अलगावी नेताओं की सुरक्षा वापस

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को अब सरकारी सुरक्षा नहीं मिलेगी। राज्यपाल प्रशासन ने हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी धड़े के प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक सहित राज्य के छह अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली है। पुलवामा में गुरुवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीआरपीएफ पर हुए आतंकवादी हमले के बाद सोशल मीडिया में इस बात की मांग हो रही थी कि अलगाववादी नेताओं को मिली सुरक्षा वापस ली जाए। ऐसा लग रहा है कि राज्यपाल प्रशासन ने लोकप्रिय भावनाओं को ध्यान में रख कर छह अलगाववादी नेताओं से सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया।

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि मीरवाइज उमर फारूक के साथ साथ अब्दुल गनी भट, बिलाल लोन, हाशिम कुरैशी, फजल हक कुरैशी व शब्बीर शाह को दी गई सुरक्षा वापस ले ली गई है। इस सूची में हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के प्रमुख और पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी का नाम नहीं है।

कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को दी गई सुरक्षा को किसी श्रेणी में नहीं रखा गया था लेकिन राज्य सरकार ने कुछ आतंकवादी समूहों से उनके जीवन को खतरा होने के अंदेशे को देखते हुए केंद्र के साथ सलाह मशविरा कर उन्हें खास सुरक्षा दी थी। गौरतलब है कि आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने 1990 में उमर के पिता मीरवाइज फारूक की और 2002 में अब्दुल गनी लोन की हत्या कर दी थी। पाकिस्तान समर्थक नेता अलगाववागदी नेता सैयद अली शाह गिलानी व जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट, जेकेएलएफ के प्रमुख यासिन मलिक को कोई सुरक्षा नहीं दी गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि आदेश के मुताबिक अलगाववादियों को दी गई सुरक्षा और उनको उपलब्ध कराई गई गाड़ियों रविवार शाम तक वापस ले लिए जाएंगे। किसी भी बहाने से उन्हें या किसी भी अलगाववादी नेता को सुरक्षा या सुरक्षाकर्मी नहीं मुहैया कराए जाएंगे। अगर सरकार ने उन्हें किसी तरह की सुविधा दी है तो वह भी भविष्य में वापस ले ली जाएगी। उन्होंने बताया कि पुलिस इस बात की समीक्षा करेगी कि अगर किसी अन्य अलगाववादी के पास सुरक्षा या अन्य कोई सुविधा है तो उसे तत्काल वापस ले लिया जाएगा।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को श्रीनगर दौरे पर कहा था कि पाकिस्तान और उसकी जासूसी एजेंसी आईएसआई से आर्थिक मदद हासिल करने वाले लोगों को दी गई सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी। पुलवामा में हुए हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे राजनाथ सिंह ने कहा था- जम्मू कश्मीर में कुछ ऐसे तत्व हैं, जिनके संपर्क आईएसआई और आतंकवादी संगठनों से है। उनको दी गई सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी।

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