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सत्ता हो या विपक्षः प्रदेश में बुंदेलखंड का बढ़ता रुतबा

देवदत्त दुबे चाहे प्रदेश की सरकार हो या फिर विपक्षी दल, दोनों ही जगह इस समय बुंदेलखंड का रुतबा बढ़ता जा रहा है। सरकार में जहां बुंदेलखंड से 3 कैबिनेट मंत्री पहले ही बनाए जा चुके हैं वहीं मंगलवार को मुख्यमंत्री के ओएसडी के रूप में भूपेंद्र गुप्ता की नियुक्ति भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जबकि विपक्षी दल भाजपा में प्रदेश का एक महत्वपूर्ण पद नेता प्रतिपक्ष का गोपाल भार्गव के रूप में बुंदेलखंड को गया है। दरअसल बुंदेलखंड देश के पिछड़े इलाकों में आता है, जबकि बुंदेलखंड की जमीन के अंदर हीरा-पन्ना जैसी विश्व प्रसिद्ध धातुएं हैं, जबकि जमीन के ऊपर बेरोजगारी, गरीबी और पलायन है। अपने हालात को सुधारने के लिए बुंदेलखंडवासी लगातार प्रयास करते रहते हैं। इसके लिए वे सत्ता में भागीदारी के लिए भी सतत संघर्षरत रहते हैं।

इस समय एक बार फिर बुंदेलखंड बुलंदियों को छू रहा है। इसके पहले 2003 में बुंदेलखंडवासियों की उम्मीद बनी थी, जब उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन वह भी ज्यादा समय तक इस पद पर रह नहीं पाईं और बुंदेलखंड एक बार फिर निराश हुआ, लेकिन अब ऐसा अवसर आया है, जब बुंदेलखंड के पास सत्ता के साथ विपक्ष का नेता भी है। कांग्रेस की सरकार बनते ही बुंदेलखंड से 3 कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, हर्ष यादव और बृजेंद्र सिंह राठौर बनाए गए, साथ ही महत्वपूर्ण विभाग भी इन मंत्रियों को दिए गए। यह मंत्री जब अपने क्षेत्र में गए तो लोगों ने जोरदार स्वागत किया। इन मंत्रियों ने भी बुंदेलखंडवासियों को आश्वस्त किया कि वे क्षेत्र के विकास के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे।

मंगलवार को सरकार में एक और महत्वपूर्ण भूमिका के रूप में सागर के भूपेंद्र गुप्ता को मुख्यमंत्री का ओएसडी बनाने के रूप में मिली। वैसे तो यह गुप्ता का संघर्ष और पार्टी के प्रति समर्पण का प्रतिफल है, जो पिछले 15 वर्षों से लगातार भाजपा सरकार के खिलाफ अभियान चलाए हुए थे चाहे टीवी चैनलों में डिबेट के माध्यम से भाजपा सरकार की पोल खोलना हो या फिर तथ्यों और आंकड़ों को एकत्रित कर सरकार के खिलाफ लगातार अखबारों में बयानबाजी हो। सीमित साधनों में और पद पर रहे या ना रहे, लेकिन भूपेंद्र गुप्ता लगातार पार्टी के लिए संघर्ष करते रहे और वे जमीनी हकीकत से भी परिचित हैं, जिसमें सरकार में कहां खामियां होती हैं और कहां से सरकार उपलब्धियों को उभार सकती है।

यही कारण है कि उन्हें मुख्यमंत्री का ओएसडी बनाया गया है, जहां से भी अपने अनुभव का लाभ प्रदेश को और विशेषकर बुंदेलखंड को देने की कोशिश करेंगे। सरकार जब काम करती है तब उसे विपक्ष के सहयोग की भी आवश्यकता होती है। सो बुंदेलखंड इस समय बुलंदी पर है कि उसके पास विपक्ष के नेता के रूप में गोपाल भार्गव जैसा जमीनी नेता मौजूद है, जो सरकार को सकारात्मक सहयोग भी दे सकते हैं और यदि सरकार गलतियां करती है तो उसको सड़क से लेकर सदन तक उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। कुल मिलाकर बुंदेलखंडवासियों को इस समय मकर संक्रांति के लड्डू खाने का सिलसिला लगातार चलने वाला है।

पिछले एक सप्ताह से सागर में जुलूस और मिठाई वितरण एवं मालाएं पहनाने का कार्यक्रम जोरदार ढंग से चल रहा था कि मंगलवार को एक और खबर ने बुंदेलखंडवासियों को उत्साहित कर दिया, जब उसके जमीनी संघर्ष करने वाले नेता को मुख्यमंत्री का ओएसडी बना दिया गया। अब सत्ता और विपक्ष के इन नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे ना केवल बुंदेलखंड को बुलंदियों पर ले जाएं वरन क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में भी सहभागिता निभाएं, क्योंकि बुंदेलखंडवासी प्रदेश में अन्य क्षेत्रों से जब-जब कोई व्यक्ति महत्वपूर्ण पद पर पहुंचा है तो उसने सबसे पहले अपने क्षेत्र पर ध्यान दिया है।

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