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राफेल में नया भंडाफोड़

नई दिल्ली। कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि राफेल विमान सौदे पर हस्ताक्षर से कुछ दिन पहले मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया में बदलाव करते हुए भ्रष्टाचार विरोधी कुछ मुख्य प्रावधानों को हटा दिया गया था। पार्टी ने यह भी सवाल किया कि आखिर ‘ऐसा करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कौन

नई दिल्ली। राफेल लड़ाकू विमान सौदे में एक और नया खुलासा हुआ है। अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने नया खुलासा करते हुए बताया है कि सरकार ने 2013 में सौदे के लिए तय की शर्तों में आठ बदलाव किए थे। यहां तक कि सौदे में बिचौलियों और दलालों को रोकने के लिए रखा गया प्रावधान भी सरकार ने हटवा दिया। नए खुलासे के मुताबिक सौदे में शामिल तीन अधिकारियों ने इन बदलावों का विरोध किया था। इन अधिकारियों ने पैसा सीधे विमान बनाने वाली कंपनी के खाते में भेजने का भी विरोध किया था पर उनके विरोध को दरकिनार कर दिया गया।

इस नए खुलासे के बाद कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। कांग्रेस पार्टी ने इस सौदे में पैसे के लेन देन का आरोप लगाया और जेपीसी से इसकी जांच कराने की मांग दोहराई। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी द हिंदू अखबार के खुलासे के बाद सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। बसपा प्रमुख मायावती ने भी केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा।

कांग्रेस ने राफेल सौदे में हुए खुलासे के बाद सोमवार को कहा कि इसकी सच्चाई का पता लगाने के लिए संयुक्त संसदीय समिति, जेपीसी की जांच जरूरी है। कांग्रेस ने यह भी सवाल किया कि भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधानों को हटा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कौन सा भ्रष्टाचार छिपाना चाहते थे? कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने द हिंदू अखबार की खबर के हवाले सवालिया लहजे में कहा - हम पूछना चाहते हैं कि सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधानों को क्यों हटाया? इसका जवाब यहीं है कि ऐसा इसलिए किया गया कि क्योंकि इस सौदे में भ्रष्टाचार है।

तिवारी ने कहा- इस सौदे से जुड़े सभी घटनाक्रमों को देखेंगे तो पता चलेगा कि विमान बनाने वाली कंपनी डसाल्ट इस सौदे में हा़वी रही है। प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया है। सामने आए तथ्यों से साफ है कि इस सौदे में किसी ने पैसा दिया है और किसी ने पैसा लिया है। इसलिए जेपीसी जांच की जरूरत है।

इससे पहले कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने ट्विट कर कहा- मोदी जी, राफेल सौदे में सरकारी गारंटी माफ करने के बाद आपने भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधान में भी छूट दे दी। आखिर आप कौन सा भ्रष्टाचार छिपाना चाहते थे? पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने जितना सोचा नहीं था, उससे ज्यादा तेजी से राफेल सौदे में खुलासे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले कीमत बढ़ाई गई, फिर यह खुलासा हुआ कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने समानांतर बातचीत करके भारतीय वार्ता दल के प्रयासों को कमजोर किया। अब यह खुलासा हुआ है कि मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया के प्रावधानों में बदलाव किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डसाल्ट को इस सौदे में फायदा ही फायदा हुआ है।

सा भ्रष्टाचार छिपाना चाहते थे? कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' की एक खबर शेयर करते हुए ट्वीट किया, 'मोदी जी, राफेल सौदे में सॉवरन गारंटी माफ करने के बाद अपने भ्रष्टाचार विरोधी प्रावधान में भी छूट दे दी। आखिर आप कौन सा भ्रष्टाचार छिपाना चाहते थे? पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा, 'सरकार ने जितना सोचा नहीं था, उससे ज्यादा तेजी से राफेल सौदे में खुलासे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले कीमत बढ़ाई गई, फिर यह खुलासा हुआ कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने समानांतर बातचीत करके भारतीय वार्ता दल के प्रयासों को कमजोर किया। अब यह खुलासा हुआ है कि मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया के प्रावधानों में बदलाव किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दसाल्ट को इस सौदे में फायदा ही फायदा हुआ है। गौरतलब है कि अखबार की खबर में कहा गया है कि फ्रांस के साथ इस सौदे के समझौते पर दस्तख्त करने से चंद दिन पहले ही सरकार ने इसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ पेनाल्टी से जुड़े अहम प्रावधानों को हटा दिया था। कांग्रेस राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लंबे समय से लगा रही है, हालांकि सरकार ने इसे सिरे से खारिज किया है।

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