नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी के अधिवेशन में राम राज्य का प्रस्ताव मंजूर किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘अयोध्या में राममंदिर का निर्माण एक हजार वर्ष तक के लिए भारत में राम राज्य की स्थापना का प्रारंभ’ है। भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन रविवार को स्वीकार किए गए प्रस्ताव में राममंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का संदर्भ देते हुए कहा गया है कि 22 जनवरी का दिन ‘करोड़ों राम भक्तों के लिए आकांक्षाओं और उपलब्धियों’ का दिन था। भाजपा के प्रस्ताव में इसे ‘भारत की आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण’ का दिन कहा गया है।
नई दिल्ली में प्रगति मैदान के भारत मंडपम में हुए भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन राममंदिर को लेकर जो प्रस्ताव पास किया गया उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद दिया गया। इसमें कहा गया कि राममंदिर ‘राष्ट्रीय चेतना’ का मंदिर बन गया है, जो विकसित भारत के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएगा। इसमें प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करते हुए कहा गया है कि उनके नेतृत्व में भारत राम राज्य की भावना के अनुकूल सबको साथ लेकर समावेशी विकास के लक्ष्य को पूरा कर रहा है। इसमें कहा गया है- भगवान राम, माता सीता और रामायण भारतीय सभ्यता और संस्कृति के हर स्वरूप में शामिल हैं।
‘रशिया विदाउट नवेलनी’
भाजपा के प्रस्ताव में कहा गया है- महात्मा गांधी के दिल में भी राम राज्य था, जो कहते थे कि आदर्श लोकतंत्र का मतलब ही राम राज्य है। प्रस्ताव में कहा गया है- अयोध्या की प्राचीन पवित्र नगरी में श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण देश के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली उपलब्धि है। यह अधिवेशन प्रधानमंत्री के नेतृत्व को दिल से बधाई देता है। इसमें कहा गया है- हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों और सभी के लिए न्याय के लिए समर्पित हमारा संविधान रामराज्य के आदर्शों से प्रेरित है।
प्रस्ताव में संविधान निर्माताओं की सोच का जिक्र करते हुए कहा गया है- भारत के संविधान की मूल प्रति में भी मौलिक अधिकारों के खंड पर जो तस्वीर है वह जीत के बाद अयोध्या लौटे भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की है, जो इस बात का प्रमाण है कि भगवान श्रीराम मौलिक अधिकारों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। प्रस्ताव में कहा गया है- रामराज्य का विचार महात्मा गांधी के हृदय में भी था जो कहा करते थे कि यही सच्चे लोकतंत्र का विचार है।