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06-04-2025 Vol 19

चारधाम यात्रा का आगाज 30 अप्रैल से, रीलमेकर्स की नो एंट्री और VIP दर्शन बैन….

uttrakhand chardham yatra 2025 : हिमालय तु केदारम……पार्वती पतये हर हर महादेव।

अब बस कुछ दिन और फिर महादेव के जयकारे से बाबा केदारनाथ सहित चारधाम यात्रा का आगाज हो जाएगा। बाबा के भक्त बड़ी ही बेसब्री से इस दिन का इंतजार कर रहे है। चारधाम यात्रा के पंजीकरण भी शुरू हो गए है।

उत्तराखंड प्रशासन ने भी चारधाम यात्रा की तैयारिया पुरी कर लही है। यात्रियों को किसी भी प्रकार की कोई दुविधा ना हो इसके लिए सब तैयारी कर ली गई है। पिछली बार की तरह इस बार भी प्रशासन और स्थानीय पंडा समाज ने कुछ सख्त नियम बनाए है। (uttrakhand chardham yatra 2025) 

उत्तराखंड में 30 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा को लेकर इस बार प्रशासन और स्थानीय पंडा समाज ने सख्त नियम लागू करने की तैयारी कर ली है। खासतौर पर वीडियो रील बनाने वालों और यूट्यूबर्स के लिए इस बार मंदिर परिसर में प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

केदारनाथ-बद्रीनाथ पंडा समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार यदि कोई व्यक्ति मंदिर परिसर में वीडियो बनाने का प्रयास करता है, तो उसे दर्शन किए बिना लौटा दिया जाएगा। इस निर्णय की जानकारी प्रशासन को भी दे दी गई है, ताकि नियमों का सख्ती से पालन हो सके।

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रील मेकर्स और यूट्यूबर्स पर प्रतिबंध का कारण (uttrakhand chardham yatra 2025) 

केदारनाथ सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने बताया कि पिछले वर्ष सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने वालों के कारण धाम में काफी अव्यवस्था फैल गई थी। समुद्र तल से 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र केदारनाथ धाम में ढोल-नगाड़ों की तेज ध्वनि केवल रील बनाने के लिए बजाई जा रही थी।

इस शोरगुल का असर पूरे शिवालिक पर्वतमाला में महसूस किया गया और लगभग 10 से 12 दिनों तक यह कोलाहल यात्रा क्षेत्र में गूंजता रहा। इस तरह के माहौल से न केवल आध्यात्मिक शांति भंग हुई बल्कि वहां की प्रकृति को भी नुकसान पहुंचा। (uttrakhand chardham yatra 2025)

इसी कारण इस बार यात्रा के दौरान मंदिर परिसर में कैमरा ऑन करने की अनुमति नहीं होगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि धार्मिक स्थल की पवित्रता और शांति बनी रहे। प्रशासन और पंडा समाज इस प्रतिबंध को पूरी सख्ती से लागू करने के लिए तैयार है।

VIP दर्शन की व्यवस्था भी होगी बंद

इस साल चारधाम यात्रा में पैसे देकर VIP दर्शन करवाने की सुविधा को भी पूरी तरह बंद कर दिया गया है। बद्रीनाथ धाम के पंडा पंचायत के कोषाध्यक्ष अशोक टोडरिया ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पैसे देकर विशेष दर्शन की सुविधा भगवान की मर्यादा के खिलाफ है।

तीर्थयात्रा के दौरान सभी श्रद्धालुओं को समान रूप से दर्शन का अवसर मिलेगा और किसी को भी विशेषाधिकार नहीं दिया जाएगा। यह निर्णय यात्रा की पवित्रता बनाए रखने के लिए लिया गया है। (uttrakhand chardham yatra 2025)

चारधाम यात्रा का शुभारंभ और प्रमुख तिथियां

चारधाम यात्रा 30 अप्रैल (अक्षय तृतीया) से शुरू होगी, जब सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।

इसके बाद 2 मई को केदारनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे और अंत में 4 मई को विधि-विधान से भगवान बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही चारधाम यात्रा कापूर्ण रूप से श्रीगणेश हो जाएगा।  (uttrakhand chardham yatra 2025)

इस बार प्रशासन और पंडा समाज की सख्ती के कारण यात्रा अधिक अनुशासित और शांतिपूर्ण होने की उम्मीद है। भक्तों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा के दौरान नियमों का पालन करें और चारधाम की पवित्रता को बनाए रखने में सहयोग करें।

चारधाम यात्रा के दौरान विशेष प्रबंध

उत्तराखंड में इस वर्ष चारधाम यात्रा को और अधिक सुरक्षित व सुविधाजनक बनाने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। खराब मौसम और आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर रोकने के लिए 10 स्थानों पर होल्डिंग क्षेत्र बनाए जा रहे हैं।

