नई दिल्ली। केंद्र सरकार गुरुवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार है। विपक्षी पार्टियां मणिपुर में तीन मई से चल रही हिंसा को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर रही हैं और चाहती हैं कि इस मसले पर संसद में चर्चा हो। मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले बुधवार को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें सरकार ने विपक्षी पार्टियों की यह मांग स्वीकार कर ली और कहा कि वह मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार है। सरकार ने दोनों सदनों के सुचारू संचालन के लिए विपक्ष का सहयोग मांगा।
गौरतलब है कि विपक्षी पार्टियां मणिपुर के अलावा कई और मुद्दे उठाने की तैयारी में है। दिल्ली सरकार को लेकर जारी केंद्र के अध्यादेश का मामला उठेगा तो साथ ही महंगाई और अडानी समूह का मुद्दा भी विपक्ष की ओर से उठाया जाएगा। बहरहाल, बुधवार की सर्वदलीय बैठक में संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि सरकार संसद में सभी मामलों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। इसमें मणिपुर में दो महीने से चल रही जातीय हिंसा भी शामिल है। गौरतलब है कि मणिपुर में कुकी और मैती समुदायों के बीच तीन मई से शुरू हुई जातीय हिंसा में अब तक कम से कम डेढ़ सौ से अधिक लोग मारे गए हैं।
बहरहाल, बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस ने मंहगाई और मणिपुर हिंसा सहित कई मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग रखी। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने कहा कि मणिपुर हिंसा और महंगाई जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष कोई समझौता नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की प्राथमिक जिम्मेदारी सरकार की है। रमेश ने आम आदमी पार्टी के साथ पूरा समर्थन दिखाते हुए कहा कि कांग्रेस दिल्ली से संबंधित केंद्र के अध्यादेश के स्थान पर लाए जाने वाले विधेयक का विरोध करेगी, क्योंकि यह एक चुनी हुई सरकार के संवैधानिक अधिकारों पर अंकुश लगाने वाला है।
जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस संसद चलाने के लिए रचनात्मक सहयोग करने के लिए तैयार है, लेकिन केंद्र सरकार को ‘माई वे या हाईवे’ वाला रवैया छोड़ना होगा। रमेश ने कहा कि मानसून सत्र में मणिपुर के मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब और गृह मंत्री अमित शाह की जवाबदेही तय करने की मांग भी की जाएगी। इस बीच हिंसाग्रस्त मणिपुर में अब भी शांति बहाल नहीं हुई है।