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राहुल का मोदी के नाभिकुंड पर हमला...

राकेश अग्निहोत्री एक बार फिर चिरपरिचित आक्रामक अंदाज के साथ राहुल गांधी के तीखे तेवर, तल्ख टिप्पणी सुबह दिल्ली की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोपहर बाद भोपाल के जंबूरी मैदान में किसान आभार रैली में  देखने को मिले.. निशाने पर एक बार फिर मोदी, लेकिन इस बार लाइन कुछ आगे बढ़ती हुई संघ तक भी जा पहुंची.. तो अपनी ही सरकार को ब्यूरोक्रेसी से सावधान रहने और कार्यकर्ताओं, जनता की अपेक्षाओं को समझने और उनसे संवाद बनाए रखने का मशविरा भी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बेबाकी के साथ  दे गए.. इससे पहले दिल्ली में कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के कार्यक्रम में भी राहुल गांधी कमलनाथ के हवाले से संघ कनेक्शन के लिए मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के रहते एक मंत्रालय की ओर इशारा कर चुके हैं ..

तो राहुल गांधी ने खुलकर मुख्यमंत्री कमलनाथ की तारीफ की, लेकिन इशारों-इशारों में ही सही, कहीं ना कहीं जनता और कार्यकर्ता के भरोसे पर खरा उतरकर नहीं दिखाने पर सरकार को सार्वजनिक मंच से मशवरा कहे या फिर चेतावनी भी दे डाली, जिसमें संदेश सिर्फ मंत्रियों के लिए ही नहीं छुपा था, बल्कि मुख्यमंत्री से अपेक्षा भी नजर आई कि आम जनता और पार्टी कार्यकर्ता से दूरी उन्हें बर्दाश्त नहीं होगी.. कर्जमाफी नहीं होने पर 10 दिन में चीफ मिनिस्टर बदल देने की चेतावनी दे चुके राहुल गांधी ने एक बार फिर अपनी बात को जिस तरह दोहराया उसका लब्बोलुआब अब यही माना जाएगा कि मतदाताओं और सरकार के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी कार्यकर्ता को हर हाल में महत्व मिलना चाहिए..

निश्चित तौर पर चिंता लोकसभा चुनाव की नजर आई ऐसे में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य दोनों ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का आव्हान कर अपनी ओर से संदेश दिया के बड़े लक्ष्य को लेकर मध्य प्रदेश से बढ़ती अपेक्षाएं वह पूरी करके दिखाएंगे. लाख टके का सवाल क्या राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश सत्ता में कांग्रेस के सवार होने के बाद राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी को ताकत देने वाली संघ यानी भाजपा के नाभि कुंड पर सीधा हमला कर कोई बड़ा सियासी संदेश दिया है...

भोपाल दौरे के दौरान राहुल के उद्बोधन से ज्यादा चर्चा व आपके पीछे छोड़ दे अपने आक्रमक अंदाज की.. मुख्य सोचने को मजबूर हुए कि राहुल गांधी ने न सिर्फ आपको बदला बल्कि विपक्ष की भूमिका में जिम्मेदारी का निर्वहन कर यह साबित किया कि कांग्रेसी नहीं देश का नेतृत्व करने में वह सक्षम है..कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भोपाल दौरे के दौरान एक साथ कई संदेश दिए.. संदेश यदि कमलनाथ सरकार के लिए अपेक्षाओं के साथ छुपा हुआ था तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने का इरादा जनता के साथ फिर सामने रखा.. राहुल ने जोर देकर कहा कि नरेंद्र मोदी को डरा कर कोई भी काम कराया जा सकता है..

