Friday

28-02-2025 Vol 19

दक्षिणी गोलार्द्ध के देश विकास की आवाज बनें

नई दिल्ली। पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्द्ध (Southern hemisphere) के 120 से अधिक देशों का पहला शिखर सम्मेलन गुरुवार को शुरू हुआ जिसकी मेज़बानी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  (Narendra Modi) ने उनका आह्वान किया कि वे अपने विकास के मुद्दों पर एक आवाज़ बनें तभी वैश्विक एजेंडा एवं व्यवस्था में उनके हितों को जगह मिल पाएगी।

मानव केंद्रित विकास के लिए प्रथम वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट (First Voice of Global South Summit) के वर्चुअल आयोजन में श्री मोदी ने 10 देशों के शिखर नेताओं के साथ आरंभिक सत्र में शिरकत की। इस सम्मेलन में उद्घाटन सत्र के बाद कुल आठ सत्र होंगे। प्रधानमंत्री ने सत्र की शुरुआत करते हुए कहा कि विश्व को पुनः ऊर्जा प्रदान करने के लिए हमें एकजुटता से ‘रिस्पॉन्ड, रिकॉग्नाइज़, रिस्पेक्ट एवं रिफार्म’ के वैश्विक एजेंडा बनाने की आवाज़ उठानी चाहिए।

श्री मोदी ने सत्र में समापन टिप्पणी में कहा कि वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व की आवाज से स्पष्ट हो गया है कि मानव केन्द्रित विकास विकासशील देशों की एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। इसने हमारी समान चुनौतियों को भी रेखांकित किया है, जिनमें हमारी विकास जरूरतों के लिए संसाधनों की कमी, प्राकृतिक जलवायु और भूराजनीतिक परिदृश्य में बढ़ती अस्थिरता शामिल हैं। इसके बावजूद विकासशील देश सकारात्मक ऊर्जा एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, 20 वीं शताब्दी में विकसित देशों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया। आज अधिकतर विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाएं मंद पड़ रही हैं। ऐसे समय में यदि हम एकजुटता से काम करें तो हम वैश्विक एजेंडा तय कर सकते हैं। हमारा प्रयास होना चाहिए कि वैश्विक दक्षिण के लिए कार्य बिन्दु योजना तैयार हो और हमारी एक सशक्त आवाज हो ताकि हम सब मिलकर बाहरी परिस्थितियों एवं अंतरराष्ट्रीय तंत्रों पर निर्भरता के दुष्चक्रों से बाहर निकल सकें।

इसे भी पढ़ेः भारत के ‘राष्ट्रदूत’ हैं प्रवासी भारतीय: मोदी

इससे पहले सत्र की प्रारंभिक टिप्पणी में श्री मोदी ने कहा कि हमने एक कठिन वर्ष को देखा जिसमें युद्ध, टकराव, आतंकवाद एवं भूराजनीतिक तनाव व्याप्त रहा। भोज्य पदार्थों, उर्वरकों एवं ईंधन के मूल्यों में वृद्धि हुई। जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाएं आयीं तथा कोविड महामारी का दीर्घकालिक आर्थिक प्रभाव पड़ा। इससे स्पष्ट है कि विश्व संकट में है और यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि यह अस्थिरता कब तक चलेगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण के देशों का भविष्य सबसे ज्यादा दांव पर लगा है क्योंकि दुनिया की तीन चौथाई आबादी हमारे देशों में रहती है। इसलिए हमारी आवाज भी बराबरी से सुनी जानी चाहिए।

चूंकि आठ दशक पुराने वैश्विक शासन का मॉडल बदल रहा है तो हमें एक नयी व्यवस्था को आकार देने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकतर वैश्विक चुनौतियां दक्षिणी देशों ने नहीं पैदा की हैं, लेकिन उनका प्रभाव हम पर पड़ रहा है। हमने कोविड महामारी, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और यूक्रेन युद्ध के असर को झेला है। इन चुनौतियों के समाधान की खोज में ना तो हमारी कोई भूमिका है और न ही हमारी आवाज को कोई स्थान मिला है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा वैश्विक दक्षिण के हमारे बंधुओं के साथ अपने विकास के अनुभवों को साझा किया है। हमारी विकास साझीदारी सभी भूभागों और विभिन्न क्षेत्रों में होगी। हमने 100 से अधिक देशों को महामारी के दौरान दवाएं एवं टीकों की आपूर्ति की। भारत हमारा साझा भविष्य तय करने के लिए विकासशील देशों की ज्यादा बड़ी भूमिका की खातिर हमेशा खड़ा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल भारत जी 20 की अध्यक्षता कर रहा है। इस लिए यह स्वाभाविक है कि हमारा उद्देश्य वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को सशक्त बनाना है। जी 20 में हमारी थीम एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य है। उन्होंने कहा कि हम मानव केन्द्रित विकास में एकरूपता के मार्ग का अनुसरण करते हैं। हमें एकजुटता से वैश्विक राजनीतिक एवं वित्तीय शासन को रूपांतरित करने की कोशिश करनी चाहिए। इससे असमानता खत्म होगी, अवसर बढ़ेंगे तथा विकास को रफ्तार मिलेगी। प्रगति एवं समृद्धि बढ़ेगी। (वार्ता)

NI Desk

Under the visionary leadership of Harishankar Vyas, Shruti Vyas, and Ajit Dwivedi, the Nayaindia desk brings together a dynamic team dedicated to reporting on social and political issues worldwide.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *