अस्थाना की जांच जारी रहेगी

नई दिल्ली। सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज करते हुए जांच जारी रखने का निर्देश दिया है और साथ ही अस्थाना को गिरफ्तारी से मिली राहत भी खत्म कर दी है। इससे एक दिन पहले ही सीबीआई के निदेशक पद से आलोक वर्मा को हटाया गया। गौरतलब है कि दोनों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, जिसके बाद दोनों को जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया था। 

बहरहाल, दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस नजमी वजीरी ने इस मामले में अपने आदेश में कहा कि अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले की जांच जारी रहेगी। गौरतलब है कि विशेष निदेशक अस्थाना के खिलाफ सीबीआई के पूर्व प्रमुख आलोक वर्मा ने भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। अदालत ने अस्थाना और एजेंसी के उप अधीक्षक देवेंद्र कुमार की एफआईआर रद्द करने की याचिका भी खारिज कर दी। अस्थाना इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

जस्टिस वजीरी ने अस्थाना और देवेंद्र कुमार के खिलाफ जांच 10 सप्ताह में पूरी करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि एफआईआर में जिस तरह के आरोप हैं उनकी जांच जरूरी है। गौरतलब है कि उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति ने वर्मा को गुरुवार को सीबीआई के निदेशक पद से हटाकर अग्निशमन विभाग का निदेशक नियुक्त किया था। वर्मा ने इसके बाद आईपीएस से इस्तीफा दे दिया है।

जस्टिस वजीरी ने सीबीआई के उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार और कथित बिचौलिए मनोज प्रसाद के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से भी इनकार किया। हाई कोर्ट ने कहा कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ लगे दुर्भावना के आरोप साबित नहीं होते। वर्मा और अस्थाना के बीच कई महीने से तनातनी चल रही थी और दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

हाई कोर्ट में जस्टिस वजीरी ने कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए अस्थाना और कुमार के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पहले से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। अदालत ने अस्थाना, कुमार और प्रसाद की याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिन्होंने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी थी। अस्थाना पर भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की धाराओं के तहत आपराधिक कदाचार, भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। हैदराबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना ने एक मामले में राहत पाने के लिए कथित रूप से रिश्वत दी थी। सना की शिकायत पर ही एफआईआर दर्ज हुई है।

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