संघ की ताकत  और खुले समर्थन की दम पर ही मोदी  देश के प्रधानमंत्री बने.. वह बात और है कि संघ के अपने को रिशु पीछे छोड़ते हुए नजर आ रहे हैं.. मोदी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का जो स्वाभिमान  बढ़ाया और भारतीय राजनीति को जो दिशा दी उसने सबसे ज्यादा कांग्रेस चिंता में इजाफा किया.. प्रधानमंत्री इन दिनों किसानों पर फोकस बनाए हुए हैं ऐसे में शायद राहुल का इशारा किसानों को उनका हक दिलाने में कांग्रेस की भूमिका की ओर था.. संदेश सरसंघचालक मोहन भागवत के लिए भी तो पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के दौरान हावी रही नौकरशाही से सीख और नसीहत लेने का मशविरा भी वह अपनी कांग्रेस सरकार को दे गए..

पूरा फोकस पार्टी के कार्यकर्ता और जनता के बीच बनाकर रखा तो जाते-जाते उन्होंने मंच के सामने मौजूद किसान और पार्टी कार्यकर्ता के जरिए यह संदेश भी दे दिया कि यदि मध्यप्रदेश में किसी मुद्दे और समस्या को लेकर उन्हें बुलाया जाएगा तो वो उनकी लड़ाई लड़ने के लिए उनके बीच में नजर आएंगे.. मंदसौर रैली के दौरान कर्जमाफी का जो वादा उन्होंने प्रदेश की जनता से किया था आज उसे निभाने का श्रेय उसी जनता को दिया जिसने उन्हें शक्ति दी तो इसके लिए कमलनाथ के नेतृत्व की जमकर तारीफ की.. किसान का भरोसा बरकरार रखते हुए उनका समर्थन लोकसभा चुनाव में हासिल करने के लिए राहुल ने कोई कसर नहीं छोड़ी..

सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि आम जनता की नब्ज पर भी उन्होंने हाथ रखा, लेकिन जोर नौजवान, किसान, महिला, गरीब, आदिवासी, दलित वर्ग पर दिया.. राफेल पर उनकी लड़ाई जारी रहने के संदेश दिए तो मंच से अपने चिरपरिचित अंदाज में ‘चौकीदार चोर’ के नारे एक बार फिर लगवाए.. तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनकी बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, चाहे फिर वो ब्यूरोक्रेसी या फिर शिवराज सरकार का संघ कनेक्शन और अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्रियों के लिए स्पष्ट संदेश ही क्यों न हो.. राहुल का सरसंघचालक मोहन भागवत का नाम लेकर स्पष्ट संदेश दे दिया किसी मोदी सरकार नहीं बल्कि संघ के सियासत में हस्तक्षेप को भी वह स्वीकार नहीं करेंगे..

एक दिन पहले ही राहुल गांधी दिल्ली में कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के कार्यक्रम में कमलनाथ द्वारा दी गई जानकारी के हवाले से मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के एक मिनिस्ट्री द्वारा करोड़ों रुपए के गोलमोल की ओर इशारा किया था, तो भोपाल के इस मंच से एक बार फिर आगाह किया कि यहां अब संघ की सरकार नहीं है..
.. तो सवाल यहीं खड़ा होता है कि क्या संघ की प्रयोगशाला माने जाने वाले मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार में हुए जिन घोटालों का आरोप कांग्रेस लगाती रही क्या उसकी जांच को लेकर राहुल गंभीर है  क्या जांच अंदर खाने शुरू हो चुकी है.. या फिर राहुल ऐसा चाहते हैं, तो कमलनाथ इस जांच को लेकर कितने गंभीर हैं..

