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क्या कांग्रेस हरा पाएगी भाजपा को?

अजित द्विवेदी
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कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। पिछले पांच साल में वह गोवा के अपवाद को छोड़ दें तो कहीं भी भाजपा को नहीं हरा पाई है। कांग्रेस ने आखिरी बार भाजपा को 2013 के मई में कर्नाटक में हराया था। उसके बाद पिछले पांच साल से भाजपा उसको हरा रही है। कर्नाटक चुनाव के तुरंत बाद आठ जून 2013 को भाजपा ने गोवा अधिवेशन में नरेंद्र मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव के अभियान समिति का प्रमुख नियुक्त किया था। उस दिन से लेकर आज तक कहीं भी भाजपा को नहीं हरा पाई है कांग्रेस।

ऐसा नहीं है कि भाजपा चुनाव नहीं हारी है। वह 2015 की फरवरी में दिल्ली में हारी और उसी साल नवंबर-दिसंबर में बिहार में हारी। पर दोनों जगह उसे दूसरी पार्टियों ने हराया। दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने हराया और बिहार में राजद और जदयू के गठबंधन ने हराया। कहने को कह सकते हैं कि कांग्रेस भी उस गठबंधन का हिस्सा थी पर असली लड़ाई नीतीश के चेहरे और लालू प्रसाद के वोट बैंक पर लड़ी गई थी। एकमात्र राज्य गोवा है, जहां कांग्रेस ने भाजपा को हराया। वहां कांग्रेस को भाजपा से तीन सीटें ज्यादा मिलीं पर वह न बहुमत हासिल कर सकी और न सरकार बना सकी। 

नरेंद्र मोदी के भाजपा का सर्वोच्च नेता बनने के बाद कांग्रेस की दो उपलब्धियां हैं। पहली वह पंजाब में जीती और दूसरी, कर्नाटक में हार कर भी सरकार बनाई। पर पंजाब की जीत भाजपा के ऊपर नहीं, बल्कि उसकी सहयोगी अकाली दल के ऊपर थी। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले ही राज्य में भाजपा हाशिए की पार्टी हो गई थी और लड़ाई कांग्रेस व अकाली दल के बीच थी, जिसका तीसरा कोण आम आदमी पार्टी ने बनाया था। कर्नाटक में कांग्रेस ने जेडीएस के साथ मिल कर सरकार बना ली पर असली जीत भाजपा की हुई थी। कांग्रेस सवा सौ सीटों से घट कर 80 पर आ गई, जबकि भाजपा 40 सीटों से बढ़ कर 104 पर पहुंची। 

जून 2013 के बाद जहां भी कांग्रेस की सीधी लड़ाई भाजपा से हुई वहां कांग्रेस हारी है। भाजपा ने प्रादेशिक क्षत्रपों को भी हराया पर उनसे हारी भी है। लेकिन कांग्रेस से नहीं हारी है। इसकी शुरुआत गुजरात से ही हो गई थी। 2013 में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान हर जगह भाजपा मजे में जीती। उसके बाद लोकसभा चुनाव में उसने कांग्रेस का लगभग सफाया कर दिया। 2014 में ही भाजपा ने कांग्रेस को हरियाणा और महाराष्ट्र में हराया और झारखंड में हराया। फिर 2016 में भाजपा ने कांग्रेस के हाथ से असम छीन लिया। 2017 में भाजपा ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को हराया और गुजरात का चुनाव भी जीता। उत्तर पूर्व के दो राज्यों को छोड़ कर सबमें भाजपा ने सरकार बना ली। 

अब कांग्रेस पर भाजपा की जीत का चक्र पूरा हो गया है और फिर मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव हो रहे हैं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मतदान हो गया है और राजस्थान में सात दिसंबर को मतदान होगा। तभी सवाल है कि कांग्रेस इस बार भाजपा को हरा पाएगी या नहीं? अगर कांग्रेस इस बार भाजपा को हरा देती है तो उसकी जीत का सिलसिला शुरू होगा। कांग्रेस के ऊपर भाजपा के अजेय होने का मिथक टूटेगा। यह धारणा टूटेगी कि जब नरेंद्र मोदी की कमान में भाजपा कांग्रेस से लड़ती है तो कांग्रेस की आधी ताकत भाजपा में चली जाती है। तभी सीना ठोंक कर नरेंद्र मोदी ने कहा कि वे 17 साल से कांग्रेस को हरा रहे हैं। ध्यान रहे 17 साल पहले वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे और तब से 2013 तक मुख्यमंत्री के रूप में कांग्रेस को हराते रहे। 2014 से प्रधानमंत्री के रूप में कांग्रेस को हरा रहे हैं। 

एक तरफ उनको इस बात का अहंकार है कि वे 17 साल से कांग्रेस को हरा रहे हैं तो इस बात का डर भी है कि अगर कांग्रेस को हराने का मिथक टूटा तो क्या होगा? उनको प्रादेशिक क्षत्रपों की चिंता नहीं है पर कांग्रेस की है। तभी उन्होंने कांग्रेस को खत्म करने की हुंकार भरी है। उन्होंने यहां तक कहा है कि सपा, बसपा, लेफ्ट से उनको कोई समस्या नहीं है पर कांग्रेस को खत्म होना चाहिए। वे कांग्रेस मुक्त भारत के अपने नारे पर कायम हैं और छत्तीसगढ़ व तेलंगाना के प्रचार में उन्होंने लोगों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि कांग्रेस का एक भी विधायक चुनाव नहीं जीतने पाए। इस प्रचार से अपने आप जाहिर होता है कि नरेंद्र मोदी को कांग्रेस की वापसी की संभावना से कैसी चिंता या घबराहट हुई है। 

तभी उन्होंने प्रचार में सारे दांव आजमाए हैं। सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को जमीन घोटाले में जांच के दायरे में लाने का जो काम साढ़े चार साल में नहीं हुआ वह अब हो रहा है। राजस्थान में मतदान से पहले बीकानेर की जमीन के मामले में उनको ईडी का समन गया है। कांग्रेस के छुटभैया नेताओं के बयान को आधार बना कर प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी मां और पिताजी को चुनावी बहस में घसीटा है। नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक चार पीढ़ियों की आलोचना चल रही है। यह साबित किया जा रहा है कि देश की सारी समस्याओं की जड़ कांग्रेस है। जैसे बिहार में नीतीश कुमार राज्य के दस करोड़ लोगों को डराते हैं कि लालू राज आ जाएगा या हरियाणा में कांग्रेस और भाजपा लोगों को चौटाला राज से डराते हैं वैसे मोदी और शाह देश के सवा सौ करोड़ लोगों को कांग्रेस राज से डरा रहे है। 

उनको पता है कि कांग्रेस ने भाजपा को हराया तो सारे मिथक टूट जाएंगे। फिर 2019 का चुनाव भाजपा के लिए बहुत मुश्किल हो जाएगी। अभी तक जो कांग्रेस 2019 के फाइनल मुकाबले से बाहर दिख रही है वह आमने सामने के मुकाबले में आ जाएगी। उसके ईर्द गिर्द भाजपा विरोधी पार्टियों का जमावड़ा हो जाएगा। और जितनी पार्टियां उससे जुड़ती जाएंगी लड़ाई उतनी ही मुश्किल होती जाएगी।

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