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ब्रिटेन में ‘लव-जिहाद’ की यह हकीकत

बलबीर पुंज
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हाल में जब देश-दुनिया में सिख पंथ के लिए आस्था के प्रतीक करतारपुर गुरुद्वारे और संबंधित गलियारे के निर्माण की चर्चा थी, तब पंजाब से हजारों मील दूर ब्रिटेन में सिख युवतियों से संबंधित चिंताजनक और विक्षुब्ध करने वाली खबर थी। इस समाचार ने एक बार फिर रेखांकित कर दिया है कि भारत सहित शेष विश्व में तथाकथित उदारवाद और विकृत सेकुलरवाद के परोक्ष आशीर्वाद/समर्थन से कट्टर इस्लाम के नाम पर हो रहा जिहाद विभिन्न रूपों के साथ विकराल हो चुका हैं। क्या विश्व में इस संकट का अंत संभव है? 

ब्रिटेन की एक अध्ययन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्ता नी मूल के वयस्क मुस्लिम द्वारा बीते 50 वर्षों से भारतीय मूल की सिख युवतियों (नाबालिग सहित) को योजनाबद्ध तरीके चिन्हित किया जा रहा है और वह यौन-शोषण व प्रताड़ना की शिकार हो रही है। इस रिपोर्ट को ‘सिख मीडिएशन एंड रिहैबिलिटेशन टीम’ एस.एम.ए.आर.टी. (स्मार्ट) चैरिटी ने जारी किया है, जिसका उद्देश्य ब्रिटेन में दुर्व्यवहार और यौन शोषण के शिकार सिखों के पुनर्वास का प्रबंध करना है। साथ ही यह संगठन आवश्यकता पड़ने पर पीड़ित पक्ष और जांचकर्ताओं के बीच निजी रूप से मध्यस्थ की भी भूमिका निभाता है। यह संस्था उन पीड़ितों का भी संज्ञान लेती है, जिन्हे स्थानीय प्रशासन का सहयोग नहीं मिलता है। 

अपनी रिपोर्ट में ‘स्मार्ट’ संस्था ने कहा है कि गत पांच दशकों में जब भी पुलिस के पास ऐसा कोई मामला पहुंचा, तो राजनीतिक कारणों (पॉलिटिकल करेक्टनेस) से पीड़ित और उनके परिजनों की शिकायतों को अनदेखा कर दिया गया। यही नहीं, इस रिपोर्ट में उन कुछ घटनाओं का भी उल्लेख है, जिसमें पाकिस्तानी युवकों ने सिख युवतियों को अपने प्यार के जाल में फंसाकर पहले उनका बलात्कार किया, फिर उसे परिवार के अन्य सदस्यों के समक्ष भी परोस दिया। इस रिपोर्ट को वहां के प्रतिष्ठित समाचार दैनिकों ने प्रमुखता से उठाया है, जिसके बाद जांच की मांग तेज हो गई है। 

रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर पाकिस्तान के मुस्लिम युवकों के एक समूह का वर्णन है, जिनपर ब्रिटिश सिख लड़कियों का संयोजित रूप से यौन-शोषण करने का आरोप लगाया गया है। बकौल रिपोर्ट, पाकिस्तानी मूल के  वयस्क मुस्लिम, सिख युवतियों का शिकार उन क्षेत्रों और स्कूलों के आसपास करते है, जहां सिखों का वर्चस्व है या फिर उनकी संख्या सर्वाधिक है। इन्हीं क्षेत्रों में दिखने में खूबसूरत युवक, सिख लड़कियों को आकर्षित करने के लिए आधुनिक परिधानों और चटकीले रंग वाले महंगे वाहनों में घूमते नजर आते हैं। यहां इन युवकों का शिकार केवल सिख लड़कियां होती है, जिन्हे प्यार के जाल में फंसाकर भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने का प्रयास किया जाता है। 

रिपोर्ट में इस घटनाक्रम को वर्ष 2012 में सामने आए रोचडेल कांड जैसा बताया गया है। इस मामले में मुस्लिम युवकों के एक समूह ने 45 से अधिक श्वेत नाबालिग लड़कियों का बलात्कार या यौन शोषण किया गया था और 12 लोगों पर यौन-संबंध बनाने के लिए लड़कियों की तस्करी, बलात्कार और बच्चों को यौन-गतिविधियों में शामिल करने का आरोप लगा था। जांच और संबंधित सुनवाई पूरी होने के बाद 8 पाकिस्तानी मूल ब्रिटिश नागरिक और एक अफगानिस्तानी शरणार्थी को दोषी ठहराया गया था, जबकि शेष तीन में से एक निर्देष पाया गया, एक अन्य पर फैसला नहीं हो पाया और तीसरा आरोपी पाकिस्तान भाग गया। नाबालिगों का यौन-उत्पीड़न करने वाले अधिकतर दोषी (आरोपी सहित) विवाहित, संपन्न परिवार से संबंधित, 24-59 वर्ष की आयु सीमा और एक दूसरे को जानते थे। 

