शलोमो पर्ल की दर्दनाक कहानी

तेल अबीब। शमोलो पर्ल जर्मनी में 1945 में हुए नरसंहर में किसी तरह जिंदा बचने वाले जर्मन यहूदी हैं। वे जंग के दौरान भेष बदलकर नाजी नौजवान के रूप में रहना पड़ा। 95 वर्षीय शमोलो पर्ल कहते हैं कि युद्ध के दौरान यहूदियों से नाजियों की इतनी नफरत देखी कि मुझे यहूदी घर पैदा होना खलने लगा।

शलोमो पर्ल बताते हैं कि उन्होंने किसी कन्सेन्ट्रेशन कैम्प के अंदर कैद की जिंदगी नहीं गुजारी लेकिन भेष बदलकर नाजी नौजवान के रूप में रोजाना तिल-तिल मरते रहे। उन्होंने कहा ‘‘मेरी चार साल की तकलीफ जिंदगी भर के लिए थी, हर एहसास अभी भी ताजा है, उस जमाने में हर वक्त डर लगा रहता था कि जिस दिन नाजियों को पता चल जाएगा कि मैं यहूदी हूं तो क्या होगा।

1945 में जंग के हालात किसी हद तक सामान्य होने तक शलोमो पर्ल ने जोजफ परजेल के नाम से हिटलर यूथ के एक सदस्य के तौर पर काम करते रहे। शमोलो पर्ल ने कहा कि मैं उस वक्त 16 साल का था जब कठिनाइयों का दौर शुरू हुआ, मैं हर रात को आखिरी रात समझ कर सोता था और यहूदियों से नाजियों की नफरत देख कर मुझे खुद से नफरत होने लगी थी कि मैं एक यहूदी घर में क्यों पैदा हुआ। मेरी पहचान मेरे लिये मौत बनकर मेरा पीछा करती रही। मैं कभी हालात से तो कभी खुद से भागता रहा। भरपूर जवानी में कदम रखते रखते मैं हालात से तो नहीं लेकिन खुद से बहुत दूर भाग चुका था।

शलोमो पर्ल ने बताया कि उनका खानदान हिटलर के इस घोषणा के बाद के तमाम यहूदियों को खत्म कर दिया जाए, किसी तरह बच-बचाकर पोलैंड पहुंचा। वहां अभी सुकून की सांस भी नहीं ले पाए थे कि जर्मनी ने पोलैंड पर भी हमला कर दिया। इस हमले में पोलैंड का बंटवारा हो गया और पूर्वी पोलैंड पूर्व सोवियत संघ का हिस्सा बन गया। इस स्थिति में उन्हें अपने मां बाप से बिछुड़ना पड़ा। बिछड़ते वक्त उनके पिता ने जहां उसने कहा था कि अपनी पहचान कभी मत छुपना वर्ना भगवान तुम्हारी रक्षा छोड़ देगा। वहीं मां ने कहा था कि जाओ और जिंदा रहो।

एक स्थिति में वह एक जर्मनी फौजी के निशाने पर आ गए और उसने जब पूछा, तुम जर्मन हो या यहूदी तो पहले मुझे पिता की बात याद आई और मेरे कदम डगमगा उठे। लेकिन तभी मुझे अपनी मां की बात भी याद आ गयी कि जाओ और जिंदा रहो। इसलिए मैं उस जर्मन फौजी से कहा कि मैं जाति के तौर पर जर्मन हूं और एक रॉकेट हमले में मेरा घर तबाह हो गया इस लिए मेरे पास कोई दस्तावेज नहीं है। उन्होंने कहा, इस तरह मैं बच तो गया लेकिन पिता के मशवरे को सामने रख कर भगवान और होलोकोस्ट दोनों के संबंध को नहीं समझ पाया।

यह पूछे जाने पर कि पश्चिमी पोलैंड में आपके माता पिता और भाई बहन के साथ क्या हुआ शलोमो पर्ल ने कहा कि मैं अपने मां बाप और बहन से तो कभी नहीं मिल पाया लेकिन वो उस वक्त मेरे ख्यालों में जीवित थे जब तक मैं अपने भाई आईजैक से नहीं मिला। उसने बताया कि मेरे पिता जहां भूख से मर गये वहीं मेरी मां को 1944 में एक गैस ट्रक में कत्ल कर दिया गया। बहन को गोलीमार दी गयी। आईजैक ने ही बताया कि फलस्तीन में उसकी मोहब्बत इस क्षेत्र में ले आई और इजरायल बन जाने के बाद मैं हैफा चला आया।

जर्मन भेष में उन पर कभी किसी ने शक किया या नहीं यह पुछे जाने पर उन्होंने बताया कि एक बार वह हमाम में नहा रहे थे कि एक जर्मन ने उनके खतने की हालत देख ली। इत्तफाक से वह समलैंगिक था इस लिए उसने इस राज को राज रखा और फिर एक झड़प में इस राज के साथ ही मारा गया। आगे चल कर उन्होंने नाजी फौजियों के लिए रूसी भाषा में जर्मन अनुवादक की जिम्मेदारी पूरी तरह संभाल ली और वरिष्ठ जर्मन अफसर ने उन्हें बेटे की तरह गोद ले लिया। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने जोजफ स्टालिन के बेटे याकूफ को गिरफ्तार कराने में मुख्य भूमिका निभाई थी।

एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने सुनने वालों को यह बताकर रूला दिया कि दिन के वक्त जहां वह युद्ध के नशे में जर्मन नौजवानों की तरह हेल हिटलर हेल हिटलर के नारे लगाते थे वहीं रात को बिस्तर पर मां बाप और भाई बहन को याद करके रोया करते थे। यह पूछे जाने पर कि उन्होंने शादी कि या नहीं, हां में जवाब देते हुए उन्होंने यह बताकर सबको हैरान कर दिया कि लीनी लेटस नाम की एक जर्मन लड़की उनसे प्यार करने लगी थी। उससे वह शादी तो नहीं कर सके हालात सामान्य हो जाने के बाद उससे एक बार यह जरूर कहा, “अगर तुम जान लेती मैं यहूदी हूं तो क्या करती, उसने तुरंत जवाब दिया मैं पुलिस को खबर कर देती।

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