रालोद व कांग्रेस ने साधी चुप्पी

लखनऊ। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन में औपचारिक रूप से जगह नहीं मिल पाने के बावजूद अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल इंतजार करने को तैयार है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि वह गठबंधन में शामिल होने के लिए इंतजार करने को तैयार है। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने शनिवार को सपा-बसपा गठबंधन का औपचारिक ऐलान होने के बाद इस मसले पर चुप्पी साध ली है पर पार्टी ने शुक्रवार को ही आधिकारिक रूप से कह दिया था कि दोनों पार्टियां खतरनाक भूल कर रही हैं।

बहरहाल, सपा-बसपा ने गठबंधन का ऐलान करने के बाद दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ी हैं और दो दूसरी पार्टियों के लिए। दूसरी पार्टी रालोद हो सकती है पर उसे एक या दो सीट और चाहिए। जानकार सूत्रों का कहना है कि बातचीत के बाद सपा और बसपा दोनों अपने कोटे से एक-एक सीट छोड़ सकते हैं ताकि रालोद को एडजस्ट किया जा सके। पर कांग्रेस के गठबंधन में शामिल होने की संभावना अब कम हो गई है।

सपा-बसपा के बीच गठबंधन की घोषणा के बाद रालोद ने इसका स्वागत किया और कहा कि भाजपा के खिलाफ बने गठबंधन में शामिल होने के लिए पार्टी इंतजार करने को तैयार है। रालोद प्रवक्ता अनिल दुबे ने शनिवार को कहा कि गरीब, किसान और कमजोर लोगों के हितों की रक्षा के लिए उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ एकजुटता की पक्षधर है और इसके लिए हाल ही में पार्टी उपाध्यक्ष जयंत चौधरी की मुलाकात सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से हुई थी। उन्होंने कहा कि सपा बसपा ने सहयोगी दलों के लिए कुछ सीटें छोड़ी हैं। इसका मतलब है कि रालोद के लिए संभवानाओं के दरवाजे खुले हुए हैं।

दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के गठबंधन से अलग रखे जाने के बाद कांग्रेस के नेता फिलहाल इस पर कुछ कहने से बच रहे हैं, हालांकि सूत्रों का कहना है कि पार्टी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में अब अकेले चुनाव लड़ सकती है। सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस को जगह नहीं दिए जाने के बारे में कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने सिर्फ इतना कहा कि पार्टी तत्काल प्रतिक्रिया नहीं देगी और रविवार को लखनऊ में विस्तार से प्रतिक्रिया दी जाएगी। आजाद ने इससे पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राज बब्बर और दूसरे वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की।

इससे पहले शुक्रवार को जब गठबंधन के बारे में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बयान दे दिया तब कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि समान विचार वाले सभी दलों का मकसद देश से कुशासन और तानाशाही को खत्म करना है, लेकिन सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य में कांग्रेस की किसी भी तरह की अनदेखी करना राजनीतिक रूप से खतरनाक भूल होगी। राहुल गांधी ने भी कहा हुआ है कि कांग्रेस को हलके में लेना ठीक नहीं होगा।

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