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कमलनाथ : मुस्कुराहट में ताकत तो राज भी छुपे...

राकेश अग्निहोत्री  मुख्यमंत्री कमलनाथ ने छिंदवाड़ा से बाहर पहले बड़े सार्वजनिक सरकारी कार्यक्रम में शिरकत कर जो संदेश दिए.. वह गौर करने लायक हैं.. चाहे फिर सरकार को अस्थिर करने पर पलटवार या फिर वचन पत्र को पूरा करने का संकल्प दोहराना ही क्यों न हो.. सफाई सिर्फ किसानों के लिए आवंटित बजट प्रावधान तक तो पूंजी निवेश को लेकर बिना पत्ते खोले लगे हाथ यह साफ कर दिया.. इंतजार करिए मध्यप्रदेश की तस्वीर बदलने वाली है.. कमलनाथ की मुस्कुराहट यदि उनकी अपनी ताकत का एहसास करा रही थी, तो कई राज भी वो छुपा गए.. व्यक्तिगत प्रचार-प्रसार से तौबा कर चुके कमलनाथ को शायद अपनी काबिलियत और दूरदर्शिता पर भरोसा था, जो यह मानकर आगे बढ़ रहे हैं कि अंततोगत्वा काम बोलना है..

शायद यही वजह है कि 25 दिसंबर को मंत्रिमंडल का गठन करने की याद दिलाते हुए कमलनाथ ने 18 दिन के अपने कामकाज का लेखा-जोखा इशारों-इशारों में सामने रख दिया, तो संदेश दे दिया कि वह निश्चिंत हैं चाहे फिर वचन पत्र को मूर्तरूप देने की बात हो या फिर सरकार, नीति, नीयत और स्थिरता पर खड़े किए जाने वाले सवाल.. सबसे निपटने में वह सक्षम हैं.. सवाल खड़ा होना लाजमी है कि इसे कमलनाथ की निश्चिंतता और आत्मविश्वास कहा जाए, जो पहले ही कह चुके हैं कि वह अपनी लाइन बड़ी करके साबित करेंगे कि जवाबदेही पर वह खरा उतरेंगे..

राहुल गांधी के एजेंडे किसान कर्जमाफी के आगाज की तारीख मकर संक्रांति मुकर्रर की गई.. नई सरकार के लिए इससे बड़ा शुभ काम कोई हो नहीं सकता, जिसे सही मुहूर्त पर शुरू किया.. जब दिल्ली से लौटे मुख्यमंत्री कमलनाथ किसान मंच से मीडिया के मार्फत अपनी सरकार के संकल्प और उसकी दिशा इंगित कर रहे थे.. तब संयोग देखिए की पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के राजगढ़ क्षेत्र में पाला पीड़ित किसानों के बीच पहुंचकर उन्हें मुआवजा देने की मांग कर रहे थे.. बतौर मुख्यमंत्री कमलनाथ की पूरे कार्यक्रम के दौरान विशेष मौकों पर कई बार नजर आई मुस्कुराहट सिर्फ देखने नहीं, बल्कि समझने लायक थी..

क्योंकि इस मंच से उन्होंने अपनी सरकार गिराने वालों की यह कहकर खबर ली कि पहले अपना घर संभाल लो तो लगे हाथ विधानसभा सत्र की जोर आजमाइश की वह यादें भी ताजा कर दी, जो भाजपा की कमजोर कड़ी बनकर सामने आ चुकी है.. कमलनाथ ने मैदान छोड़ने वाली भाजपा को एक्सपोज करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.. मंच भले ही किसान और फोकस ऋण माफी पर था, लेकिन कमलनाथ ने पूंजी निवेश की नई संभावनाओं को नए सिरे से आगे बढ़ाया.. मुख्यमंत्री ने पत्ते नहीं खोले, लेकिन यह बता दिया कि वो देश के जाने-माने उद्योगपतियों के संपर्क में हैं, जिसका जिक्र वह छिंदवाड़ा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कर चुके हैं और जल्द इसके परिणाम सामने आएंगे.. यानी वो शिवराज की इन्वेस्टर्स समिट की पोल खोल अभियान को आगे बढ़ाने वाले हैं..