क्योंकि कुछ ऐसे ही आरोप पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी लगाते रहे हैं.. तो सवाल यह भी खड़ा होना लाजमी है कि क्या राहुल गांधी संघ को कोई सीधा संदेश दे रहे हैं या फिर यह सोचने को मजबूर कर रहे हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार पर संघ का नियंत्रण है तो सोचिए और समझिए.. जांच एजेंसियों की आड़ में दिल्ली में जो हो रहा है उसका जवाब कांग्रेस शासित राज्यों से दिया जाएगा.. क्योंकि मध्यप्रदेश में अब कांग्रेस की सरकार आ चुकी है.. जिस तरह माखनलाल विश्वविद्यालय की जांच पहले ही शुरू हो चुकी है तो इसके आगे बढ़ने से इंकार भी नहीं किया जा सकता, चाहे फिर वो संस्कृति और धर्मस्व विभाग ही क्यों ना हो, तो सवाल क्या जन अभियान परिषद तक यह जांच पहुंचेगी तो संदेश भाजपा के लिए कि केंद्रीय एजेंसी, उनके परिवार और सहयोगी मंत्रियों की जांच करने के लिए स्वतंत्र है लेकिन राफेल के मुद्दे पर जवाब चाहिए तो मध्यप्रदेश में संघ कनेक्शन को एक्सपोज करने में कांग्रेस पीछे नहीं हटने वाली..

देखना दिलचस्प होगा कि बार-बार संघ प्रमुख का नाम लेकर आखिर राहुल गांधी किसको क्या संदेश देना चाहते हैं तो राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमलनाथ सरकार चाहे फिर वो मुख्यमंत्री हो या मंत्री, सभी को आगाह कर दिया है कि यदि जनता से दूरियां बनीं और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हुई तो मुख्यमंत्री बदलने में देर नहीं लगाई जाएगी, तो सवाल खड़ा होता है कि आखिर राहुल गांधी को यह बात सार्वजनिक मंच से क्यों कहना पड़ी..

क्या उन तक यह फीडबैक पहुंचा है कि कार्यकर्ता की उपेक्षा मंत्री कर रहे हैं और मुख्यमंत्री तक जनता का पहुंचना आसान नहीं है.. यही नहीं, राहुल गांधी ने ब्यूरोक्रेसी पर निशाना साधकर यह संदेश भी दे दिया कि कांग्रेस सरकार को न सिर्फ नौकरशाही के भरोसे आगे नहीं बढ़ना है, बल्कि उसे हर हाल में जनअपेक्षाओं को ध्यान में रखना होगा.. किसान आभार रैली के मंच से मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यदि एक तरह से अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड सामने रखा, जिसमें उन्होंने सीमित समय में भोपाल में अपनी उपलब्धियां, तो सरकार की उपलब्धियां विस्तार के साथ गिनाईं तो राहुल गांधी के निर्देश और उनके आशीर्वाद का हवाला देते हुए भरोसा दिलाया कि मध्यप्रदेश की विधानसभा में कांग्रेस का झंडा फहराने के बाद अब दिल्ली की संसद में भी पार्टी का झंडा बुलंद होगा..

कमलनाथ ने भरोसा जताया कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वचन पत्र के वादे पूरे कर जनता का समर्थन हासिल करेंगे.. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के सामने आए फोटो ने भले ही उनके व्यक्तिगत प्रगाढ़ रिश्तों को हवा दी, लेकिन कमलनाथ जुमलेबाजी के लिए कोसते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेना नहीं भूले.. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाषण के दौरान उनके उद्बोधन से ज्यादा उनके आक्रामक, जोशीले अंदाज ने लोगों को खूब लुभाया.. राहुल के साथ सिंधिया की और मजबूत होती केमिस्ट्री चर्चा का विषय बनी.. ज्योतिरादित्य ने जमकर कमलनाथ की तारीफ की, लेकिन कर्ज माफी की समय सीमा पर दोनों का विरोधाभास देखने को भी मिला..

वह बात और है कि राहुल गांधी ने भी सिंधिया की लाइन को दोहराया, लेकिन हकीकत वही थी, जो कमलनाथ ने कही कि शपथ लेने के कुछ घंटों के अंदर ही उन्होंने कर्ज माफी के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए थे.. हालांकि कमलनाथ ने कर्ज माफी के फैसले का लाभ 25 लाख किसानों को अगले 20 दिन में मिल जाने का भरोसा जताया.. इस दौरान प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया और कांग्रेस की सदस्यता लेने वाले रामकृष्ण कुसमरिया को छोड़ दिया जाए तो मंच से किसी और नेता को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया..

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