Saturday

05-04-2025 Vol 19

अपरिवर्तनीय करण जौहर

लस्ट स्टोरीज़’ के पांच और ‘घोस्ट स्टोरीज़’ के चार साल बाद ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में करण जौहर निर्देशक की भूमिका में लौटे हैं, और उनमें कोई अंतर नहीं आया है। रणवीर सिंह, आलिय़ा भट्ट, धर्मेंद्र, जया बच्चन, शबाना आज़मी आदि को एक साथ लाकर भी वे अनेक हिट फिल्मों के अलग-अलग टुकड़ों को जोड़ देने भर से आगे नहीं बढ़ सके हैं। एक पंजाबी और एक बंगाली यानी एक खिलंदड़े और एक शांत-सौम्य परिवार के बीच तादात्म्य बैठाने के लिए रणवीर और आलिया को कई तरह की रूढ़ परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।

परदे से उलझती ज़िंदगी

कहने को इन दिनों फिल्मों में अच्छी कहानियों की पूछ बढ़ गई है। लगभग सभी फिल्मकार, और स्टार भी, कहते मिलेंगे कि उन्हें अच्छी स्क्रिप्ट की तलाश है। अच्छी स्क्रिप्ट से मतलब उन्हें कुछ नया चाहिए। लेकिन जिसे वे नया मानते हैं या जिसे नया कहा जा सकता है, उसका हश्र क्या हो रहा है? इसका पता हाल की तीन फिल्मों से चलता है। कुछ दिन पहले कार्तिक आर्यन और कियारा आडवानी की ‘सत्यप्रेम की कथा’ में शारीरिक संबंधों में महिला की सहमति की आवश्यकता का मुद्दा उठाया गया था, मगर खासे अगंभीर तरीके से। समीर विद्वंस के निर्देशन वाली इस फिल्म के निर्माता साजिद नाडियाडवाला थे। फिर ओटीटी पर रिलीज़ हुई ‘बवाल’ में एक दंपति की आपसी तनातनी के ख़ात्मे और रंगबाज़ी में उतराते एक अध्यापक को समय, रिश्तों और पेशे की अहमियत का अहसास कराने के लिए द्वितीय विश्वयुद्ध के उन स्थलों का सहारा लिया गया जो हिटलर के अत्याचारों के साक्षी थे। कहा जा सकता है कि यह इतिहास का जितना दर्दनाक अध्याय है उसे उतने ही उथले और अतार्किक नतीजों वाले प्रयोजन का हिस्सा बना लिया गया। इस फिल्म के भी निर्माता साजिद नाडियाडवाला हैं जबकि निर्देशन नितेश तिवारी का है।

वही नितेश तिवारी जो ‘दंगल’ जैसी एक बड़ी फिल्म हमें दे चुके हैं और अब रामायण पर एक ऐसी फिल्म की योजना बना रहे हैं जो तीन भागों में होगी। बहरहाल, ‘बवाल’ के बाद आई है ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ जिसमें महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता जैसे एक प्रगतिशील मुद्दे का घोर व्यावसायिक बल्कि छलावे जैसा प्रयोग किया गया है। फिल्म में इस विषय पर हीरोइन आलिया भट्ट काफी क्रांतिकारी बातें करती हैं, एक चौंकाता हुआ भाषण देती हैं, लेकिन फिल्म के अंत में वे यह भी कहती दिखती हैं कि जो कुछ मैंने किया और कहा वह सब गलत था। इसलिए यह समझना मुश्किल है कि आखिर हमारा बॉलीवुड कहानियों में नयेपन की मांग क्यों कर रहा है? क्या वह उसे किसी फॉर्मूले की तरह इस्तेमाल करना चाहता है?

करण जौहर का धर्मा प्रोडक्शन इन दिनों जिन फिल्मों के निर्माण में हिस्सेदार है, उनकी संख्या बहुत बड़ी है। उनमें कई बार छोटे बजट की अच्छी फिल्में भी होती हैं। लेकिन जब करण खुद निर्देशन संभालते हैं तो वह महंगी, कई स्टारों वाली, भव्य और तामझाम वाली फिल्म होती है। ‘लस्ट स्टोरीज़’ के पांच और ‘घोस्ट स्टोरीज़’ के चार साल बाद ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में करण जौहर निर्देशक की भूमिका में लौटे हैं, और उनमें कोई अंतर नहीं आया है। रणवीर सिंह, आलिय़ा भट्ट, धर्मेंद्र, जया बच्चन, शबाना आज़मी आदि को एक साथ लाकर भी वे अनेक हिट फिल्मों के अलग-अलग टुकड़ों को जोड़ देने भर से आगे नहीं बढ़ सके हैं। एक पंजाबी और एक बंगाली यानी एक खिलंदड़े और एक शांत-सौम्य परिवार के बीच तादात्म्य बैठाने के लिए रणवीर और आलिया को कई तरह की रूढ़ परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। शादी से पहले वे एक-दूसरे के परिवारों के साथ कुछ दिन बिताते हैं। इस चक्कर में कई विद्रूप और कई ऊबड़-खाबड़ मौके उनके सामने आते हैं, लेकिन अंत में सब ठीक हो जाता है। कुछ मसलों के सुलझने की रफ़्तार आपको चकित कर सकती है। चकित आप इस पर भी हो सकते हैं कि फिल्म में आपके अधिकतर अनुमान सही निकले कि अब क्या होगा।

संगीत, डांस और अति नाटकीयता की भरमार वाली यह फिल्म जया बच्चन को क्रूर दादी बना कर जाया करती है तो शबाना के लिए कुछ करने को ही नहीं था। धर्मेंद्र से इस उम्र में आप क्या उम्मीद कर सकते हैं? बस लोग उन्हें परदे पर देख कर खुश हो जाते हैं। अपने काम में आलिया सबसे आगे रही हैं। यह अलग बात है कि इस फिल्म का चलना रणवीर सिंह के लिए ज्यादा जरूरी है क्योंकि अक्षय कुमार की तरह उनकी भी लगातार कई फिल्में पिट चुकी हैं और उनकी अतिरिक्त गतिशीलता उनका यह डेस्परेशन जाहिर भी करती है। लेकिन यह फिल्म आपको इस सवाल से जूझता छोड़ जाती है कि क्या करण जौहर से हम यही चाहते हैं? अपने एक ऐसे शीर्ष फिल्मकार से जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिल्में बनाने, कितना भी खर्च बर्दाश्त कर सकने और कोई भी प्रयोग कर पाने की सामर्थ्य रखता है।

सुशील कुमार सिंह

वरिष्ठ पत्रकार। जनसत्ता, हिंदी इंडिया टूडे आदि के लंबे पत्रकारिता अनुभव के बाद फिलहाल एक साप्ताहित पत्रिका का संपादन और लेखन।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *