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देश की प्रगति के लिए हिंदी का विकास जरूरी: वेंकैया

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को कहा कि आज हिंदी सोशल मीडिया और संचार माध्यमों की प्रमुख भाषा बन गई है, लेकिन इसे क्षेत्रीय भाषाओं के साथ रोजी-रोटी से जोड़ने की दिशा में प्रयास किये जाने की जरूरत है क्योंकि विदेशी भाषा के दम पर कोई भी देश विकास नहीं कर सकता।

श्री नायडू ने यहाँ विज्ञान भवन में हिंदी दिवस समारोह को संबोधित करते हुये कहा “भारत में दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की संभावना है और सभी देशवासियों को अपने सपनों को साकार करने तथा देश के विकास में योगदान देने के लिए सही दिशा में अपने ज्ञान, कौशल और ऊर्जा को लगाना होगा। ऐसा हिंदी और देश की भाषाओं के अधिकाधिक प्रयोग से ही संभव है क्योंकि कोई भी देश विदेशी भाषा के बूते पर प्रगति नहीं कर सकता।”उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी भाषा में सही शिक्षा, ज्ञान और कौशल प्रदान करके अपनी विशाल युवा आबादी को राष्ट्रीय संपत्ति सर्जकों में परिवर्तित करने की जरूरत है।

हिंदी का विस्तार शिक्षा, ज्ञान-विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी एवं वाणिज्‍य में अधिकाधिक होने से युवा पीढ़ी को विकास के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं को लोगों की रोज़ी-रोटी से जोड़ा जाये यानी अपनी भाषाओं के अध्ययन से लोगों को रोजगार के अधिक अवसर मिलने चाहिये।

उपराष्ट्रपति ने हिंदी को पुरातन और आधुनिकता का संगम करार देते हुये कहा कि उसका शब्द भंडार एक तरफ संस्कृत से तो दूसरी तरफ अन्य अनेक देसी-विदेशी भाषाओं के शब्दों से समृद्ध हुआ है। उसकी लिपी देवनागरी दुनिया की सबसे पुरानी एवं वैज्ञानिक लिपियों में से है। उन्होंने कहा कि देश की कई अन्य भाषाएँ हैं जो हिंदी से ज्यादा पुरानी और समृद्ध हैं।

संस्कृत तो सभी भारतीय भाषाओं की जननी है और हमारे पास अत्यंत समृद्ध क्षेत्रीय भाषाएँ भी हैं, लेकिन हिंदी सर्व-सुलभ और सहज ग्रहणीय भाषा है, अधिकांश जनता की भाषा है, उसका स्वरूप समावेशी है।

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