नई दिल्ली। एक तरफ राउज एवेन्यू का विशेष अदालत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चार दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया है तो दूसरी ओर हाई कोर्ट से उनको थोड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद से हटाने का आदेश देने की अपील की गई थी। अदालत ने कहा है कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत केजरीवाल को गिरफ्तार होने के आधार पर मुख्यमंत्री पद से हटाया जा सके।
दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस मनमोहन ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि ये कार्यपालिका का मसला है। उन्होंने कहा- इस याचिका पर हमें सुनवाई नहीं करना चाहिए। कार्यपालिका को ये मामला देखना चाहिए। इसमें न्यायपालिका के दखल की कोई गुंजाइश नहीं है। असल में सुरजीत सिंह यादव ने जनहित याचिका दाखिल की थी। इसमें कहा था कि जेल से भी केजरीवाल मुख्यमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं। इससे न्यायालय में चल रहा मामला प्रभावित होगा। इससे दिल्ली की संवैधानिक मशीनरी भी तबाह हो जाएगी।
इस याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि जो वे कह रहे हैं, उसके लिए कोई कानून या नियम है तो वह बताएं। अदालत ने पूछा- क्या ऐसा कोई प्रतिबंध है, जो आप हमें बता सकें। ऐसी कोई भी चीज कि केजरीवाल मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रह सकते हैं? अदालत ने आगे कहा कि इस मामले में अगर कोई संवैधानिक विफलता होती है तो राष्ट्रपति या फिर उप राज्यपाल इस पर कदम उठाएंगे। अदालत ने गुरुवार को कहा- हमने आज का अखबार पढ़ा। एलजी इस मामले को देख रहे हैं। इसके बाद यह मामला राष्ट्रपति के पास जाएगा। हम मानते हैं कि कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हो सकती हैं। हम इस पर कोई आदेश क्यों जारी करें? हमें राष्ट्रपति या एलजी को कोई निर्देश देने की जरूरत नहीं है।