ऋण माफी के लिए बजट में प्रावधान पर सवाल खड़े करने वाली भाजपा को जिस अजीबोगरीब मुस्कुराहट के साथ जवाब दिया.. वह उनके आत्मविश्वास को दर्शा रहा था कि बजट से आगे वादा निभाने के लिए उनके पास ब्लू प्रिंट तैयार है.. यही नहीं, एक सवाल के जवाब में मायावती द्वारा खड़े किए गए सवाल साहूकारों से किसानों को निजात दिलाने का भी भरोसा दिलाया..  कमलनाथ का सीमित सारगर्भित उद्बोधन इस दौरान उनकी भावभंगिमा तो मंच की हर कड़ी पर पैनी नजर इस बात की ओर इंगित कर रही थी कि वह चुनौतियों से अनजान नहीं हैं..

किसान द्वारा ऋण माफी से लोकसभा चुनाव में होने वाला फायदा हो या फिर ‘तुम गरीबों की सुनोगे’ की तारीफ कमलनाथ बिना मुस्कुराए नहीं रह पाए, जिन्होंने खुद व्यंग्य और कटाक्ष का सहारा लेकर अपनी सरकार को अस्थिर करने वालों को खरी-खोटी ही नहीं सुनाई, बल्कि चुनौती दे डाली कि रणछोर उनकी सरकार क्या गिराएंगे..

मायावती के संपर्क में कमलनाथ की रणनीति को भी समझना होगा, जिन्होंने भले ही बसपा सुप्रीमो को जन्मदिन पर बधाई दी हो, लेकिन जो राहुल गांधी के ऋण माफी पर  सीधा सवाल खड़ा कर रही हैं, जिन्होंने साहूकारों की हठधर्मिता पर सवाल खड़ा किया उसका समाधान निकालने का वादा कमलनाथ ने किया, तो समझा जा सकता है कि लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कमलनाथ और मायावती का संपर्क और संवाद कितना मायने रखता है.. मायावती पहले ही उत्तर प्रदेश से बाहर सपा-बसपा गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने के संकेत दे चुकी हैं, जिनके दो विधायक कमलनाथ सरकार को मजबूती दिए हुए हैं..

इसे कमलनाथ का आत्मविश्वास कहा जाए या फिर जवाबदेही का एहसास और चुनौतियों से निपटने का जुनून, जब कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीयू सरकार पर गहराए संकट के लिए भाजपा पर पैनी नजर है, तब कमलनाथ मध्यप्रदेश से भाजपा को चुनौती दे रहे थे, जिन्होंने मोदी को भी नहीं छोड़ा, तो सवाल यहीं पर खड़े होते हैं कि आखिर इतनी निश्चिंतता कमलनाथ में क्यों नजर आ रही है, जो पहले ही कई खुलासे करने की बात कह चुके हैं..

क्या एक महीने से कम समय में प्रदेश की सियासत को उन्होंने बखूबी समझ गया है या फिर चुनौती देने वाली भाजपा और उसके नेताओं की ताकत का आंकलन कर चुके हैं या फिर उन्हें फ्री कंसलटेंसी के लिए मशहूर अपने मित्र दिग्विजय सिंह की रणनीति पर पूरा भरोसा है कि उनके रहते सरकार का कोई बाल बांका नहीं कर सकता या फिर निर्दलीय, सपा, बसपा का ही नहीं, भरोसा बीजेपी के भी कुछ विधायकों का वह जीत चुके हैं..

संख्या बल के मापदंड पर उन्हें अपने प्रबंधन पर भरोसा है.. कमलनाथ अच्छी तरह जानते हैं कि कसौटी पर उनकी प्रबंधन क्षमता साख, अनुभव और दूरदर्शिता पहले ही लग चुकी है, जिसकी अग्निपरीक्षा लोकसभा चुनाव में होना है.. मुस्कुराहट में सिर्फ आशा, संभावना ,ताकत ही नहीं विश्वास छुपा नजर आया.. इसे सांसद से मुख्यमंत्री बने कमलनाथ का पावर स्ट्रोक माना जाए या फिर वक्त का तकाजा ..यह तो समय ही बताएगा लेकिन अपनी सरकार की मजबूती को लेकर वह पूरे कॉन्फिडेंट नजर आए..

भले ही कोई यह कहे कि दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य और दूसरे क्षत्रपों को साधना और पूरे 5 साल भरोसे में लेकर आगे बढ़ना उनके लिए आसान नहीं.. संदेश कमलनाथ का अपने शुभचिंतकों आलोचकों और प्रतिनिधियों के साथ महत्वाकांक्षी नेताओं के लिए भी छुपा है कि वह समझे उनकी इस मुस्कुराहट में कई राज छुपे तो  उनकी ताकत को समझना होगा, जिसका राजनीति में अपना स्टाइल जिसे वह छुपाना भी नहीं चाहते

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