तेल अवीव। गाजा सिटी के अल अहली अल अरब अस्पताल पर हुए रॉकेट हमले के बाद पूरे अरब जगत में जबरदस्त गुस्सा है। कई देशों में इजराइल के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए। इस हमले में पांच सौ लोग मारे गए हैं। हालांकि इजराइल इससे इनकार कर रहा है उसने हमला किया लेकिन अरब जगत के देश इस पर यकीन नहीं कर रहे हैं। इस हमले के बाद लेबनान, जॉर्डन, लीबिया, यमन, ट्यूनीशिया, तुर्की, मोरक्को, अल्जीरिया, ईरान और इजराइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए और रैलियां निकाली। संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने भी इस हमले के लिए इजराइल को जिम्मेदार ठहराया है।
पूरे अरब जगत में गुरुवार को डे ऑफ रेज यानी आक्रोश दिवस की अपील की गई है। इजराइल के साथ अच्छे संबंध रखने वाले मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने इस बमबारी की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इसे जान-बूझकर की गई बमबारी बताया है और इसको अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। सऊदी अरब ने इजराइल के साथ संभावित संबंधों पर बातचीत खत्म कर दी है और अब इस हमले पर उसने कहा है कि ये विस्फोट इजराइली फोर्स की ओर से किया गया जघन्य अपराध है।
जॉर्डन ने भी इस हमले के लिए इजराइल को जिम्मेदार बताया है। हमास की मदद करने वाले कतर ने इस हमले को क्रूर नरसंहार करार दिया है। ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉन्फ्रेंस ने भी इजराइल पर आरोप लगाते हुए इसे वॉर क्राइम, मानवता के खिलाफ अपराध और संगठित राज्य आतंकवाद कहा है। लेबनान के ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने इस हमले के विरोध में आक्रोश दिवस मनाने की अपील की, जबकि इराक ने हमले के लिए इजराइली अधिकारियों को दोषी ठहराया। इराक ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इजराइल के गाजा हमले को रोकने के लिए तत्काल समाधान की मांग की।