विधानसभा की भूल सुधार होंगे लोकसभा के टिकट

देवदत्त दुबे 15 वर्षों के बाद प्रदेश में सत्ता से बाहर हुई भाजपा उन गलतियों को नहीं दोहराना चाहती जो विधानसभा चुनाव के दौरान हो चुकी है। लोकसभा के टिकट ठोक बजाकर केवल जीतने वाले दावेदारों को ही दिए जाएंगे जिसमें संघ की राय भी मानी जाएगी। जिन सांसदों के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी है उनके टिकट काटे जाएंगे और टिकट के चयन में प्रादेशिक नेताओं की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नेतृत्व महत्वपूर्ण भूमिका होगी। दरअसल जब चुनाव में किसी राजनीतिक दल को सफलता मिलती जाती है तब वह उसमें बहुत छेड़छाड़ नहीं करता लेकिन जैसे ही चुनावी हार मिलने लगती है पार्टी के नेता आत्म चिंतन की मुद्रा में आ जाते हैं और वे पिछले चुनाव में कोई गलतियां को सुधारने का प्रयास करते हैं जिससे आगे के चुनाव में उन्हें सफलता मिल सके।

बहरहाल मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की हार के पीछे जो तीन प्रमुख कारण पार्टी की समीक्षा बैठकों में उभरकर आए हैं उसमें पहला कारण संघ ने लगभग 80 विधायकों के टिकट काटने की सलाह पार्टी को दी थी जो नहीं मानी गई। दूसरा पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने टिकट वितरण के लिए पूरी तरह से मध्यप्रदेश के नेताओं और खासकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जिम्मेवारी सौंपी थी और चौहान अपने विधायकों के टिकट नहीं काट पाए असफल रहे। पार्टी के प्रादेशिक नेताओं को अब लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण से दूर रखने की रणनीति पर काम हो रहा है।

पार्टी के प्रदेश में लोकसभा प्रभारी स्वतंत्र देव सिंह की सिफारिश पर पार्टी नेतृत्व जरूर ध्यान देगा। स्वतंत्र देव सिंह ने प्रदेश के लगभग सभी जिलों का दौरा करके पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से फीडबैक लिया है। उसके आधार पर उन्होंने पार्टी हाईकमान को दिल्ली में एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें लगभग एक दर्जन सांसदों के टिकट काटने की सिफारिश की है। संघ ने भी लगभग 16 सांसदों के काटने की सिफारिश की थी। अब तो संघ ने प्रदेश में लगभग आधा दर्शन टिकट का निर्णय स्वयं करने का फरमान भी पार्टी को जारी कर दिया है। विधानसभा चुनाव में संघ की सलाह ना मानने का भाजपा खामियाजा भुगत चुकी है। यही कारण है कि लोकसभा चुनाव में संघ की भूमिका अहम रहेगी।

पार्टी के प्रादेशिक नेताओं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव को प्रदेश के दौरे पर लगा दिया है जो मालवा और चंबल क्षेत्र के दौरा करने के बाद अब बुंदेलखंड पहुंचेंगे। सागर लोकसभा क्षेत्र के लिए बीना में और दमोह लोकसभा क्षेत्र के लिए देवरी में पार्टी ने इन नेताओं की सभाएं आयोजित की है। कुल मिलाकर पार्टी विधानसभा चुनाव की गलतियों से सबक लेकर लोकसभा चुनाव में भूल सुधार करके आगे बढ़ना चाहती है खासकर टिकट वितरण में किसी भी प्रकार की हीला हवाली नहीं चलेगी। केवल और केवल जीतने वाले प्रत्याशियों की तलाश की जा रही है। युवा और बुजुर्गों नेताओं में समन्वय बनाते हुए पार्टी टिकट वितरण करेगी। जब से 75 पार के फार्मूले पर पार्टी ने रियायत दी है तब से पार्टी के बुजुर्ग नेता भी टिकट की दौड़ में शामिल हो गए हैं।

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