े नेता ने सीधे तौर पर मुंबई आतंकवादी हमले में शामिल पाकिस्तानी आतंकवादियों को क्लीन चिट दे दी तो क्या इससे प्रधानमंत्री के आरोप सही नहीं साबित होते हैं?
असल में कांग्रेस हमेशा दोमुंही राजनीति करती है। हाथी के दिखाने के दांत की तरह राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा निकालते हैं तो दूसरी ओर हाथी के असली खाने के दांत कांग्रेस के अन्य नेताओं के बयानों से जाहिर होते हैं। चाहे सैम पित्रोदा हों या चरणजीत सिंह चन्नी और विजय वडेट्टीवार हों, इनके बयानों से कांग्रेस की असलियत जाहिर होती है। कांग्रेस इन पर कभी कार्रवाई नहीं करती है। पार्टी के प्रवक्ता कह देते हैं कि यह उनका निजी बयान है। ये नेता भी बयान देने के बाद मुकर जाते हैं या माफी मांग लेते हैं। लेकिन देश की जनता समझदार है, वह इनके बयानों की असलियत समझ रही है। उसे पता है कि कांग्रेस हमेशा पाकिस्तान और आतंकवादियों के प्रति नरम रुख रखती है। वह हमेशा सामाजिक विभाजन की राजनीति करती है ताकि लोगों को आपस में लड़ा कर अपना हित पूरा किया जाए। वह भौगोलिक आधार पर देश के टुकड़े करना चाहती है, जिसके लिए हमेशा उत्तर दक्षिण का विवाद खड़ा किया जाता है। देश के लोगों को कांग्रेस के इस खतरनाक और जहरीले विचार को समझने की जरुरत है। (लेखक सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (गोले) के प्रतिनिधि हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)