यह होल्डिंग स्थल हरिद्वार, ऋषिकेश, ब्यासी, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, सोनप्रयाग, हरबटपुर, विकासनगर, बड़कोट और भटवाड़ी में स्थित होंगे। (uttrakhand chardham yatra 2025)

इन स्थानों पर यात्रियों के लिए पानी, शौचालय, बिस्तर, दवाइयां, और आपातकालीन भोजन की व्यवस्था होगी, जिससे उनकी यात्रा आरामदायक और सुरक्षित बनी रहे। पूरे यात्रा मार्ग को 10-10 किलोमीटर के सेक्टरों में विभाजित किया गया है, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रत्येक सेक्टर में 6 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जो बाइक पर गश्त करेंगे और किसी भी प्रकार की परेशानी में यात्रियों को तुरंत सहायता प्रदान करेंगे। यह व्यवस्था यात्रा मार्ग में सुगमता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए की गई है।

9 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कराया रजिस्ट्रेशन (uttrakhand chardham yatra 2025) 

चारधाम यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था देखते हुए इस बार यात्रा शुरू होने से पहले ही 9 लाख से अधिक लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। सबसे अधिक केदारनाथ धाम के लिए 2.75 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है। (uttrakhand chardham yatra 2025)

इसके अलावा बद्रीनाथ के लिए 2.24 लाख, यमुनोत्री के लिए 1.34 लाख, गंगोत्री के लिए 1.38 लाख और हेमकुंड साहिब के लिए 8 हजार श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे यात्रा की महत्ता और लोकप्रियता स्पष्ट होती है।

ऑफलाइन और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विकास परिषद ने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल बनाया है। अब वेबसाइट, मोबाइल नंबर, वॉट्सएप और टोल-फ्री नंबर के माध्यम से भी रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। (uttrakhand chardham yatra 2025)

यात्रा शुरू होने के बाद हरिद्वार और ऋषिकेश में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे श्रद्धालु भी यात्रा कर सकें जो ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने में असमर्थ हैं।

दर्शन के लिए टोकन व्यवस्था लागू

यात्रा के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन का अनुभव प्रदान करने के लिए चारों धामों में टोकन व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे यात्रियों को अपने दर्शन के समय की पूर्व जानकारी रहेगी और भीड़-भाड़ से बचा जा सकेगा।

उत्तराखंड सरकार और प्रशासन द्वारा की गई इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित, सुविधाजनक और दिव्य आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है। (uttrakhand chardham yatra 2025)

चारों धाम से जुड़ी खास बातें

बद्रीनाथ धाम

बद्रीनाथ धाम भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक अत्यंत पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थस्थल है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। यह धाम हिमालय की गोद में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। साथ ही, यह हिमालय क्षेत्र के चार प्रमुख धामों (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) में भी शामिल है।

बद्रीनाथ धाम नर-नारायण पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित है। यह क्षेत्र चारों ओर से ऊंचे-ऊंचे बर्फीले पहाड़ों और हरे-भरे प्राकृतिक परिदृश्यों से घिरा हुआ है। (uttrakhand chardham yatra 2025)

इस क्षेत्र को “बदरीवन” भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है “जुजुबे (बदरी) का वन”। कहा जाता है कि प्राचीन काल में यहां बदरी के वृक्ष अधिक मात्रा में हुआ करते थे, जिनके फल भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी के साथ तपस्या करते हुए ग्रहण किए थे।

इस मंदिर में भगवान विष्णु “बद्रीनारायण” के रूप में विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु ने इस स्थान पर कठोर तपस्या की थी, और माता लक्ष्मी ने उन्हें ठंडी हवाओं से बचाने के लिए बदरी वृक्ष का रूप धारण किया था।

भगवान विष्णु की तपस्या से यह स्थान अत्यधिक पावन हो गया और कालांतर में एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध हुआ। ऐसी मान्यता है कि बद्रीनाथ धाम की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में की थी। (uttrakhand chardham yatra 2025)

आदि शंकराचार्य ने अलकनंदा नदी से विष्णु जी की मूर्ति प्राप्त कर इस स्थान पर स्थापित की थी। मंदिर के अंदर भगवान विष्णु की शालिग्राम पत्थर से बनी मूर्ति स्थित है, जो ध्यान मुद्रा में विराजमान है।

बद्रीनाथ मंदिर में पूजा का कार्य केरल के नंबूदिरी ब्राह्मणों द्वारा किया जाता है। यहां के मुख्य पुजारी को “रावल” कहा जाता है, जो आदि गुरु शंकराचार्य के परंपरागत परिवार से ही होते हैं। (uttrakhand chardham yatra 2025)

केदारनाथ धाम

प्राचीन समय में बदरीवन में विष्णु जी के अवतार नर-नारायण ने यहां पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा की थी। नर-नारायण की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी प्रकट हुए। शिव जी ने नर-नारायण से वर मांगने को कहा तो उन्होंने वर मांगा कि आप हमेशा इसी क्षेत्र में वास करें।