इसी तरह रौथरहैम में भी 1997-2013 के बीच 1,400 नाबालिग श्वेत लड़कियों के साथ एशियाई मूल की कई युवतियों के यौन-शोषण का मामला सामने आया था। इसमें भी अधिकांश पाकिस्तानी मुस्लिम युवक ही संलिप्त पाए गए थे, जोकि टैक्सी चालक थे। शुरूआत में इन सभी मामलों में भी पुलिस कार्रवाई से इनकार कर रही थी। किंतु जब जांच शुरू हुई और नतीजे सामने आए तो दोषियों/आरोपियों को एशियाई मूल का नागरिक कहकर संबोधित किया जाने लगा- जिसका बाद में व्यापक विरोध भी हुआ, क्योंकि इन मामलों में केवल पाकिस्तान मूल के ब्रितानी नागरिक या मुस्लिम युवक ही संलिप्त पाए गए थे। इस प्रकार की स्थिति से भारत भी सुपरिचित है, जहां स्वयंभू सेकुलरिस्ट या उदारवादी (मीडिया सहित) किसी भी आपराधिक घटना की गंभीरता को आरोपी और पीड़ित के मजहब की पुष्टि होने के बाद निश्चित करता है। 

‘स्मार्ट’ संस्था ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जहां रोचडेल और रौथरहैम के मामले कुछ वर्ष ही पुराने है, वहीं ब्रितानी सिख युवतियों को तो 1960 के दशक से मुस्लिमों द्वारा शिकार बनाया जा रहा है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने यह रिपोर्ट किसी व्यक्ति, समुदाय, संस्कृति या विश्वास को आहत करने के लिए नहीं जारी की है, बल्कि तथ्यों  के आधार पर सार्वजनिक की हैं, जिसे समझे बिना मामले का समाधान संभव नहीं है। 

जैसे ही यह रिपोर्ट ब्रितानी मीडिया में आई, मुख्य राजनीतिक दल लेबर पार्टी की महिला सांसद सुश्री सारा चैंपियन ने इसे जोर-शोर से उठाकर जांच की मांग कर दी। जब पहली बार उन्होंने इस रिपोर्ट के बारे सुना तो उन्हे भरोसा ही नहीं हुआ। सारा कहती हैं, ‘मैं इस बात से अचंभित थी कि कैसे दशकों से और इतने व्यापक रूप से पाकिस्तानी पुरुषों के समूह द्वारा सिख लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है।’ किंतु जब उन्होंने सिख महिलाओं से इस संदर्भ में बात की, तब वह इस निष्कर्ष पर पहुंची कि दशकों से यह यौन-उत्पीड़न का खेल कितना व्यापक, गंभीर और संगठित है। सारा का कहना हैं, ‘यौन शोषण के सभी रूपों को रोका जाना चाहिए। इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए उत्पीड़न की शिकार सिख लड़कियों से बात करने की आवश्यकता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि अधिकारी भी इसे गंभीरता से लें।’ 

ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अंग्रेजी दैनिक ‘डेली मेल’ ने इस रिपोर्ट के अंशों को न केवल विस्तार से प्रकाशित किया है, साथ ही इसे आधार बनाकर ब्रिटेन में सिख महिलाओं की स्थिति का आकलन भी किया है। अध्य यन में 1970 दशक से पहले एक भारतीय मूल की युवती से संबंधित घटना का उल्लेख किया गया है। इसमें एक सिख लड़की के साथ दुर्व्यवहार का मामला भी सामने आया था। इसके अतिरिक्त, 1980 के दशक में उस घटना का भी जिक्र किया गया है कि एक सिख युवती के सा‍थ छेड़छाड़ की गई थी। इस दौरान यह बात भी सामने आई कि उस कालखंड में सिख समुदाय के लोगों ने मुस्लिम युवकों के खिलाफ न केवल सिख लड़कियों को तंग करने की घटनाएं दर्ज कराई थी, साथ ही उनपर कुछ लड़कियों का उपयोग ‘सेक्स स्लेव’ के रूप में भी करने का आरोप लगाया था। 

इस विकृति की जड़े ब्रिटेन में कितनी गहरी है- यह इस बात से स्पष्ट हो जाता है कि वहां सिख महिलाओं को मुस्लिम युवकों के हमलों से बचाने के लिए 1989 में ‘शेर-ए-पंजाब’ संगठन की स्थापना की गई थी। इसी तरह 2008 में मुस्लिम युवकों द्वारा संचालित एक वेबसाइट भंडाफोड़ हुआ था, जिसमें कॉलेज की फ्रेशर पार्टियों में सिख युवतियों को फंसाने की युक्तियां सुझाई गई थी। 

इस भयावह स्थिति के लिए ब्रिटेन के वह कानूनी प्रवर्तन एजेंसियां और अधिकारी जिम्मेदार है, जो राजनीतिक कारणों से न केवल समस्या का हल निकालने में विफल रहे है, साथ ही इसका संज्ञान लेने से भी बचते नजर आए है। भारत में ‘लव-जिहाद’ को अक्सर सेकुलरवाद और उदारवाद के नाम पर मिथक/काल्पनिक या फिर भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित अन्य हिंदूवादी संगठनों द्वारा गढ़ा हुआ घोषित करने का प्रयास किया जाता है। यदि ऐसा है, तो देश के इस विकृत समूह का ब्रिटेन में मुस्लिमों द्वारा सुनियोजित ढंग से हो रहे भारतीय मूल की सिख युवतियों के यौन-उत्पीड़न को लेकर क्या मत है?

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