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उत्तराखंड विस में लोकायुक्त गठन की मांग

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को एक बार फिर लोकायुक्त के मसले पर राज्य सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि 'जीरो टालरेंस' के अपने नारे के उलट वह भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी है और इसलिये वह संवैधानिक संस्था के गठन से बच रही है।

विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन कार्य स्थगनादेश के जरिये उठाये गये इस मसले पर संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत से लोकायुक्त के गठन को लेकर कोई समय सीमा न दिये जाने से असंतुष्ट कांग्रेस सदस्यों ने अध्यक्ष के आसन के सामने आकर नारे भी लगाये। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश ने इस मसले को जोरदार ढंग से उठाते हुए सरकार पर लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर गंभीर न होने का आरोप लगाया और कहा कि भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आ रहे हैं लेकिन किसी मजबूत संस्था के अभाव में इन शिकायतों की जांच ही नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि 'जीरो टालरेंस' का नारा जपने वाली सरकार खुद ही कह रही है कि प्रदेश में लोकायुक्त की जरूरत ही नहीं है।

इंदिरा ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार खुद ही कैसे तय कर सकती है कि लोकायुक्त की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोकायुक्त की जरूरत उन लोगों से पूछिये जो भ्रष्टाचार से पीडित हैं और प्रभावित हैं। इस संबंध में इंदिरा ने हाल में प्रदेश में स्टिंग के प्रयास के लिये हुई गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने सत्ता के दबाव में एक व्यक्ति को जेल भेज दिया। उन्होंने सवाल पूछा कि अगर प्रदेश में भ्रष्टचार नहीं हो रहा है तो किस डर से उसे गिरफ्तार किया गया। पिछले साल 27 मार्च को रखे गये लोकायुक्त विधेयक को प्रवर समिति द्वारा 15 जून, 2017 को पारित किये जाने की बात कहते हुए नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि सरकार अगर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गंभीर है तो वह एक माह में लोकायुक्त की नियुक्ति करे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और चकराता के विधायक प्रीतम सिंह समेत अन्य कांग्रेसी सदस्यों ने भी सरकार से जानना चाहा कि प्रदेश में लोकायुक्त की नियुक्ति कब तक होगी। इस प्रस्ताव का उत्तर देते हुए संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि सरकार लोकायुक्त के गठन को लेकर पूरी तरह से गंभीर है और इसीलिये उसने सत्ता में आने के केवल नौ दिन बाद सदन में इस विधेयक को पेश कर दिया। उन्होंने हालांकि कहा कि यह विधेयक इस समय सदन की संपत्ति है और सदन की कार्य मंत्रणा समिति ही यह तय करेगी कि कौन सा विषय कब पटल पर लाया जायेगा।

पंत के इस उत्तर से असंतुष्ट कांग्रेसी सदस्य अपने स्थानों पर खडे हो गये और सरकार से लोकायुक्त के गठन की समय सीमा बताने की मांग करने लगे। बाद में सभी विपक्षी सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने आ गये और नारेबाजी करने लगे। कुछ देर तक सदन में हंगामे की स्थिति बनी रही और इसी बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही भोजनावकाश के लिये स्थगित कर दी।

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