नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों को लेकर चल रहे विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। अब तक मछुआरों को गिरफ्तार करती रही श्रीलंका की नौसेने ने मंगलवार की सुबह भारतीय मछुआरों पर फायरिंग कर दी। श्रीलंकाई नौसेना की फायरिंग में पांच मछुआरे घायल हो गए। ये सभी डेल्फ्ट द्वीप के पास मछली पकड़ने गए थे। यह द्वीप श्रीलंका के अधिकार में है। गोली चलाने के बाद श्रीलंका की नौसेना इन मछुआरों को ले गई। श्रीलंका के जाफना टीचिंग अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।
भारत ने इस घटना को बहुत गंभीरता से लिया है। विदेश मंत्रालय ने फायरिंग को गंभीर मानते हुए श्रीलंका के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब किया और घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। बाद में विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ऐसी घटनाएं बरदाश्त नहीं की जाएंगी। उधर श्रीलंका के जाफना में भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों ने घायल मछुआरों से अस्पताल में मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। उन्होंने मछुआरों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता पहुंचाई है।
भारतीय उच्चायोग ने कोलंबो में भी श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के सामने इस मामले को उठाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार ने हमेशा मछुआरों से जुड़े मुद्दों को मानवीय तरीके से निपटाने पर जोर दिया है। इसमें आजीविका से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखा गया है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि किसी भी हालत में बल प्रयोग बरदाश्त नहीं किए जाएंगे। इस संबंध में दोनों सरकारों के बीच मौजूदा सहमति का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
असल में मछुआरों का मुद्दा दोनों देशों के लिए विवाद का विषय बना हुआ है। भारतीय मछुआरे कई बार अनजाने में भारतीय समुद्री सीमा से निकल कर श्रीलंका की समुद्री सीमा में चले जाते हैं। ऐसे होने पर श्रीलंका की नौसेना उन्हें गिरफ्तार कर लेती है। पहली बार है, जो उनके ऊपर फायरिंग की गई। भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2024 में श्रीलंका ने रिकॉर्ड संख्या में 535 भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया गया, जो 2023 की तुलना में लगभग दोगुना है। काफी मछुआरे अब भी श्रीलंका की कैद में हैं और सैकड़ों के संख्या में उनके ट्रॉलर्स यानी नौकाएं भी जब्त हैं।