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रफाल-सौदाः कन्नी मत काटिए

रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पदनाम को सार्थक कर दिया। उन्होंने रफाल-सौदे पर प्रधानमंत्री की इतनी जबर्दस्त रक्षा की कि उसकी तुलना में प्र.म. राजीव गांधी के रक्षा मंत्री कृष्णचंद्र पंत का बोफोर्स-भाषण उतना प्रभावशाली नहीं लगता। निर्मला ने राहुल गांधी के एक-एक आरोप को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने राहुल के द्वारा फेंकी गई ईटों का जवाब पत्थरों से दिया। उनके जवाबों और उनके भाषण के बाद राहुल के सवालों को यहां दोहराना जरुरी नहीं है लेकिन दो प्रश्न सरकार से हर आदमी पूछना चाहेगा। 

जब संसद में सीधे मोदी पर चोरी और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे थे, तब वे खुद वहां क्यों नहीं थे#? मोदी के गैर-हाजिर होने का कारण क्या है ? क्या मोदी अंदर से इतने कमजोर हो गए हैं कि राहुल-जैसे अनगढ़ नेता का भी वे सामना नहीं कर सकते? शायद उन्हें शंका हो रही हो कि राहुल कहीं दुबारा आकर उनसे चिपट न जाए? मैं सोचता हूं कि उन्हें सदन में रहकर उन पर लगे सभी आरोपों का करारा जवाब देना चाहिए था। दूसरी गलती भाजपा-सरकार की यह हुई कि सीतारमण ने भाषण दिया और वे सदन से अंतर्ध्यान हो गईं। संवाद की यह मोदी-शैली किसी भी लोकतंत्र में प्रशंसनीय नहीं होती। 

राहुल ने बाद में जो सवाल उठाए, उनका जवाब वे सदन में देतीं तो उनकी प्रतिभा का सिक्का पूरे देश पर जम जाता। रफाल-सौदे को लेकर उन्होंने जो कुछ कहा, वह सिर्फ मुठभेड़बाजी थी। कोरी राजनीति थी। राहुल के नहले पर दहला था लेकिन इस सौदे को लेकर जो मूल प्रश्न अरुण शौरी और यशवंत सिंहा आदि ने उठाए हैं, उनका जवाब वे टाल गईं। 

मूल प्रश्न यह है कि 500 करोड़ का जहाज 1600 करोड़ में क्यों खरीदा गया ? हर जहाज पर 1100 करोड़ रु. ज्यादा क्यों दिए जा रहे हैं ? अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रु. का ठेका क्यों दिया गया ? उसमें नरेंद्र भाई और तत्कालीन फ्रांसीसी ओलांद और उनकी प्रेमिका की भूमिका क्या थी ? इन सवालों के संतोषजनक जवाब हैं लेकिन पता नहीं क्यों, हमारी सरकार हकला रही है। जाहिर है कि दाल में कुछ काला है। अगर नहीं है तो भी सरकार की हकलाहट शक पैदा करती है। सीतारमन के जोरदार भाषण के बावजूद यह शक कायम है। सीतारमण द्वारा प्रस्तुत यह तथ्य ठीक हो सकता है कि कांग्रेस सरकार इस विमान के 737 करोड़ रु. दे रही थी और मोदी सरकार इसे सिर्फ 670 करोड़ में खरीद रही है लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि इस 1600 करोड़ के आंकड़े का क्या हुआ ? डालर की कीमत बढ़ी है लेकिन क्या तीन गुना बढ़ी है ? क्या 2014 में डालर 25 रुपए का था ? सरकार और उच्चतम न्यायालय, दोनों असली सवाल से कन्नी काट गए।

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