शिव जी ने वर देते हुए कहा कि अब से वे यहीं रहेंगे और ये क्षेत्र केदार क्षेत्र के नाम से जाना जाएगा। इसके बाद शिव जी ज्योति स्वरूप में यहां स्थित शिवलिंग में समा गए। (uttrakhand chardham yatra 2025)

केदारनाथ धाम उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है और यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। बाबा केदारनाथ का धाम हिमालय की बर्फीली पहाड़ियों और अलौकिक प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ पाया जाता है।

केदारनाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा (uttrakhand chardham yatra 2025)

महाभारत काल से संबंधित है। कहा जाता है कि जब पांडव महाभारत के युद्ध में अपने भाई-बंधुओं की हत्या से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते थे, तो भगवान शिव उनसे रुष्ट होकर गुप्तकाशी चले गए।

जब पांडव उनका पीछा करते हुए वहां पहुंचे, तो भगवान शिव ने खुद को एक भैंसे के रूप में परिवर्तित कर लिया। भीम ने अपनी विशाल शक्ति का उपयोग करके इस भैंसे को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन शिव जी भूमि के अंदर समा गए। (uttrakhand chardham yatra 2025)

जब उन्होंने अपना पुनः प्रकट होने का निर्णय लिया, तो उनका शरीर विभिन्न स्थानों पर प्रकट हुआ। इस प्रकार, उनका कूबड़ केदारनाथ में प्रकट हुआ और यही स्थान भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग रूप में प्रसिद्ध हुआ। भगवान शिव की अन्य अंगों की उपस्थिति के स्थानों को पंचकेदार (तुगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर, और मध्यमहेश्वर) के रूप में पूजा जाता है।

गंगोत्री

गंगोत्री भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक पवित्र तीर्थस्थल है, जो हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह गंगा नदी का मंदिर है, जहां मां गंगा की आराधना की जाती है। गंगा नदी का वास्तविक उद्गम गोमुख ग्लेशियर से होता है, जो गंगोत्री से लगभग 19 किलोमीटर दूर स्थित है।

मान्यता है कि राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या कर मां गंगा को धरती पर लाने के लिए प्रसन्न किया था। उनकी तपस्या के प्रभाव से भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण किया और फिर धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित किया। इसी पौराणिक कथा के कारण गंगोत्री का विशेष महत्व है।

गंगोत्री मंदिर का निर्माण गोरखा जनरल अमर सिंह थापा ने 18वीं शताब्दी में करवाया था। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और चारों ओर से ऊंचे-ऊंचे पर्वतों और घने देवदार के जंगलों से घिरा हुआ है। (uttrakhand chardham yatra 2025)

हर साल हजारों श्रद्धालु इस पवित्र स्थल पर दर्शन के लिए आते हैं। शीतकाल में अत्यधिक ठंड और बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, और मां गंगा की मूर्ति को मुखबा गांव में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

गंगोत्री में भागीरथ शिला, पांडव गुफा और सूर्य कुंड जैसे कई धार्मिक स्थल भी हैं, जहां श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को एक अद्भुत अनुभव प्रदान करता है।

यमुनोत्री

यमुनोत्री उत्तराखंड के चार धामों में से एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है और इसे यमुना नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,293 मीटर की ऊंचाई पर गढ़वाल हिमालय में स्थित है। यमुनोत्री मंदिर देवी यमुना को समर्पित है, जिन्हें हिंदू धर्म में एक पवित्र नदी के रूप में पूजा जाता है।

माना जाता है कि टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रताप शाह ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था, और बाद में जयपुर की महारानी गुलेरिया ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। (uttrakhand chardham yatra 2025)

यमुना नदी का वास्तविक स्रोत चंपासर ग्लेशियर है, जो मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर दूर स्थित है, लेकिन यह स्थान अत्यधिक दुर्गम होने के कारण भक्तगण मंदिर के समीप ही यमुना की पूजा करते हैं।

यमुनोत्री क्षेत्र में कई गर्म जलकुंड स्थित हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध ‘सूर्यकुंड’ है। श्रद्धालु इस कुंड के गर्म पानी में चावल और आलू बांधकर डालते हैं, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

यमुनोत्री की यात्रा कठिन होती है, क्योंकि यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पैदल या घोड़े-खच्चर की सहायता से खड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है। (uttrakhand chardham yatra 2025)

यमुनोत्री के आसपास की प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढके पहाड़, घने जंगल और कल-कल बहती यमुना नदी का दृश्य मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो श्रद्धालु यमुनोत्री के दर्शन करते हैं, उन्हें यमलोक जाने का भय नहीं रहता, क्योंकि देवी यमुना अपने भक्तों को पापों से मुक्त करती हैं। uttrakhand chardham yatra 2025)

Naya India

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