प्राकृतिक संसाधनों के पर्यावरण हितैषी इस्तेमाल के तरीके खोजेंः कोविंद

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तकनीकि क्षेत्र के विशेषज्ञों से प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और इस्तेमाल के ऐसे तरीके विकसित करने की अपील की है जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिये हितैषी हों।  कोविंद ने यहां बुधवार को ‘ऊर्जा एवं पर्यावरण क्षेत्र की चुनौतियों और अवसर’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘ईएनसीओ 2019’ को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण विशेषज्ञों को जीवाश्म ईंधन सहित अन्य प्राकृतिक संसाधनों के पर्यावरण हितैषी इस्तेमाल की विधि खोजकर इसे अमल में लाये जाने वाली कार्ययोजना तैयार करना चाहिये।

कोविंद ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में ऊर्जा और पर्यावरण की चुनौतियों का जिक्र करते हुये कहा कि सिर्फ विकासशील देश ही नहीं बल्कि विकसित देश भी इन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों के इस्तेमाल को उत्पादकों और उपभोक्ताओं के लिये अधिक प्रभावी बनाते हुये इनके दोहन की स्वच्छ प्रक्रिया का विकास ही प्राकृतिक संसाधनों के पर्यावरण हितैषी इस्तेमाल को सुनिश्चित करेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य के तहत निसंदेह भारत सहित अन्य देशों के लिये ऊर्जा का प्रमुख स्रोत कोयला ही रहेगा, साथ ही अक्षय ऊर्जा जैसे स्रोतों की भागीदारी भी बढ़ेगी। इसके मद्देनजर उन्होंने हरित तकनीक पर आधारित खनन की विधियों के विकास की जरूरत पर बल दिया।

कोविंद ने कहा कि भारत अपने सभी नागरिकों को सस्ती कीमत पर बिजली मुहैया कराने के साथ औद्योगिक क्रांति के बलबूते देश की अर्थव्यवस्था को बल देने के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने पर्यावरण हितैषी तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देते हुये कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की भारत की प्रतिबद्धता से जुड़े पेरिस समझौते का हवाला देते हुये कहा कि इसके लिये तैयार की गयी कार्ययोजना के कारगर तरीके से पालन करने की जरूरत है।

तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डा. हर्षवर्धन भी मौजूद थे। डा. हर्षवर्धन ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के विकास और इस्तेमाल को सुनिश्चित करना भारत की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अक्षय ऊर्जा के विकास को बढ़ावा देते हुये स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को प्रात्साहित करने का सबसे बड़ा कार्यक्रम सफलतापूर्वक चलाया है। इसके तहत एलईडी लाइट के इस्तेमाल को सुनिश्चित करते हुये देश में बिजली उपभोक्ताओं को 33 करोड़ एलईडी बल्ब वितरित कर सालाना 3.2 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने में कामयाबी हासिल की है।

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