नई दिल्ली। अडानी और हिंडनबर्ग मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने बताया कि उसकी बताया कि इस मामले की जांच के लिए बनाई गई जस्टिस सप्रे की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। शुक्रवार की सुनवाई में शेयर बाजार की नियामक एजेंसी सेबी ने अपनी जांच के लिए छह महीने का और समय देने की मांग की। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि छह महीने का समय सही नहीं है। 15 मई को इस मामले की अगली सुनवाई होगी।
इस मामले में अदालत ने छह सदस्यों की एक कमेटी भी बनाई थी और दो महीने के भीतर रिपोर्ट देने को कहा था। आठ मई को कमेटी ने बंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट सौंप दी। चीफ जस्टिस ने शुक्रवार को कहा- जस्टिस सप्रे की कमेटी की रिपोर्ट आ गई है। हम वीकेंड के दौरान ये रिपोर्ट देखेंगे। गौरतलब है कि अडानी-हिंडनबर्ग विवाद मामले में चार जनहित याचिकाएं दायर हुई थीं। एडवोकेट एमएल शर्मा, विशाल तिवारी, कांग्रेस नेता जया ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश कुमार ने ये याचिकाएं दायर की थीं।
बहरहाल, शुक्रवार की सुनवाई में चीफ जस्टिस ने सेबी से कहा कि वह छह महीने का समय नहीं दे सकती। अदालत ने कहा- काम में थोड़ी तेजी लाने की जरूरत है। हम अगस्त के मध्य में मामले को सूचीबद्ध कर सकते हैं। आप तीन महीने में अपनी जांच पूरी करें और हमारे पास वापस आएं। इसके बाद बेंच ने कहा कि वह 15 मई को टाइम एक्सटेंशन के लिए सेबी के आवेदन पर अपना आदेश सुनाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने जो कमेटी बनाई है, उसके प्रमुख रिटायर जज जस्टिस एएम सप्रे हैं। उनके साथ इस कमेटी में जस्टिस जेपी देवधर, ओपी भट, एमवी कामथ, नंदन नीलेकणि और सोमशेखर सुंदरेसन शामिल हैं। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने कमेटी बनाने का यह आदेश दो मार्च को दिया था।