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परफ्यूमर्स/खुशबू केमिस्ट्स के रूप में करियर

कहा जाता है कि परफ्यूम्स के इस्तेमाल की शुरुआत मेसोपोटैमियन सभ्यता के लोगों ने की थी। हजारों साल बाद भी परफ्यूम्स का क्रेज कम नहीं हुआ है, बल्कि अब यह एक भरे-पूरे उद्योग में तब्दील हो चुका है। अगर आपको भी नई-नई खुशबुएं लुभाती हैं, तो आप बन सकते हैं सफल परफ्यूमर या फ्रेग्रेंस केमिस्ट।

कौन होते हैं परफ्यूमर्स ?

परफ्यूम के कॉम्पोजिशन और उसकी फ्लेवरिंग को तैयार करने वाले जानकार परफ्यूमर्स कहलाते हैं। फ्रेग्रेंस प्रोडक्शन में इनकी भूमिका बेहद अहम होती है। ये परफ्यूम में इस्तेमाल किए जाने वाले इंग्रीडिएंट्स के गुणों और रिएक्टिविटी को समझकर नए एरोमा फॉर्मूला तैयार करते हैं। ये न सिर्फ परफ्यूम्स के लिए बल्कि हर तरह के प्रोडक्ट जैसे एयर फे्रशनर्स, रूम फे्रशनर्स, एंटीपरस्पिरेंट्स, लॉन्ड्री वक्लीनिंग प्रोडक्ट्स, पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स आदि के लिए भी एरोमा फॉर्मूला तैयार करते हैं। इन्हें फ्रेग्रेंस केमिस्ट भी कहा जाता है।

पाठ्यक्रम की आवश्यकता

इस उद्योग में करियर बनाने के लिए इंटर में केमिस्ट्री विषय होना जरूरी है। इसके बाद आगे केमिस्ट्री से बीएससी या एमएससी करें। इसके अलावा आप परफ्यूमरी एंड फ्लेवर्स टेक्नोलॉजी में मास्टर्स, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट प्रोग्राम इन एरोमा मैनेजमेंट, एरोमा टेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन, परफ्यूमरी एंड कॉस्मेटिक मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी कर सकते हैं।

वर्क प्रोफाइल

परफ्यूमर्स मूल रूप से प्रोडक्ट की फ्रेग्रेंस में इस्तेमाल किए जाने वाले पदार्थों की केमिकल टेस्टिंग करते हैं, ताकि उनकी क्वॉलिटेटिव व क्वॉन्टिटेटिव एनालिसिस की जा सके। इसके अलावा ये इस बात को भी सुनिश्चित करते हैं कि उत्पादन प्रक्रिया में पर्यावरण और गुणवत्ता संबंधी मानकों व नियमों का पालन हो। इनकी जॉब ड्यूटी में तैयार मटेरियल की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, डेडलाइन्स को ध्यान में रखते हुए उत्पाद की प्राथमिकता तय करना, जरूरत के हिसाब से एरोमा फॉर्मूला में बदलाव करना और गुण विशेष, जैसे बॉडी, हार्मोनी, स्ट्रेंथ, परमानेंस आदि के मुताबिक फ्रेग्रेंस का मूल्यांकन करना शामिल है।

कौशलता

एक बेहतरीन परफ्यूमर बनने के लिए सेंस ऑफ स्मेल होना सबसे जरूरी है। इसके अलावा आपमें अलग-अलग खुशबुओं को आकर्षक तरीके से कंबाइन करने की प्रतिभा, अच्छी याददाश्त, धैर्य, पैशन, बढ़िया लैबोरेट्री स्किल्स, अच्छा टाइम मैनेजमेंट, टीम वर्किंग स्किल्स व बेहतरीन रिटन व ओरल कम्युनिकेशन स्किल्स होनी चाहिए।

भविष्य

आप बड़े-बड़े परफ्यूम हाउसेज या कंपनीज के क्रिएटिव, एप्लिकेशन और इवैल्युएशन डिपार्टमेंट में काम कर सकते हैं। इसके अलावा आप फूड एंड बेवरेज, टी एंड वाइन और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में मौजूद कंपनियों में भी काम कर सकते हैं।

वेतन

शुरुआत में एप्लिकेशन डिपार्टमेंट में परफ्यूमर्स को 20 से 25 हजार रुपए की जॉब आसानी से मिल जाती है, जबकि क्रिएटिव डिपार्टमेंट में परफ्यूमर को कुछ साल के अनुभव के बाद 60 से 80 हजार रुपए की सैलरी मिल सकती है।

प्रमुख संस्थान

इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई

मुंबई यूनिवर्सिटी, मुंबई

फ्रेग्रेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर, कन्नौज

वी जी वझे कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स, मुंबई

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