Saturday

05-04-2025 Vol 19

आंकड़ों में असलियत

एनएसओ के अग्रिम अनुमान में कहा गया है कि 2024-25 में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर चार साल के न्यूनतम स्तर पर रहेगी। ध्यानार्थ है कि अग्रिम अनुमान के आंकड़ों को ही अगले वित्त वर्ष के बजट का आधार बनाया जाता है।

अब केंद्र ने भी माना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था रफ्तार खो रही है। वैसे तो पहले दिखी उच्च वृद्धि का भी आधार मजबूत नहीं था। कोरोना काल में माइनस में गई वृद्धि दर के आधार पर अर्थव्यवस्था उठी, तो वृद्धि दर काफी ऊंची दिख रही थी। इस बीच अर्थव्यवस्था के उत्तरोत्तर वित्तीयकरण से वित्तीय संपत्तियों में इजाफे से भी जीडीपी वृद्धि दर ऊंची दिखती रही। जबकि मैनुफैक्चरिंग से लेकर आम उपभोग तक में गिरावट का सिलसिला जारी था। निजी निवेश वर्षों से अपेक्षित स्तर पर नहीं आ पाया है। इस बीच सरकार ने पूंजीगत खर्च बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को बेहतर दिखाने की कोशिश की। मगर ये सारे तरीके अब धार खो रहे हैं। नतीजतन केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के 2024-25 के अग्रिम अनुमान में कहा गया है कि इस अवधि में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर चार साल के न्यूनतम स्तर पर- यानी महज 6.4 प्रतिशत रहेगी।

यह ध्यान रखना चाहिए कि अग्रिम अनुमान के आंकड़ों को ही अगले वित्त वर्ष के लिए पेश होने वाले बजट का आधार बनाया जाता है। जबकि अग्रिम अनुमान में कम-से-कम एक आंकड़ा ऐसा है, जिसे बाजार अर्थशास्त्रियों ने अति आशावादी माना है। ये आंकड़ा निजी उपभोग का है, जिसमें सरकारी अनुमान के मुताबिक इस वित्त वर्ष में 7.3 फीसदी बढ़ोतरी होगी। अर्थशास्त्रियों ने ध्यान दिलाया है कि इस वर्ष वेतन वृद्धि की दर निम्न है और शहरी उपभोक्ता सामग्री बनाने वाली कंपनियां लगातार निराशाजनक आंकड़े पेश कर रही हैं। वैसे में इस अनुमान के मुताबिक परिणाम आना मुश्किल ही है।

ये अनुमान सटीक नहीं निकला, तो असल में आर्थिक वृद्धि दर और नीचे जा सकती है। वर्षों से ये जरूरत बताई जा रही है कि निजी निवेश और उपभोग का ना बढ़ना भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख समस्या बनी हुई है। इसे संभालने के कोई ठोस उपाय सरकार ने नहीं किए हैं। नतीजा अर्थव्यवस्था की बुनियाद कमजोर होते जाने के रूप में सामने आया है। अब जबकि अर्थव्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय चुनौतियां बढ़ने के संकेत हैं, तो स्थिति बदतर हो सकती है। क्या एक फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट में सुधार के उपायों की उम्मीद जोड़ी जा सकती है?

NI Editorial

The Nayaindia editorial desk offers a platform for thought-provoking opinions, featuring news and articles rooted in the unique perspectives of its authors.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *